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अमरीका में गरजे विवेक अग्निहोत्री, कहा – हमें न सिखाएँ मानवता

फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री फ़िलहाल ‘राइट टू जस्टिस’ टूर पर निकले हुए हैं। इस दौरान वो अपनी आने वाली फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के साथ-साथ देश-दुनिया को जम्मू कश्मीर में पंडितों के नरसंहार व उनके साथ हुई क्रूरता के बारे में भी बता रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अमेरिका के लोकतंत्र का मंदिर कहे जाने वाले कैपिटल हिल में भी सम्बोधन दिया। ‘चॉकलेट (2005)’ और ‘द ताशकंद फाइल्स (2019)’ का निर्देशन कर चुके विवेक रंजन अग्निहोत्री इसके बाद ‘द दिल्ली फाइल्स’ का निर्देशन करेंगे।

उन्होंने कहा “सहानुभूति पाकर पैसे इकट्ठा करना और राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल करना कश्मीरियों या कश्मीरी पंडितों का काम नहीं है। शांतिप्रिय कश्मीरी पंडितों ने शांति में विश्वास रखा और अपने बच्चों को शिक्षा दी।”

विवेक अग्निहोत्री का पूरा भाषण इस लिंक पर उपलब्ध है
https://www.youtube.com/watch?v=2Ssr4gPCzOI

अमेरिकी सरकार के स्थल कैपिटल हिल में सम्बोधन देते हुए विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में राजधानी को लोकतंत्र के मंदिर के रूप में देखा-समझा जाता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अमेरिका को बराबरी, स्वाधीनता और न्याय और स्वतंत्रता की धरती बताते हुए कहा कि हॉलीवुड फिल्मों ने इस बारे में पूरी दुनिया में अपने विचार फैलाए हैं। उन्होंने कहा कि ये सच है कि हम जब भी लोकतंत्र के बारे में सीखते हैं तो अमेरिकी तरीके से सीखते हैं और यूरोप का लोकतंत्र भी इससे ही प्रभावित है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे अमेरिकी कलाकार, नेता, प्रभावशाली लोग, राजनयिक और संगठन मानवता के बारे में काफी बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में मानवता के बारे में बात करने पर अमेरिकी नैरेटिव आगे रहता है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हमने जब कश्मीरी पंडितों की व्यथा के बारे में वैश्विक मंच पर बात करना शुरू किया है, यहाँ भी अमेरिकी नैरेटिव हावी हो रहा है और यहाँ का मीडिया भारतीय नागरिकों को ये सिखाने की कोशिश कर रहा है कि मानवता क्या है।

विवेक अग्निहोत्री ने मानवता पर बात करते हुए बताया कि जब पश्चिमी दुनिया लोगों की हत्याएँ कर के राज्य के राज्य जीत रही थी और सभ्यताओं, संस्कृतियों को नष्ट कर रही थी, उससे हजारों वर्षों पहले भारत भूमि पर लोग शिव की पूजा करते थे। उन्होंने कहा कि शिव एकत्व का प्रतीक हैं, उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब आप स्विट्जरलैंड में विश्व के सबसे बड़े पार्टिकल लैबोरेटरी में जाएँगे तो वहाँ बाहर आपको सबसे पहले तांडव कॉस्मिक नृत्य की मुद्रा में शिव की प्रतिमा दिखेगी।

उन्होंने इस दौरान एक महान वैज्ञानिक को उद्धृत करते हुए कहा कि शिव का नृत्य सभी के अस्तित्व के आधार का प्रतीक है। इस दौरान उन्होंने विज्ञान में जन्म-मरण और सृष्टि के निर्माण-विध्वंस को शिव के नृत्य से जोड़ते हुए बताया कि कैसे वैज्ञानिक भी मानते हैं कि आधुनिक फिजिक्स एकत्व में यकीन रखता है और बताता है कि पार्टिकल और कॉस्मॉस एक हैं। उन्होंने बताया कि इसकी खोज कश्मीर में हुई थी, शिव के एकत्व वाले विचार की खोज कश्मीर में हुई थी।

