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चक्रम चैनल पर मंजीरे को लेकर जंग

देश के सब चैनल प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा का लाईव कवरेज लगातार दिखा रहे थे। उनके कैमरामैन और रिपोर्टर नेपाल में जगह-जगह मारे-मारे फिर रहे थे फिर भी ऐसा कोई धाँसू फुटेज नहीं मिल रहा था कि ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की तरह ‘देखिये सिर्फ हमारे चैनल पर’ की तर्ज पर उसका ढिंढोरा पीट सके। चक्रम चैनल के स्टुडिओ में बैठे सभी तीसमारखाँओं को सूझ ही नहीं पड़ रही थी कि कोई धाँसू ब्रेकिंग न्यूज़ कैसे दिखाए। इधर सबसे तेज से लेकर सबसे घटिया चैनल पर एक जैसे फुटेज चल रहे थे। इसी बीच एक फुटेज आया कि प्रधान मंत्री श्री मोदी नेपाल के जानकी मंदिर में मंजीरा बजा रहे हैं। न्यूज़ रुम में उदास, हताश और निराश बैठे एडिटर की बाँछे खिल गई। उसने तत्काल पूरे न्यूज़ रुम को अलर्ट किया –हमारी ब्रेकिंग न्यूज होगी मंजीरे पर। फिर क्या था रिपोर्टर से केलकर कैमरामैन, एडिटर, प्रोड्यूसर सब काम पर लग गए। इसके बाद जो हुआ उसकी झलक देखिये….

न्यूज़ रुम से रिपोर्टर से पूछा जा रहा है – तो आप ये बताईये नरेंद्र मोदी ने जो ये मंजीरा बजाया है, इसे मंजीरा ही कहते हैं या कुछ और भी कहते हैं। ये मंजीरा कैसे बनाया जाता है। इसे बनाने में किस लकड़ी या धातु का प्रयोग किया जाता है। नेपाल में मंजीरे कहाँ बनते हैं। ये मंजीरे किस खास मौकों पर बजाए जाते हैं। इनके बजाए जाने का कोई खास मुहुर्त होता है कि कभी भी कहीँ भी कोई भी बजा सकता है। क्या आप उस जगह जा सकते हैं जहाँ ये मंजीरे बनते हैं। मंजीरे बनाने वाले से पूछिये कि मंजीरे बनाना उसने कहाँ से सीखा। वह साल भर में कितने मंजीरे बना लेता है।

इसे कैसे बजाते हैं। खड़े होकर, बैठकर, लेटकर या पद्मासन में बैठकर। इसे कितनी बार बजाया जाता है। ये जो मंजीरा प्रधान मंत्री जी ने बजाया है इसके पहले इसे कौन बजाता था। क्या ये मंजीरा खास तौर पर प्रधान मंत्री के लिए ही बनाया गया है, या इसे मंदिर में कोई भी जाकर बजा सकता है। अगर ऐसा है तो इसके पहले इस मंजीरे को किसने बजाया था, उसकी प्रतिक्रिया मिल सकती है क्या। मंजीरे से कितनी तरह की धुन या स्वर निकलते हैं। इससे शास्त्रीय राग की धुन निकलती है या पश्चिमी धुन भी निकल सकती है। प्रधान मंत्री ने जब मंजीरा बजाया तो उसमें से कौनसी धुन निकली थी। इस मंजीरे का क्या इतिहास है। यह कितना पुराना है। क्या मंदिर में ये एकमात्र मंजीरा है या और भी कोई मंजीरे हैं। अगर और भी मंजीरें हैं तो प्रधान मंत्री ने इसी मंजीरे का चयन क्यों किया। क्या हम उस व्यक्ति का पता लगा सकते हैं जिसने ये मंजीरा बनाया था। क्या उसको उम्मीद थी कि एक दिन भारत के प्रधान मंत्री नेपाल आकर उसके बनाए मंजीरे को बजाएंगे। क्या उसने और भी ऐसे मंजीरे बनाए हैं जो किसी ऐसे खास आदमी ने बजाए हैं। मंजीरे बनाने वाले का परिवार क्या करता है। प्रधान मंत्री के मंजीरे बजाने को लेकर मंदिर के पुजारियों और वहाँ आने वाले भक्तों में क्या प्रतिक्रिया है। क्या उस मंजीरे को बजाने के लिए भक्तों में कोई होड़ तो नहीं मची है। क्या इस मंजीरे को अब नेपाल के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा या अन्य सभी भक्तों के लिए आसानी से उपलब्ध होगा।

क्या मोदीजी के पहले किसी और देश के प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति ने इस मंजीरे को बजाया था। क्या उसका कोई फुटेज या फोटो हमें उपलब्ध हो सकता है। मोदीजी के साथ मौजूद नेपाल के प्रधान मंत्री श्री केपी शर्मा ओली ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है।

रिपोर्टर बेचारा इतने सारे सवालों की बौछार सुनकर घबरा गया और हाँफते हाँफते इतना ही बोल पाया- मंजीरा हर मंदिर में होता है और मंदिरों में होने वाले भजन कीर्तन में इसे बजाया जाता है। कोई भी व्यक्ति जो मंदिर में जाता है, वह भजन मंडली के साथ बैठकर मंजीरा बजा सकता है। जब मोदीजी वहाँ गए तो एक भक्त ने उन्हें मंजीरा पकड़ा दिया तो उन्होंने भी इसे बजा दिया। इसे बजाने में किसी खास कौशल की जरुरत नहीं पड़ती, इसके दोनों सिरों को पकड़ कर जोर जोर से हिलाने पर ये बजने लगता है।

रिपोर्टर के जवाब से न्यूज़ रुम में मायूसी छा गई। प्रोड्यूसर ने कहा मैं कई बार मंदिरों में गया हूँ मगर मैने वहाँ कभी कोई मंजीरा नहीं देखा।



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