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मूल्य आधारित शिक्षा ने ही सुपर-30 को सफल बनाया- आनंद कुमार

भोपाल। मानवीय मूल्यों ने अनेक जिंदगियां बदली हैं और इसका उदाहरण सुपर-30 है। मूल्य आधारित शिक्षा ने ही सुपर-30 को सफल बनाया है। आई.आई.टी. जैसे प्रतिष्ठित परीक्षा में अब तक 360 बच्चों में से 308 बच्चों ने आई.आई.टी. की परीक्षा में क्वालीफाई किया। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे संस्थान में जीवन मूल्यों को ध्यान में रखकर शिक्षा प्रदान की जाती है। शिक्षक किसी बड़े राजनेता से बड़ा परिवर्तन ला सकता है। यह विचार विधानसभा परिसर में चल रहे ‘‘मूल्य आधारित जीवनशैली’’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संविमर्श में विश्वविख्यात शिक्षण संस्थान सुपर-30 के संचालक आनंद कुमार ने व्यक्त किए।      

परिसंवाद के दूसरे दिन आज विभिन्न विषयों में समानांतर सत्र हुए। ‘‘मूल्य आधारित उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा’’ विषयक सत्र में बोलते हुए श्री आनंद कुमार ने कहा कि गरीब एवं निर्धन वर्ग के बच्चे में गहरे मानवीय मूल्य एवं संस्कार देखने को मिलते हैं। इसका उदाहरण इस बात से मिलता है कि सुपर-30 से निकले समस्त विद्यार्थी आज उच्च संस्थानों में कार्यरत हैं। इनमें से अनेक लोगों ने विवाह किया, परंतु दहेज किसी ने भी नहीं लिया। आनंद कुमार ने सुपर-30 से निकले अनेक बच्चों की सफलता की कहानी सुनाते हुए उसमें समाहित मूल्यों की ओर इशारा किया।      सार्वजनिक जीवन में मूल्यनिष्ठता विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ फिल्मकार श्री चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि लोग सार्वजनिक जीवन में जैसे होते हैं वैसे व्यक्तिगत जीवन में नहीं होते हैं। मूल्य आचरण का हिस्सा होना चाहिए, मूल्य परखता के लिए आवश्यकता है कि हम मूल्यों को अपने जीवन में उतारकर ही मूल्यों की बात कर सकते हैं। वरिष्ठ आई.पी.एस. अधिकारी पवन जैन ने कहा कि प्रगतिशील होने का अर्थ यह नहीं कि हम संवेदनहीन हो जाएं। अच्छे चरित्र से ही अच्छे घर, परिवार, समाज एवं राष्ट का निर्माण होता है।      

पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में मूल्य उन्मुक्तता विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती उर्मिला शिरीष ने कहा कि मूल्यों को सीखने की इच्छा होनी चाहिए। श्री सुब्रमण्यम भट्ट ने कहा कि मूल्यों का निर्माण घर, विद्यालय, मंदिर और समाज में होता है। जिस तरह किसी नदी का लक्ष्य समुद्र से मिलना होता है उसी तरह देवत्व को प्राप्त करना ही मनुष्य लक्ष्य होना चाहिए। मूल्यों की आधारभूत संकल्पना विषयक सत्र में बोलते हुए श्री दीनानाथ बत्रा जी ने कहा कि इस भौतिक जगत में मानवीय ऊँंचाईयों को प्राप्त करना मानव का लक्ष्य होना चाहिए। आध्यात्मिक जगत की गहराई में जाकर धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्राप्त किए जा सकते हैं। प्राणों में संतुलन, मन सतविचारी, आत्मदृष्टि संतुलित व प्राणी को विवेकशील होना चाहिए। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. कपिल कपूर ने कहा कि जीवन नियमों के अनुरूप जीना चाहिए। नियम अपने आप नहीं बनते उनके लिए प्रयासरत होना पड़ता है, उन्हें ग्रहण करना पड़ता है। आदि शंकराचार्य ने अपनो सम्पूर्ण जीवन ज्ञान प्राप्ति के लिए लगाया है। शिक्षाविद् श्री अतुल कोठारी ने कहा कि देश को बदलने के लिए शिक्षा को बदलना जरूरी है। भारत की शिक्षा, भारत के लिए भारतीय मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। हमें शिक्षा का उद्देश्य एवं जीवन का उद्देश्य एक ही रखना चाहिए। इस सत्र में अमेरिका से पधारे प्रो. लेन वेंगर ने भारतीय योग एवं आध्यात्म के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के सामने योग एवं आध्यात्म का ज्ञान प्रस्तुत किया है। मूल्यों की स्थापना में भी भारत एवं भारतीय ज्ञान को आगे लाना होगा।       

