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वोडाफोन , आईडिया और भारती एअरटेल दिवालिया होने के कगार पर

दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल बंद हो सकती हैं। ऐसे में करोड़ों ग्राहकों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद से कंपनियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह से दूसरी तिमाही में कंपनियों को कॉर्पोरेट इतिहास में अभी तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा हुआ है। कंपनियों को कुल 74,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

ट्राई के 19 अक्तूबर को जारी किए गए डाटा के अनुसार वोडाफोन आइडिया के पास 37.5 करोड़ ग्राहक हैं। वहीं एयरटेल के पास 32.79 करोड़ ग्राहक हैं। वहीं रिलायंस जियो के पास 34.8 करोड़ ग्राहक हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल के पास संयुक्त तौर पर 70 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। निजी टेलीकॉम कंपनियों के पास 89.78 फीसदी शेयर है, वहीं बीएसएनएल और एमटीएनएल के पास केवल 10.22 फीसदी शेयर है।

इसी सप्ताह आदित्य बिड़ला समूह ने कहा था कि अगर सरकार समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) को लेकर 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी पर बड़ी राहत नहीं देती, तो वह कंपनी में और निवेश नहीं करेगा। ऐसे में वोडाफोन आइडिया दिवालिया हो जाएगी।

भारत की शीर्ष अदालत ने पिछले महीने दूरसंचार विभाग की लेवी और ब्याज के तौर पर 13 अरब डॉलर की मांग को वाजिब ठहराया था, जिससे वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल के शेयर को तगड़ा झटका लगा है। इसकी वजह से टेलीकॉम कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में 50, 921 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इससे पहले पिछले साल की दूसरी तिमाही में कंपनी को 4,947 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में अभी तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा है।

वोडाफोन ने कहा कि कारोबार को जारी रखने के लिए अब वह सरकारी राहत पर निर्भर है। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘एजीआर के मसले पर कोर्ट के आदेश से उद्योग पर खासा असर पड़ा है।’

वोडाफोन ने सरकार से स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए दो साल का वक्त, लाइसेंस शुल्क में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ब्याज और जुर्माने में छूट सहित एक राहत पैकेज की मांग की थी। वोडाफोन दुनिया की दूसरी बड़ी मोबाइल ऑपरेटर है और स्पेन व इटली में सुधार के संकेतों से उसके राजस्व में लगातार सुधार हो रहा है। कैलेंडर वर्ष 2019 की पहली छमाही में उसके सेवा राजस्व में 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। वहीं कंपनी ने मुश्किल दौर को देखते हुए पहली बार मई में अपने लाभांश में कटौती की थी।

सुप्रीम कोर्ट के बकाया चुकाने के आदेश से भारती एयरटेल को भी तगड़ा झटका लगा है। बृहस्पतिवार को जारी नतीजों के मताबिक, दूरसंचार कंपनी को जुलाई-सितंबर, 2019 तिमाही में 23,045 करोड़ रुपये का भारी भरकम घाटा हुआ है। वहीं एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी को 119 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। हालांकि कंपनी ने कहा कि नए अकाउंटिंग सिस्टम के कारण नतीजों की तुलना नहीं की जा सकती है।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान भारती एयरटेल का राजस्व 4.7 फीसदी बढ़कर 21,199 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने कहा कि सर्वोच्च अदालत के फैसले का ‘कंपनी पर खासा वित्तीय असर पड़ा है।’ कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘कंपनी को राहत मिलने की उम्मीद है और ऐसा नहीं होने पर अदालत के फैसले के आधार पर लाइसेंस शुल्क व स्पेक्ट्रम शुल्क (एसयूसी) के मद में तिमाही के दौरान कंपनी पर 28,450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।’ कंपनी ने कहा कि इस धनराशि में 6,146 करोड़ रुपये मूलधन, 12,219 करोड़ रुपये ब्याज, 3,760 करोड़ रुपये पेनल्टी और 6,307 करोड़ रुपये पेनल्टी पर ब्याज शामिल है।

भारती एयरटेल ने कहा कि भले ही उसे असाधारण मद के बाद 23,045 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, लेकिन इस असाधारण मद को हटा दें तो कंपनी को 1,123 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वहीं कंपनी का भारतीय कारोबार से राजस्व सालाना आधार पर तीन फीसदी बढ़कर 15,361 करोड़ रुपये हो गया।

अगर ये कंपनियां बंद हो जाती हैं, तो करोड़ों ग्राहकों पर इसका असर पड़ेगा।

साभार-https://www.amarujala.com/ से

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