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शिक्षिका की प्रेरणा से कबाड़ से गणित के दीवाने हुए बच्चे

प्रीति शर्मा कबाड़ से ‘मैथ लैब’ बनवाकर 143 बच्चों को अनोखे तरीके से गणित पढ़ा रही हैं। ये बच्चे एग्जाम में गणित में अब 95 फीसदी तक अंक ला रहे हैं। वह हर महीने गणित सप्ताह मनाती हैं, साथ ही ‘शिक्षक क्लब’ बनाकर अपने इलाके के अन्य स्कूलों के मैथ टीचर्स को भी जोड़ रही हैं।

राजनांदगांव (मध्य प्रदेश) के गांव बघेरा में मिडिल स्कूल की गणित की शिक्षिका प्रीति शर्मा का एक अनोखा नवाचार लोगों के लिए, खासकर शिक्षक समुदाय और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। वैसे तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई का स्तर ऊंचा करने के लिए शासन और सरकारों की ओर से आए दिन तरह तरह की योजनाएं संचालित होती रहती हैं लेकिन जब कोई टीचर खुद के विवेक और श्रम से अपनी खोज पर आधारित शिक्षा पद्धति विकसित कर बच्चों की पढ़ाई आसान कर दे तो उसकी कोशिश हर किसी के लिए गौरतलब हो जाती है। प्रीति शर्मा ने ऐसा ही कुछ किया है। उन्होंने खुद के छह हजार रुपये में कबाड़ से एक ‘मैथ लैब’ बनवाया है। इस लैब में विगत पांच वर्षों से लगभग सौ बच्चे इस समय टीचिंग लर्निंग मटेरियल से गणित के कठिन सवाल हल करना सीखते हैं। इस कोशिश का नतीजा ये रहा है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को 95 फीसदी तक अंक मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, वह एक ‘शिक्षक क्लब’ बनाकर अपने इलाके के अन्य स्कूलों के मैथ टीचर्स को भी इस दिशा में सक्रिय कर रही हैं।

प्रीति शर्मा का मानना है कि ज्यादातर बच्चों की मैथ में अरुचि होती है क्योंकि उनके लिए वह सबसे कठिन सब्जेक्ट लगता है। साथ ही, स्कूलों में बच्चों की इस अरुचि को ध्यान में रखते हुए मैथ की उतनी एकाग्रता से पढ़ाई भी नहीं होती है। प्रीति बताती हैं, ‘‘उनके स्कूल में इस समय कुल 143 छात्र हैं। उनका मैथ सब्जेक्ट पर फोकस यह एजुकेशनल नवाचार बच्चों को खूब पसंद आता है।’’ वह कहती हैं, ‘‘पिछले साल 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के आंकड़ों के अनुसार देशभर के कुल 11,62,645 स्टूडेंट्स में से 5,52,131 ने मैथेमैटिक विषय को चुना था। ग्लोबल एजुकेशन सेंसस-2018 के अनुसार मैथेमैटिक्स दुनियाभर में कॉमन सब्जेक्ट के रूप में सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला विषय है। इसे 88 प्रतिशत स्टूडेंट्स पढ़ते हैं।’’ हालांकि कुछ स्टूडेंट्स मानते हैं कि मैथेमैटिक्स में कॅरिअर के सीमित विकल्प हैं। यही वजह है कि मैथ्स बैकग्राउंड के ज्यादातर स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग या गवर्नमेंट जॉब को प्राथमिकता देते हैं। जो स्टूडेंट्स इनमें रुचि नहीं रखते वे बीएससी में एडमिशन ले लेते हैं पर यूजी या पीजी के बाद कॅरिअर की शुरुआत उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।

अगर हम इस तरह के नवाचार से बच्चों का गणित में बेहतर रुझान बना सकें तो उनका भविष्य आसान हो जाएगा। प्रीति शर्मा बताती हैं, ‘‘वह समय-समय पर अपने स्कूल में गणित सप्ताह आयोजित करती हैं जिसमें पहाड़ा, गुणा, भाग और वैदिक गणित से संबंधित प्रतियोगिताएं होती हैं। इस बार दिसंबर के तीसरे सप्ताह में गणित सप्ताह का आयोजन किया गया। दूसरे दिन गणितीय रंगोली प्रतियोगिता हुई। फिर गणित मेले और गणितीय नाटक का कार्यक्रम किया गया, जिसमें गणित के महत्व को बताया गया।’’ इसमें बच्चों के अभिभावकों को भी शामिल किया गया ताकि बच्चे सहजता से प्रशिक्षित हो सकें।

अभिभावकों की भी गणित के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के लिए तरह-तरह के ग्राफ प्रदर्शित किए गए। गणित सप्ताह में बच्चों को बैंकों में ले जाया जाता है। सामान्य गणित क्विज प्रतियोगिताएं होती हैं। प्रीति शर्मा कहती हैं, ‘‘आज मैथेमैटिक्स से डेवलप होने वाली स्किल्स से स्टूडेंट्स के लिए ढेरों अवसर हैं लेकिन इसके लिए स्टूडेंट्स को मैथ्स के साथ नई स्किल्स को भी डेवलप करना जरूरी है। साथ ही अन्य सब्जेक्ट्स का बेसिक नॉलेज भी बढ़ाना होगा।’’

साभार https://yourstory.com/hindi/ से

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