आज अभी और यहीं

प्रभावित होना और प्रभावित करना जीवंतता का लक्षण है। जिस व्यक्ति से हम प्रभावित होते हैं, उससे जाने-अनजाने में बहुत कुछ सीखते भी हैं। जब चारों तरफ कुहरा हो, उदासी हो तब ऐसे लोग मन को ताजगी दे जाते हैं। हम जीवंत प्रभाव का उपयोग इसलिए नहीं कर पाते हैं कि या तो हम अपने बीते हुए पलों में खोये रहते हैं या फिर भविष्य की चिंताओं में डूबे रहते हैं। दोनों सूरतों में दुःख ही मिलता है।

जीवन वर्तमान का दूसरा नाम है। उसका संबंध बीते हुए या आने वाले कल से नहीं है। जो वर्तमान में जीता है वही हमेशा खुश रहता है। इसलिए आज और अभी जीना शुरू कर देने में ही भलाई है। इस तरह जीने वाले लोग बड़े चतुर होते हैं। उनमें इतना विवेक अवश्य होता है कि वे अवसरों को खुराक देते हैं और समस्याओं को भूखा रखते हैं। वास्तव में जो हमारे पीछे है और हमारे आगे है, वह उसकी तुलना में बहुत छोटा है जो हमारे सामने है।

हम हमेशा जिम्मेदारियों से भागते रहते हैं। उनसे बचने के बहाने खोजते रहते हैं। गलती अपनी भी हो तो दोषी दूसरों को ठहराने की हरसंभव कोशिश करते हैं। लेकिन भागने में नहीं, अपनी जिम्मेदारी के मोर्चे पर डटकर काम करने में जीवन का सौंदर्य है। जिम्मेदारी हमें तराशती है। लेकिन सावधान रहना होगा कि हम आरी चलाने में इतना व्यस्त न हो जाएँ कि उसकी धार बनाने का समय न मिले।

अक्सर हम किसी भी चीज को ज्यों का त्यों स्वीकार नहीं करते हैं। हर जगह अपने बचाव की चिंता में डूबे रहते हैं। उसमें अपनी सोच जोड़ देते हैं। अगर गौर करें तो जो हो रहा है, उसे होने देना चाहिए, कोई अवरोध नहीं बनना चाहिए। नीयत अपनी साफ हो, नियति अपना काम करती है। तमाम फैसलों को अपने हाथों में लेने की गलती सुख और आनंद दोनों का हरण कर लेती है। हम याद रखें कि हम खुद एक ऊर्जा हैं। उस ऊर्जा का दमन विस्फोट का कारण बन सकता है।

दुनिया में ऐसा कौन है जिसे किसी भी तरह की शिकायत न हो ? घर, रिश्तेदार, दफ्तर से लेकर भगवान तक से हम शिकायत ही करते हैं। हम खिन्न रहते हैं कि हमें हमारे अनुसार नहीं मिला। जिंदगी ने नाइंसाफी की। हमारी योग्यता का मूल्यांकन नहीं हुआ। पर, हम भूल जाते हैं कि हमारी नजर सदा उस पर होनी चाहिए जो हमको मिला है। देखा जाए तो हमारे तमाम दुखों और तकलीफों का आधार यह सोच है कि हमारे दुख के कारण दूसरे हैं। कितना अच्छा हो कि हम पूरे दिल से पहले खुद को समझने की कोशिश करें, बाद में समझे जाने की।

हम चाहते हैं कि हालात न बदलें। जैसा चल रहा चलता रहे। जिंदगी में कभी कोई लॉकडाउन न हो। कभी आइसोलेट न होना पड़े। किस्मत हमेशा साथ देती रहे। हम भुला बैठते हैं अक्सर कि हमारा व्यवहार हमारे फैसलों से संचालित होता है, न कि हालात से। हम मनचाहे की जिद में अति के आदी हो जाते हैं, जिससे जीवन की गति अवरुद्ध होने लगती है। हम भूल जाते हैं कि गम और खुशी दोनों स्थायी नहीं है। इसलिए बेहतर है कि न तो पाने का खुशी में डूब जाएँ, न ही खोने के दुख में अपना आपा खो बैठें। तो फिर क्या, जिंददिली से ऐलान कर दें –

वक़्त ने थकाया है लेकिन मैं परेशां नहीं हूँ,
हालात से हर जाऊं मैं वो इंसान नहीं हूँ।

बेहतर यही है कि किसी भी तरह की मुसीबत को बच्चा ही रहने दें, उसे बाज़ बनने का प्रशिक्षण न दें, वरना एक दिन आप भी उसके शिकार हो जायेंगे। फिर आफत आयी तो आहत हो बैठेंगे। नहीं, याद रखें एलेनॉर रूजवेल्ट ने क्या खूब कहा है – आपकी मर्जी के बिना कोई आपको आहत नहीं कर सकता। इसलिए, जियो जीतने के लिए !

मो. 9301054300