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मुंबई का विक्टोरियन गोथिक और आर्ट डेको एनसेंबल्स

महाराष्ट्र राज्य में मायानगरी,सपनों का शहर,बड़ा व्यापारिक केंद्र , अनेक अन्य विशेषताओं के साथ-साथ सैलानियों का आकर्षक केंद्र मुम्बई को आश्चर्यजनक गोथिक अर्थात इतावली वास्तुकला के भव्य इमारतों के लिए भी पहचान बनाता हैं। मुम्बई में अनेक प्राचीन भवन इतावली शैली में बने अपने अद्भुत शिल्प का गौरव हैं। यह तथ्य इसी से स्पस्ट है कि विशेष रूप से दक्षिण मुम्बई में बनी ‘विक्टोरियन गोथिक’ और ‘आर्ट डेको’ वास्तुशिल्प से बनी इमारतों को वर्ष 2018 ई. में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया हैं। ये इमारतें सिर्फ प्राचीन स्मारक नहीं हैं, बल्कि सिनेमा हॉल, अदालत, पुस्तकालय जैसे सार्वजनिक इस्तेमाल के कारण जीवंत धरोहर हैं।

दक्षिण मुंबई में स्थित विक्टोरियन गोथिक आर्ट डेको के भवनों को मियामी के बाद दुनिया की सबसे बड़ी भवन श्रंखला में शामिल किया जाता हैं। मुम्बई हाईकोर्ट का भवन विक्टोरियन गोथिक शैली का बेहतरीन उदाहरण है। यह भवन में विशाल मैदान के आसपास स्थित हैं। इनका निर्माण 19वीं सदी में किया गया था। बांबे हाईकोर्ट के भवन का निर्माण 1871 में आरंभ हुआ और 1878 में पूर्ण हुआ। इसका निर्माण वास्तुकार जे.ऐ. फूलेरे ने अपनी देख रेख में करवाया था और उस समय इस के निर्माण पर 106.40 लाख रुपये व्यय किये गए थे।

इसी मैदान के पश्चिमी इलाके में स्थित आर्ट डेको भवनों का निर्माण 1930 ई. से 1950 ई. के बीच किया गया था। मुंबई की आर्ट डेको बिल्डिंग में आवासीय भवन, व्यवसायिक कार्यालय, अस्पताल, मूवी थियेटर आदि आते हैं। इसी क्षेत्र में रीगल और इरोस सिनेमाघर हैं। इरोज सिनेमा का भवन आर्ट डेको शैली का बेहतरी उदाहरण है। इस सिनेमाघर में 1,204 लोगों की बैठने की क्षमता है। वर्ष 1938 ई. बने इस भवन का निर्माण वास्तुविद शोरबाजी भेदवार ने करवाया था।

 

मुंबई के प्रसिद्ध मरीन ड्राइव पर तीन किलोमीटर के दायरे में बने ज्यादातर भवन जिनमें अधिकतम पांच मंजिल के हैं बैंगनी और नीले रंगों में रंगे हैं वे आर्ट डेको बिल्डिंग के सुंदर नमूने हैं। इन भवनों में घुमावदार सीढ़ियां, खूबसूरत बरामदें और संगमरमर की फर्श प्रमुख विशेषताएं हैं।

विश्व धरोहर में बांबे हाई कोर्ट, मुंबई विश्वविद्यालय, पुराना सचिवालय, एजीएमए, एल्फिंस्टन कॉलेज, डेविड सासून लाइब्रेरी, छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय, महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय, क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया, राम महल, चर्चगेट का ईरोज सिनेमा हॉल, रीगल सिनेमा हॉल और मरीन ड्राइव के नजदीक पहली इमारत को शामिल किया गया है, जब वर्ष 1860 से 70 के दौरान भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा था, उस समय, विशेषकर ओवल मैदान के किनारे, अधिकांश विक्टोरियन भवनों का निर्माण हुआ। उन दिनों मैदान समुद्र के नजदीक हुआ करता था और मुंबई विश्वविद्यालय, पश्चिम रेलवे मुख्यालय का भवन तथा उच्च न्यायालय सीधे अरब सागर के सामने थे। इनमें मुंबई विश्वविद्यालय भवन सबसे शानदार है। वास्तुकार गिलबर्ट स्कॉट ने इसका डिजाइन तैयार किया था, यह 15वीं शताब्दी का इटेलियन भवन जैसा दिखता है। इसका भवन, इसका विशाल पुस्तकालय, कन्वोकेशन हॉल और 80 मी. ऊंचा हैं और राजाबाई टावर बहुत सुंदर है।

बारहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में इल-दा-फ्रांस के क्षेत्र में इस निर्माण शैली का जन्म हुआ। ऊंचे स्तम्भ, पंजर-गुम्बद, लम्बे-चैड़े कक्ष , कक्षों को रोशन करने के लिये खिड़कियां ,बड़े द्वार, तोरण, मेहराबी टेक,अतिरिक्त तोरण और सहायक तोरणपथ ,रंगीन कांच, खिड़कियों पर तोरण की सजावट, पत्थर के शिखर, और मूर्तिकला इस शैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।
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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार
पूर्व सँयुक्त निदेशक,सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग,राजस्थान
1-F-18, आवासन मंडल कॉलोनी,कुन्हाड़ी,
कोटा-राजस्थान
[email protected] com
मोबाइल: 9928076040

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