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कुंभ में आए दुनिया भर के आदिवासियों ने लगाई डुबकी

कुंभनगर। अरैल स्थित परमार्थ निकेतन शिविर में विश्व के 42 देशों से आए आदिम जाति-आदिवासी, जनजाति के लोगों ने परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती व जीवा की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती के साथ सोमवार को संगम में डुबकी लगाकर विश्व एक परिवार का संदेश दिया।

इस दौरान इन जातियों के लीडर्स और कीवा फेस्टिवेल में हिस्सा ले रहे विदेशियों ने संगम के तट पर स्वच्छता अभियान भी चलाया। इन मेहमानों ने कहा कि भारत आकर विश्व के सबसे बड़े मेले में भाग लेना जीवन का विलक्षण अनुभव है। पहली बार इतने देशों के आदिवासियों ने कुंभ में एक साथ डुबकी लगाई। बोले, लगता है मानो स्वर्ग में आ गए हों। भारतीय श्रद्धालुओं में धर्म एवं अध्यात्म के प्रति आस्था देख गदगद हैं। कहा कि भारत के लोगों में धर्म के प्रति आस्था है कि वे गठरी लिए चले आ रहे हैं। संगम के तट पर और बस एक ही भाव कि एक डुबकी लग जाए।

इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रयागराज कुंभ में एक ऐसा कुंभ हो रहा है जो पूरी दुनिया को संगम का दर्शन करा रहा है। यही तो है संगम तट से दुनिया को संदेश, जहां पर सारी संस्कृतियां मिल जाती हों, एक हो जाती हों, एक परिवार बना देती हों। भारत के ऋषियों ने गुफाओं में रहकर विश्व एक परिवार है की संस्कृति को बनाए रखने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि भारत धरती का एक टुकड़ा नहीं बल्कि भारत एक जीता-जागता राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों से आए लोगों को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती ने अपनी ओर खींचा है। इसलिए, हमें अपने अध्यात्म को, अपनी गंगा को, अपनी नदियों को और जलाशयों को बचाकर रखना होगा। स्नान करने के बाद सबने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। जल बचाने के लिए साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

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पैट्रिक ने कहा कि एक साथ इतनी सारी संस्कृतियों का मिलन, यह केवल भारत में ही संभव है। परमार्थ निकेतन की ओर से चलाए गए स्वच्छता अभियान में भारत समेत कई अन्य देशों के लोग शामिल हुए।

कीवा प्रकृति के सानिध्य का पर्व

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प्रकृति से सानिध्य का पर्व है कीवा। इसमें पृथ्वी के गर्भ में अग्नि, मृदा, जल, पत्थरों और चारों दिशाओं का विशेष महत्व है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि कीवा पर्व के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।

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