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पश्चिम रेलवे मानसून से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार

सावधानीपूर्वक योजना और जमीनी स्तर पर तैयारी का कार्य समय पर निष्पादित होने से पश्चिम रेलवे पर न्यूनतम व्यवधान के साथ ट्रेनों का परिचालन सुनिश्चित होगा

पश्चिम रेलवे द्वारा यांत्रिक, सिगनलिंग, विद्युत परिसंपत्तियों और उपकरणों आदि के समुचित अनुरक्षण और रख- रखाव के साथ-साथ मिशन मोड पर मानसून तैयारी संबंधी विभिन्‍न कार्य पूर्ण किए गए हैं।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पश्चिम रेलवे द्वारा आगामी मानसून के दौरान निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए लक्ष्यों का सावधानीपूर्वक पालन किया गया और समय से पहले संबंधित कार्य पूर्ण किए गए। सावधानीपूर्वक योजना और कार्य के निष्पादन के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और पश्चिम रेलवे भारी बारिश के बावजूद न्यूनतम व्यवधानों के साथ ट्रेन सेवाओं को चलाने में सक्षम रही है। बड़े नालों और नालियों की सफाई और गाद निकालने, पटरियों के किनारे कीचड़ और कचरे की सफाई, अतिरिक्त जलमार्गों का निर्माण, उच्च शक्ति वाले पम्‍पों की स्थापना, पेड़ों की छंटाई आदि जैसे कार्यों को मिशन मोड पर पूरा किया गया।

श्री ठाकुर ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए किए गए विभिन्न उपाय निम्नानुसार हैं:-

· 28 चिन्हित स्थानों पर 1.60 लाख क्यूबिक मीटर मक हटाने का कार्य पूर्ण किया गया। यह कार्य विशेष रूप से डिजाइन की गई मक स्पेशल ट्रेनों, बीआरएन, जेसीबी, पोक्लेन आदि को तैनात करके किया गया।

· वसई यार्ड, नालासोपारा और बांद्रा-खार सेक्‍शन में माइक्रो टनलिंग द्वारा निर्मित किए गए अतिरिक्त जलमार्ग।

· पश्चिम रेलवे द्वारा 55 नालों की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है और 50 किलोमीटर नालियों से गाद हटाई गई है और उन्‍हें साफ किया गया है। साथ ही, यार्डों में पानी के प्रवाह पैटर्न का अध्ययन किया गया और पानी के सुचारू निकास की सुविधा के लिए नए नालों और मैनहोलों का निर्माण किया गया।

· नालों और नालियों में चोक पॉइंट की निगरानी, सफाई और पहचान के लिए 23 स्थानों का ड्रोन सर्वेक्षण किया गया।

· भारी बारिश के दौरान जलभराव की चपेट में आने वाले विभिन्न स्थानों की पहचान की गई है और इन बाढ़ संभावित स्थानों पर 204 उच्च क्षमता वाले पानी के पम्‍प स्थापित किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में सीवरेज और सबमर्सिबल पम्‍पों सहित ट्रैकों और डिपो पर उपलब्ध कराए गए पम्‍पों की संख्या में 14% की वृद्धि की गई है।

· 36 स्थानों पर बाढ़ मापने के यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं।

· 2300 से अधिक पेड़ों को काटने-छांटने और 20 कमजोर पेड़ों को काटने का कार्य पूर्ण किया गया है।

· सभी ईएमयू रेकों का निरीक्षण किया गया और मानसून सावधानी संबंधी कार्य पूर्ण किए गए।

श्री ठाकुर ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले मानसून के अनुभव के आधार पर रेलवे परिसर में बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई और इन स्थानों पर विभिन्न एहतियाती कार्य पूरे किए गए हैं। पटरियों की स्थिति पर नजर रखने के लिए 11 पेट्रोलमैन और 8 ब्रिज गार्ड द्वारा मानसून पेट्रोलिंग की जाती है। एनडीआरएफ के सहयोग से बचाव नौकाओं और संबद्ध उपकरणों के साथ 15 सदस्यीय आरपीएफ बाढ़ बचाव दल का गठन किया गया है। मानसून और अन्य मौसम अलर्ट के दौरान, बीएमसी के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के साथ गहन समन्वय रखना सुनिश्चित किया जा रहा है। उच्च ज्वार और भारी वर्षा के दिनों के लिए विशेष समय सारणी अपनाई गई है। यात्रियों को शीघ्र अलग करने के लिए स्थानीय परिवहन की व्यवस्था करने हेतु पश्चिम रेलवे विभिन्न नगर निकायों के साथ गहन समन्वय में है।

पश्चिम रेलवे निरंतर निगरानी सुनिश्चित कर रही है और यात्रियों को व्यवधान मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

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