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जागो, हिन्दुओं जागो….

घनघोर रात्रि में कोंकण के वर्षा वनो से गुजरता अघोरी एक शिला से टकराकर गिरा और चोट से आहत हुआ, उसकी पीड़ा भरी आह सुनकर एक शव अट्टहास करता उठ खड़ा हुआ और बोला- क्रंदन करो अघोरी, यही क्रंदन हिन्दुओं का प्रारब्ध है. यह क्रंदन तुमने अपने परिश्रम से कमाया है, यह तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल है. अपनी आने वाली पीढ़ी को यही पीड़ा देकर जाओगे तुम क्योंकि और कुछ भी शेष नहीं तुम्हारे पास.

शब्दों के आघात तो शिला से भी तीक्ष्ण थे. अघोरी तिलमिला गया और बोला- मैंने क्या गलत किया यह तो कहो, मेरे कर्म में चूक कहाँ हुई?

शव ने कहा- तुम्हारी दृष्टि उस मार्ग पर नहीं जहाँ तुम चल रहे, अतः तुम्हे ठोकर लगी. यही तुम्हारे पूरे समाज की भी गलती है. सही स्थान पर दृष्टि नहीं जाती तुम्हारी. वामपंथी और इस्लामी तय करते हैं की तुम क्या सोचो और करो, मार्ग तुम्हारा है और दिशा उनकी है. वो तय करते हैं की तुम्हारा गंतव्य क्या है. तुम्हे होश नहीं रहता की कब तुम अपना पथ छोड़ चुके हो. कभी तुम्हे अपना शत्रु चीन में दीखता है तो कभी पाकिस्तान में, कभी अमेरिका मित्र लगते तो कभी रूस. अरे मूढ़, यहाँ कोई तुम्हारा मित्र नहीं, सब अपने हित के मार्ग पर चल रहे. तुम परहित के अपने सुमार्ग पर चलते चलते परबुद्धि क्यों हो गए? तुम्हारे बाहरी शत्रु उतने घातक नही जितने भीतर के शत्रु हैं, और बाहरी शत्रु से लड़ने के लिए सक्षम सेना है, तुम्हें तो उन आतंरिक शत्रुओं से लड़ना है जो देश के भीतर से ही इसे खोखला कर रहे. इनसे शब्द से भी लड़ना होगा और शस्त्र से भी. तुम्हे क्रुद्ध नहीं होना है,विचलित नहीं होना है, अधीर भी नहीं होना, तुम्हे सतर्क होना है, तेज दृष्टि, धार में पैनापन लाना है और अचूक वार करना है. विचारों की दिशा सही हो और शत्रु पर सीधा प्रहार हो, संगठित प्रहार हो.

ध्यान रहे, युद्ध केवल शब्दों से ही नहीं होता. कितने परिवारों में शस्त्र पूजा हुई विजयादशमी के दिन? यदि नहीं हुई तो तुम्हे देश, समाज और महिलाओं की रक्षा के बारे में बोलने का अधिकार नहीं है. देवी दशभुजी है, वो कहती है की घर की हर महिला के लिए दस शस्त्र होने चाहिए. कितने शस्त्र हैं तुम्हारे घर में? कितने लोगों ने अपनी पुत्रियों को तलवार चलाना सिखाया? यदि नहीं सिखाया तो आज प्रारंभ करो. क्या कहा? -तुम्हे ही नहीं आता चलाना? भेजो उन्हें प्रशिक्षण शिविरों में, मैं बताता कहां भेजना है.

अघोरी उठकर खड़ा हो गया और चल पड़ा.चलते चलते बोला- बहुत हुआ A for Apple.

दूर कहीं से ध्वनि आ रही थी-अपने अतीत को पढ़कर, अपना इतिहास उलटकर, अपना भवितव्य समझकर- हम करें राष्ट्र का चिंतन. हम करें राष्ट्र आराधन.

अघोरी !!



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