विवेक अग्निहोत्री ने बताया, “रमन महर्षि से जब पूछा गया कि दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करें, तो उन्होंने कहा कि कोई ‘दूसरा’ है ही नहीं। दुनिया में किसी भी अन्य सभ्यता ने ऐसा नहीं कहा कि कोई ‘अन्य’ है ही नहीं। पश्चिमी दुनिया में मानवता का विकास ‘दूसरे/अन्य’ पर आधारित है और यही पूर्व में भी फैला। कश्मीर में भी ऐसे ही वहाँ के निवासियों को ‘दूसरा’ समझा गया, जिसकी उन्हें सज़ा दी गई। मानवता अन्य जानवरों से अलग हैं, क्योंकि हमारे पास भाषा है। भाषा के बिना कुछ नहीं है, कोई विचार नहीं। भाषा साहित्य, संस्कृति, समझ और साहित्य से आता है।”

इसके बाद विवेक रंजन अग्निहोत्री ने बताया कि कैसे देश में तीन देवियों की पूजा की जाती है – दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती। इस दौरान उन्होंने बताया कि माँ सरस्वती कला, ज्ञान और साहित्य की देवी हैं, जिन्हें कश्मीर में शारदा कहते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले जब वो कश्मीर में शूटिंग के लिए पहुँचे तो वहाँ उन्होंने पाया कि न कला है, न साहित्य है और न ही संगीत है। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने सब कुछ तबाह कर दिया। यहाँ तक कि किसी ने एक सिनेमा हॉल खोलने की कोशिश की तो उस पर गोली चली। सैकड़ों लोग मरे और इसे बंद करना पड़ा।

विवेक अग्निहोत्री ने आगे बताया, “हमारी फिल्म में काम करने वाले युवक-युवतियों ने निवेदन किया कि उनके नाम सार्वजनिक न किए जाएँ। क्योंकि कला के साथ उनका नाम जुड़ते ही उन्हें मार डाला जाएगा। आज समावेश और शांति के विचार की बात करते हैं। मानवता के इतिहास में भारत एकमात्र ऐसी भूमि है जिसने चार शांतप्रिय धर्म दिए- हिन्दू, बौद्ध, सिख और जैन। यहाँ आप ईश्वर में विश्वास करें या न करें, फिर भी हिन्दू हैं। आप ईश्वर को गाली देते हैं या हिन्दू धर्म से अलग सोचते हैं, फिर भी आप हिन्दू हैं। हम सहिष्णुता-असहिष्णुता नहीं, सीधा ‘कॉस्मिक स्वीकार्यता’ में विश्वास रखते हैं। ये एकत्व से आता है। उत्तर-दक्षिण, अमीर-गरीब ये सब नहीं।”

विवेक अग्निहोत्री ने इस दौरान उदाहरण दिया कि कैसे लकड़ी से अलग-अलग चीजें बनती हैं, लेकिन सबका स्रोत लकड़ी ही है। उन्होंने पूछा कि मानवता का स्रोत क्या है? उन्होंने कहा कि ये ‘अन्य/दूसरा’ वाला विचार तब आता है जब पश्चिमी दुनिया अपने राजनीतिक फायदे के लिए दुनिया को सिखाने निकलता है कि मानवता क्या है। उन्होंने समझाया कि कश्मीर दुनिया के लिए महत्वपूर्ण इसीलिए है, क्योंकि आजकल इसका नाम लेते आतंकवाद और सीमा विवाद की याद आती है, पश्चिमी लोग कहते हैं कि वहाँ नागरिक स्वतंत्रता नहीं है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर सिर्फ राजनीति नहीं है, शिव-शारदा के अलावा योग, आयुर्वेद, अद्वैत – सब यहाँ फल-फूले। उन्होंने कहा कि जहाँ पश्चिमी मेडिकल विज्ञान मृत शरीर के काट-छाँट करने पर आधारित है, जबकि योग-आयुर्वेद का विकास जीवित शरीर का अध्ययन कर के हुआ। उन्होंने गणित से लेकर संगीत तक के अलावा दुनिया के सबसे ज्यादा अनुवाद किए जाने वाली पुस्तक के बारे में कहा कि वो बाइबिल नहीं, पंचतंत्र है। उन्होंने कश्मीर की तबाही को ज्ञान की तबाही करार दिया।

साभार- https://hindi.opindia.com/ से

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