मेडिकल चिकित्सा में मूल्य परकता पर बोलते हुए पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि कितने बुरे दिन आ गए हैं कि चिकित्सा में मूल्यों की बात करनी पड़ रही है। जबकि अवधारणा यह है कि चिकित्सा मूल्य पर ही आधारित होती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के लिए संवेदनशील होना बहुत जरूरी है। इस विषय पर डॉ. बालकृष्ण जैन, डॉ. कांतिलाल सचैती, डॉ. वी.के. गोस्वामी, डॉ. उदयन वाजपेयी, डॉ. दिग्पाल धारकर, डॉ. मनोहर भण्डारी, डॉ. शैलेन्द्र भण्डारी, डॉ. सूर्यप्रकाश धनेरिया ने अपने-अपने व्याख्यान में बताया कि कि तरह से चिकित्सा सेवाओं में मूल्यनिष्ठा को बढ़ाया जा सकता है। विद्वानों ने अपने वक्तव्यों में कहा कि मेडिकल चिकित्सा शिक्षा में भी सुधार की आवश्यकता है। चिकित्सा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा के पार्ट भी शामिल करने होंगे। मूल्य आधारित शासन एवं प्रशासन व्यवस्था विषयक सत्र में बोलते हुए श्री पवन सिन्हा ने कहा कि मूल्य साधन एवं साध्य दोनों है। राष्ट्र के प्रशासन में यदि सत्ता पर विराजमान व्यक्ति यदि मूल्य आधारित शैली को नहीं अपनाएंगे तो लोक भटक जाएगा। मूल्यों की स्थापना के लिए शिक्षाविद्, वैज्ञानिक व शास्त्री एक रोडमेप, एक सिद्धान्त दे सकते हैं परंतु इसे लागू करने की व्यवस्था कार्यपालिका और समाज को करनी होगी।      

जनसंचार माध्यमों एवं सूचना प्रौद्योगिकी में मूल्य उन्मुक्तता विषयक सत्र में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश बादल ने कहा कि बाजार आधारित अर्थव्यवस्था के दबावों के बीच पत्रकार बारह घण्टे से अधिक समय मीडिया संस्थानों में बिता रहा है। ऐसे समय में मूल्यों को कितना बचा पाएगा यह सोचने का विषय है। वर्तमान दौर में मूल्यों की नीव जनचेतना से ही बन सकती है। साधना के सम्पादक श्री मुकेश शाह ने कहा कि पत्रकार को मूल्यों की रक्षा करे हुए अपना पत्रकारिता धर्म निभाना चाहिए। मध्यप्रदेश के सूचना आयुक्त श्री आत्मदीप ने कहा कि अब समय आ गया है कि मीडिया आयोग देश में बनाया जाए। कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रो. ताप्ती बसु ने मूल्य आधारित शिक्षा पर अपने विचार रखे। हैदराबाद विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. कंचन मलिक ने सामुदायिक मीडिया के माध्यम से मूल्यों की स्थापना की वकालत की। हरियाणा से पधारे वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल आर्या ने कहा कि मीडिया संस्थानों में विज्ञापनों के दबाव के कारण मूल्यों में गिरावट आई है। मालिकों का हित देखना आज मीडिया की सबसे बड़ी समस्या है। प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि मीडिया एवं आई.टी. में मूल्यों को समग्रता से देखने की आवश्यकता होती है। समाचार लेखन से लेकर मुद्रण तक तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में समाचार के निर्माण से लेकर उसके प्रसारण तक की प्रक्रिया में मूल्य निहित होते हैं। इन मूल्यों को आत्मसात करने एवं इन्हें लागू करने की आवश्यकता है। इस सत्र में दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित संगोष्ठी प्रतिवेदन ‘‘संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में मूल्यनिष्ठता’’ तथा विश्वविद्यालय की त्रैमासिक गृह पत्रिका एम.सी.यू. समाचार का विमोचन किया गया।       

परिसंवाद में ‘‘मूल्यों की सार्वभौमिकता’’ विषयक सत्र में प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल तथा श्री प्रियव्रत शुक्ल ने अपने विचार रखे। पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में मूल्योन्मुखता विषयक सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. विजयबहादुर सिंह तथा ‘‘न्याय एवं विधि क्षेत्र में मूल्य निष्ठता’’ विषय पर न्यायमूर्ति डी.एम.धर्माधिकारी ने अपने विचार रखे। परिसंवाद का समापन कल 19 अप्रैल 2015 को दोपहर 12.00 बजे सम्पन्न होगा। समापन सत्र के मुख्य अतिथि अखिल विश्व गायत्री परिवार के निदेशक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति डॉ. प्रणव पण्ड्या होंगे। समापन सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान करेंगे।  (डॉ. पवित्र श्रीवास्तव) निदेशक, जनसंपर्क



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