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पश्चिम रेलवे आरपीएफ घर से भागे/बिछुड़े 718 बच्चों को परिवारजनों से मिलाया

मुंबई। पश्चिम रेलवे का रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) घर के घर से भागे हुए बच्चों को उनके परिवारजनों से मिलाने में एक प्रमुख एवं सक्रिय भूमिका निभाता है। इस सम्बंध में सुरक्षा मानदंडों को लागू करने हेतु राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियों तथा एनजीओ के साथ उच्चस्तरीय समन्वय सुनिश्चित किया जाता है, जिससे महिलाओं एवं बच्चों की मानव तस्करी एवं शोषण की रोकथाम की जा सके। इन प्रभावशाली प्रयासों के फलस्वरूप पश्चिम रेलवे पर वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 718 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान 1 अप्रैल से 20 मई, 2019 तक 66 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री रविंद्र भास्कर द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार बड़ी संख्या में लावरिस बच्चे प्रताड़ना अथवा तस्करी इत्यादि के शिकार के रूप में रेलवे के सम्पर्क में आते हैं। इन बच्चों को अक्सर ट्रेनों में यात्रा करते अथवा रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्मों के इर्द-गिर्द देखा जाता है। वर्ष 2018-19 के दौरान पश्चिम रेलवे पर कुल 718 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें से 381 बच्चों को मुंबई सेंट्रल मंडल में, 71 बच्चों को वडोदरा मंडल में, 44 बच्चों को अहमदाबाद मंडल में, 174 बच्चों को रतलाम मंडल में, 23 बच्चों को राजकोट मंडल में तथा 25 बच्चों को भावनगर मंडल में रेस्क्यू किया गया।

चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के 20 मई, 2019 तक पश्चिम रेलवे पर कुल 66 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें से 31 बच्चे मुंबई सेंट्रल मंडल में, 11 बच्चे वडोदरा मंडल में, 15 बच्चे रतलाम मंडल में, 5 बच्चे राजकोट में तथा 4 बच्चे अहमदाबाद मंडल में रेस्क्यू किये गये। जब कभी भी रेलवे स्टेशन पर कोई भी बच्चा संकटकालीन स्थिति में पाया जाता है, तो उस बच्चे की देखभाल की आवश्यकता पूर्ण करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा गलत हाथों में न चला जाये। खोये हुए बच्चों का पता लगाने एवं उन्हें उनके परिवार से मिलाने हेतु एक समर्पित अभियान की शुरुआत की गई है। ऐसे बच्चों की सुरक्षा से सम्बंधित मुद्दों के निपटारे हेतु भारतीय रेल द्वारा महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की सहायता से एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसजर की शुरुआत की गई है, जिसमें रेलवे के सम्पर्क में आये ऐसे बच्चों की सुरक्षा जुविलाइन जस्टिस एक्ट की धाराओं के तहत की जाती है। मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, रतलाम तथा राजकोट स्टेशनों पर चाइल्ड हेल्पलाइन डेस्क स्थापित किये गये हैं। घर से भागे बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें उनके माता-पिता, पुलिस अथवा एनजीओ को सौंप दिया जाता है।

फोटो कैप्शनः मुंबई सेंट्रल (मेन) स्टेशन पर स्थापित चाइल्ड हेल्पलाइन डेस्क तथा दूसरे चित्र में चर्चगेट के आरपीएफ कर्मचारी एक तीन वर्षीय बालक को उसके माता-पिता से मिलाते हुए।

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