Thursday, April 18, 2024
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विभिन्नता में एकता देश की विशेषता को सार्थक करता है पर्यटन

लाल,गुलाबी,पीले गुलाब,पीले, सुनहरी गेंदे ,सफेद आदि फूलों और हरी पत्तियों से बना गुलदस्ता सभी को एक सूत्र में पिरो कर प्रकृति के एकता और सुंदरता का अहसास कराता है उसी प्रकार हमारे देश की विभिन्न संस्कृतियां एकता के रूप में देश की विशेषता बन जाती हैं। कहा जाता है विभिन्नता में एकता देश की विशेषता। देश की यह अनूठी विशेषता हमें उस समय दिखाई देती है जब हम पर्यटक बन कर पर्यटन यात्रा पर जाते हैं। पर्यटन न केवल किसी स्थान को देखे – घूमने भर की अवधारणा भर है वरन देश के भौगोलिक,प्राकृतिक,ऐतिहासिक,सांस्कृतिक मूल्यों का भी अहसास कराती हैं और हमारे सद्भाव और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करने में सहायक होती है।

मंदिर, मस्जिद,चर्च,गुरुद्वारे के साथ – साथ सभी धार्मिक स्थल धर्म विशेष के होते हुए भी पर्यटक के लिए केवल देखने , आनंदित होने और ज्ञानवर्धन का माध्यम हैं। पर्यटक तो एसे स्थलों की महिमा सुनकर उनकी धार्मिक और कलात्मक अभिव्यक्ति का रसास्वादन करने जाता हैं। स्थापत्य शिल्प और ज्ञान के इन महान केंद्रों और उन अनाम शिल्पियों के प्रति नतमस्तक हो जाता हैं जिनकी हथौड़ी – छेनी ने इन्हें पाषाण में साकार किया। विदेशी पर्यटक तो शांति की खोज में इन स्थानों की यात्रा करते हैं। हमारे देश में कई जगह इस्कॉन मंदिर घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का प्रबल केंद्र हैं।

इतिहास में रुचि हो या नहीं पर देश की ऐतिहासिक विरासत जो किले, महलों, हवेलियों, छतरियों, बावड़ियों आदि के रूप में ऐतिहासिक, त्याग,बलिदान, शोर्य की गाथाओं को अपने अंक में समेटे हैं पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। पर्यटन के ये स्थल अपनी अद्भुत संरचना, बनावट, स्थापत्य आदि विशेषताओं से पर्यटकों को लुभाने की पूरी शक्ति रखते हैं। रियासती युग की शान किले और महल सदियां बीत जाने पर भी शान से खड़े हैं। पर्यटक इन्हें देख कर इनके सम्मोहन में खो जाते हैं।

ऐसे ही चाहे भूगोल में रुचि नही हो पर देश में पसरा मिलों लम्बा रेगिस्तान, विशाल समुद्रों के के किनारे खूबसूरत समुद्री तट, ऊंचे – ऊंचे पहाड़ और मनमोहक हिल स्टेशन, गंगा,यमुना, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, चंबल आदि मीलों बहती नदियां , सुंदर वनों में राष्ट्रीय वन्यजीव उद्यान, चट्टानी गुफाएं जैसे भौगोलिक स्वरूप भला किसे आकर्षित नहीं करते। विभिन्न प्रकार की मनोरंजक गतिविधियां और एडवेंचर स्पोर्ट्स इन क्षेत्रों के मुख्य आकर्षण होते हैं।

देश के सांस्कृतिक उत्सव और आयोजन मैसूर, कुल्लू , कोटा का दशहरा, जगन्नाथपुरी की रथ यात्रा, महाराष्ट्र का गणपति उत्सव, बंगाल का नवरात्रा उत्सव, अजमेर का ख्वाजा साहब का सालाना उर्स, राजस्थान के वर्ष भर आयोजित होने वाले पर्यटन विभाग के उत्सव, ऐसे ही देश के विभिन्न भागों के पर्यटक उत्सव, बृज की लठमार होली , केरल की नौका दौड़, गोवा का क्रिसमस डे तथा देश में मनाए जाने वाले समस्त वर्गो के पर्वों पर विशेष आयोजन और मेलें पर्यटन को बढ़ावा देते हुए हमारी सांस्कृतिक और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करने का बड़ा माध्यम बनते हैं।

सभी प्रकार के पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक उत्सव पूरे देशवासियों और विदेशी पर्यटकों के उत्साह और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पर्यटक एक ऐसा शब्द है जो जातीय और धार्मिक भावना से ऊपर उठ कर है। किसी भी जाति और धर्म का व्यक्ति जब पर्यटन पर यात्रा करता है तो वह केवल एक पर्यटक होता है। सम भाव से पर्यटन का आनंद लेता है। जाति और धर्म से ऊपर उठ कर पर्यटक होने में असीम आनंद का अनुभव करता है। यह कहने में अतिशोक्ति नहीं कि पर्यटन सामाजिक समरसता को बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान करता है।
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