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अंडरस्टैंडिंग मुहम्मद: .इस्लाम के असली इरादों का खौफनाक सच

ईरानी मूल के कनाडाई नागरिक अली सीना एक पूर्व मुस्लिम हैं जिन्होंने मोहम्मद और मज़हब-ए-इस्लाम का बारीकी से गहन अध्ययन किया और उसके बाद इस्लाम को त्याग दिया। इस्लाम को त्याग देने के पश्चात उन्होंने “Understanding Muhammad: A Psychobiography of Allah’s Prophet” (अंडरस्टैंडिंग मुहम्मद: अल्लाह के रसूल का मनोवैज्ञानिक जीवनवृत्त) नामक एक पुस्तक लिखी जो कि बहुत ही आश्चर्यजनक ढंग से मोहम्मद के मनोवैज्ञानिक जीवन चरित्र को विभिन्न दृष्टिकोणों से परिभाषित करती है।

अली सीना ने इस किताब के माध्यम से मोहम्मद पर अनेक आरोप लगाते हुए दुनिया भर के 160 करोड़ मुसलमानों को यह चुनौती दे डाली कि यदि कोई मुसलमान उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत सिद्ध कर देता है तो वह उसे 50,000 डॉलर इनाम के तौर पर देंगे। बस उनकी एक शर्त है कि उसने उनकी इस पुस्तक को कम से कम एक बार ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ा हो।

अली सीना की इस घोषणा के बाद दुनिया भर के बहुत से मुस्लिम उलेमा ने उनकी इस चुनौती को स्वीकार किया और उनसे इस विषय पर डिबेट करने के लिए इस पुस्तक को पढ़ना शुरू किया। मुस्लिम उलेमा ने जैसे ही इस पुस्तक के कुछ अध्याय पढ़े, उनमें से अधिकांश ने तो बीच में ही इस पुस्तक को पढ़ना छोड़ दिया और अली सीना से डिबेट करने की चुनौती को रद्द कर दिया। जिन मुस्लिम उलेमा ने इस पुस्तक को शुरू से लेकर अंत तक पूरा पढ़ा, उनमें से अधिकतर उलेमा ने इस्लाम को छोड़ दिया।

अंततोगत्वा, ऊपर वर्णित बातों का लब्बोलुआब यह है कि आज तक दुनिया में कोई भी ऐसा मुसलमान आगे नहीं आया जिसने इस पुस्तक को पढ़ने के पश्चात अली सीना से इस्लाम और मोहम्मद के ऊपर डिबेट करने की हिम्मत की हो। हां, इतना अवश्य हुआ कि अली सीना की इस दिल दहलाने वाली चुनौती और उसके बाद अनेक मुसलमानों द्वारा इस्लाम को त्यागने की वजह से दुनिया भर के कठमुल्लों में हाहाकार मच गया और वे बहुत घबरा गए। उसके बाद उन्होंने अली सीना और उनकी इस पुस्तक को लेकर अपने-अपने देशों में व्यापक दंगे और प्रदर्शन किए जिसके उपरांत कई मुस्लिम और सेकुलर देशों के द्वारा इस पुस्तक को पूरी तरह से बैन कर दिया गया।
दुर्भाग्य से भारत भी उन चंद देशों में से एक है जिसमें यह पुस्तक पूरी तरह से बैन की गई है।

तो आइए देखते हैं कि अली सीना की इस पुस्तक में ऐसा क्या है कि जिसके नाम से ही इस्लामी आतंकवादियों और कठमुल्लों की हवा भयंकर तरीके से टाइट हो जाती है और वे प्रदर्शन व दंगे करने पर उतारू हो जाते हैं। ख़ैर, जो भी हो परंतु इतना तो तय है कि इस किताब में अवश्य कुछ ऐसा है कि जो मोहम्मद और मज़हब-ए-इस्लाम के बारे में कुछ गुप्त बातें उद्घाटित करता है। शायद इसी वजह से इस्लामी आतंकवादियों और कठमुल्लों के दिलो-दिमाग़ से अली सीना और उनकी इस किताब का भूत उतारे नहीं उतरता है। इस्लामी कट्टरपंथ एवं इस्लामी आतंकवाद के मूल को जानने की इच्छा रखने वाले लोगों को अली सीना की यह कालजयी कृति अवश्य पढ़नी चाहिए।

विशेष: इस पुस्तक को आप ‘ई-पुस्तकालय’ में जाकर पढ़ सकते हैं। आने वाले समय में आपको हमारे इस ई-पुस्तकालय में हिंदू-चेतनाओं, उससे जुड़ी विषमताओं एवं विभीषिकाओं से संबंधित दुर्लभ हिंदू-साहित्य प्राप्त होगा।

‘ई-पुस्तकालय’ का लिंक:
babaisraeli.com/e-library

‘अंडरस्टैंडिंग मुहम्मद’ का लिंक:
babaisraeli.com/wp-content/upl…

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