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वी. जी. सिद्धार्थ पांच लाख लेकर मुंबई आए थे

कैफे कॉफी डे (सीसीडी) ब्रांड नाम से कॉफी रेस्तरां चलाने वाली कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वी. जी. सिद्धार्थ सोमवार की शाम से लापता हैं। सिद्धार्थ, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस. एम. कृष्णा के दामाद हैं। पुलिस के मुताबिक वह सक्लेश्पुर जा रहे थे लेकिन अचानक उन्होंने अपने चालक से मंगलुरु चलने को कहा। दक्षिण कन्नड़ जिले के कोटेपुरा इलाके में नेत्रवती नदी पर बने पुल के पास वह कार से उतर गए और उन्होंने चालक से कहा कि वह टहलने जा रहे हैं। उसके बाद उनका पता नहीं चला।

सिद्धार्थ के लापता होने के बाद ही एक बड़ा खुलासा हुआ। सिद्धार्थ ने कैफे कॉफी डे के कर्मचारियों और निदेशक मंडल को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था कि हर वित्तीय लेनदेन मेरी जिम्मेदारी है, कानून को मुझे और केवल मुझे जवाबदेह रखना चाहिए।

सिद्धार्थ ने लिखा कि जिन लोगों ने मुझ पर विश्वास किया उन्हें निराश करने के लिए मैं माफी चाहता हूं। मैं लंबे समय से लड़ रहा था लेकिन आज मैं हार मानता हूं क्योंकि मैं एक प्राइवेट इक्विटी लेंडर पार्टनर का दबाव नहीं झेल पा रहा हूं, जो मुझे शेयर वापस खरीदने के लिए विवश कर रहा है। इसका आधा लेनदेन मैं छह महीने पहले एक दोस्त से बड़ी रकम उधार लेने के बाद पूरा कर चुका हूं। उन्होंने कहा है कि दूसरे लेंडर भी दबाव बना रहे थे जिस कारण वह हालात के सामने झुक गए हैं।

सिद्धार्थ की तलाश में पुलिस बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रही है लेकिन अभी तक उनकी कोई खबर नहीं मिल पाई है। बताया जा रहा है कि अभी उनका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। पूरा परिवार उनके लापता होने से सदमे में है।
मंगलूरू के पुलिस आयुक्त संदीप पाटिल ने बताया कि‘ तलाश में स्थानीय मछुआरों की मदद ली जा रही है। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने किस-किससे फोन पर बात की थी।

बता दें कि वीजी सिद्धार्थ भारत के सफल कारोबारियों में से एक हैं। उन्होंने महज पांच लाख रुपये के साथ अपना सफर शुरू किया था। सिद्धार्थ की पहचान उनके काम से है, इसलिए उन्हें ‘कॉफी किंग’ भी कहा जाता है। कड़ा परिश्रम कर सिद्धार्थ पांच लाख रुपये से 8200 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक बने। इस सफर में उनकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए।

वीजी सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूरू में हुआ। उनका परिवार लंबे समय से कॉफी उत्पादन से जुड़ा हुआ था। सिद्धार्थ ने मंगलूरू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर की डिग्री ली थी। सिद्धार्थ अपने दम पर कुछ करना चाहते थे इसलिए उन्होंने विरासत में मिली खेती से आराम से जिंदगी न गुजार कर अपने सपने पूरा करने की ठानी।

21 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता से कहा था कि वह मुंबई जाना चाहते हैं। उनके पिता ने उन्हें पांच लाख रुपये दिए और कहा कि यदि वह असफल हो जाएं तो वापस आकर परिवार का कारोबार संभाल सकते हैं। पांच लाख रुपये में से सिद्धार्थ ने तीन लाख रुपये की जमीन खरीदी और दो लाख रुपये उन्होंने बैंक में जमा कर दिए। इसके बाद मुंबई आकर उन्होंने जेएम फाइनेंशल सर्विसेज (अब जेएम मॉर्गन स्टैनली) में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में काम की शुरुआत की। वहां उन्होंने दो साल तक काम किया।

दो साल की ट्रेनिंग के बाद उन्होंने अपना कारोबार शुरू करने का विचार किया। इसलिए नौकरी छोड़कर वे बंगलूरू वापस आ गए। उनके पास जो दो लाख रुपये बचे थे, उस पैसे से उन्होंने वित्तीय कंपनी खोलने का फैसला किया। इसलिए उन्होंने सिवान सिक्यॉरिटीज के साथ अपने सपने को साकार किया। साल 2000 में यह कंपनी वे टू वेल्थ सिक्यॉरिटीज लिमिटेड (way2wealth securities ltd) बनी। यह कंपनी बेहद सफल रही।

करीब 10 साल तक सिद्धार्थ फाइनेंशल सर्विसेज से जुड़े रहे। इसके बाद साल 1996 में सिद्धार्थ ने कैफे कॉफी डे की शुरुआत की। इससे उन्हें बेहद सफलता प्राप्त हुई। केवल भारत ही नहीं, बल्कि कंपनी के आउटलेट कई देशों में खुले। ऑस्ट्रिया, कराची और दुबई में भी कंपनी के आउटलेट हैं।

कैफे कॉफी डे का सीधा मुकाबला टाटा ग्रुप की स्टारबक्स से है। स्टारबक्स के अतिरिक्त बरिस्ता और कोस्टा से भी कंपनी का मुकाबला है। कंपनी को चायोस से भी चुनौती मिल रही है।

पिछले दो साल में सीसीडी के विस्तार की रफ्तार घटी है और कंपनी का कर्ज भी बढ़ा है। सीएमआईई के डाटा के अनुसार, कंपनी पर मार्च 2019 तक 6547.38 करोड़ रुपये का कर्ज है।

सीसीडी ने मार्च 2019 में खत्म हुई तिमाही में 76.9 करोड़ रुपये की स्टैंडअलोन नेट सेल्स दर्ज की थी। मार्च तिमाही में सीसीडी को 22.28 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ था। उससे सालभर पहले की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 16.52 करोड़ रुपये का था।

सिद्धार्थ ने माइंडट्री में भी निवेश कर रखा है। माइंडट्री में सिद्धार्थ की करीब 21 फीसदी हिस्सेदारी थी। हालांकि पिछले दिनों उन्होंने अपने शेयर एल एंड टी को बेच दिए थे। इस सौदे से उन्हें करीब 2,858 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था। वह करीब एक दशक से इस कंपनी में निवेश कर रहे थे और 18 मार्च 2019 को उन्होंने एल एंड टी से 3,269 करोड़ रुपये का सौदा किया था।

पिछले महीने खबर आई थी कि कोका-कोला कैफे कॉफी डे में हिस्सेदारी खरीद सकती है। इस संदर्भ में दो अधिकारियों ने कहा था कि कोका-कोला कैफे सेगमेंट में अपनी जगह और मजबूत बनाना चाहती है। मामला अटलांटा में कोका-कोला के मुख्यालय से देखा जा रहा है। तक कहा गया था कि कोका-कोला की ग्लोबल टीम के अधिकारी सीसीडी के मैनेजमेंट से बातचीत कर रहे हैं।

साभार- https://www.amarujala.com/ से

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