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पश्चिम रेलवे ने एक बार फिर जड़ा कविताओं का शानदार शतक

मुंबई। अपने बेहतरीन कार्य निष्पादन के फलस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी रहने वाली पश्चिम रेलवे ने सृजनात्मक उपलब्धियों के मैदान पर कविताओं का चौथा शतक जड़ते हुए एक और अनूठा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। पश्चिम रेलवे द्वारा 77 रेलकर्मी कवियों की कुल 100 कविताओं का यह सुरुचिपूर्ण संकलन पिछले दिनों प्रकाशित किया गया, जिसका विमोचन पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री जी. सी. अग्रवाल द्वारा चर्चगेट स्थित प्रधान कार्यालय में आयोजित क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक में किया गया।

उल्लेखनीय है कि ‘कविता शतक’ नामक पहली पुस्तक का प्रकाशन पश्चिम रेलवे के राजभाषा विभाग द्वारा जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से वर्ष 2013 में मनाये गये राजभाषा पखवाड़े के अवसर पर किया गया था। इसी क्रम में कविता शतक का दूसरा और तीसरा संस्करण क्रमशः वर्ष 2014 एवं 2015 में प्रकाशित किया गया और अब पिछले दिनों इस श्रृंखला के चौथे संस्करण का प्रकाशन हुआ है। इस उल्लेखनीय काव्य संकलन में शामिल रचनाएँ समसामयिक विषयों पर आधारित हैं, जिनमें सामाजिक विसंगतियों, विडम्बनाओं, वर्तमान परिवेश के विविध पहलुओं, राष्ट्रीय सरोकार और आधुनिक मानवीय प्रवृत्तियों का चित्रण बखूबी किया गया है। विमोचन के अवसर पर महाप्रबंधक श्री अग्रवाल ने कहा कि रेल परिवार में ऐसे अनेक प्रतिभावान अधिकारी और कर्मचारी हैं, जो अपने प्रशासनिक दायित्व के कुशलतापूर्वक निर्वाह के साथ-साथ उत्कृष्ट साहित्य सृजन भी बखूबी करते हैं और ऐसे ही कुछ मेधावी काव्य सृजकों की चयनित कविताओं का संकलन ‘कविता शतक’ भाग-IV के रूप में प्रकाशित करने पर राजभाषा विभाग हार्दिक अभिनंदन का पात्र है।

इस संकलन की खासियत यह है कि इसमें जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय रेलों में वर्तमान में सेवारत वरिष्ठ रेल अधिकारी कवियों और कर्मचारी रचनाकारों की चयनित काव्य रचनाएँ शामिल हैं, वहीं कुछ सेवानिवृत्त रेल अधिकारियों की रचनाएँ भी शामिल की गई हैं। इनमें सर्वश्री हेमंत कुमार, रवीन्द्र कुमार, सुश्री शिखा गुप्ता, पंकज शर्मा, गजानन महतपुरकर, श्रीमती मानसी कुलश्रेष्ठ, डॉ. संघमित्रा, खुर्शीद हयात, डॉ. सुशील कुमार शर्मा, एस. कपिल, सुश्री श्वेता शेखर, श्रीमती पूजा पवार, नादिर अहमद खान, प्रमोद कुमार गुप्ता, सुनील जैन, श्रीमती अपर्णा अ. शर्मा, अतुल कुमार, निरंजन लाल, संजीव कुमार, सुनीता जी. अहिरे, सरोज सुमन, डॉ. रोशनी खुबचंदानी, शरद कुमार मिश्र, बिपिन पवार, सुश्री अनिता सातपुते, बरुण कुमार, सौरभ दत्ता, मनोज आर. राठोड, विद्या प्रशांत मयेकर, श्रीमती संगीता अ. पाण्डेय, श्रीमती छाया अ. पाटील एवं दत्त आनंद नायक के अलावा धर्मेन्द्र कुमार धरम, उपेन्द्र यादव, राजेन्द्र सिंह, सुश्री सुधा मिश्रा, सुश्री कान्ता रानी, सत्यदेव विजय, दिनेश कुमार, राजीव निगम राज, राजकिशोर राजन, गोवर्धन शर्मा, राजीव शर्मा, विमलेश चन्द्र, श्रीमती दीपा अजित राणे, जे. पी. गोहिल, राम निवास शर्मा, लक्ष्मण शिवहरे, अमीत करवंदे, राकेश कुमार सुमन, मिसम अली हैदरी, प्रवीण सलूजा, अनूप कुमार दुबे, दयाराम दर्द फिरेजाबादी, दलवीर सिंह चौधरी, सत्य प्रकाश, श्रीमती इन्दु सिन्हा, ओ. पी. श्रीवास्तव, मनीष कुमार वी. त्रिवेदी, के. के. डाभी, शिरीष गावंडे, हरीश कुमार वर्मा, नवीन कमल, राजमणि मिश्र, शिवदत्त, संतोष कुमार झा, ज्ञानेश्वर गेटकर, राजीव कुमार, डॉ. एच. पी. सक्सेना, प्रमोद कुमार, एम. एच. मुजाहिद, अमर बहादुर पटेल, कमलेश कुमार भट्ट, रमेश विनोदी, पुरी दीपक कुमार, प्रवीण कुमार एवं जगन्नाथ शामिल हैं। इस काव्य संकलन में लगभग सभी विधाओं की उच्च स्तरीय रचनाएँ शामिल हैं, जिनमें गीतों, ग़ज़लों और अतुकांत कविताओं के ज़रिये मानवीय संवेदनाओं और अंतर्मन की कोमल भावनाओं को असरदार अभिव्यक्ति प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि कविता शतक के पहले तीन संस्करणों को विभिन्न स्तरों पर व्यापक सराहना मिली थी। इसी क्रम में चौथे संस्करण का प्रकाशन कर पश्चिम रेलवे ने एक और अनूठी उपलब्धि हासिल की है।

यह संकलन राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी फिल्मों में योगदान देने वाले रेलकर्मियों को समर्पित किया गया है, अतः कुछ ऐसे मशहूर फिल्मी गीतकारों और दिग्गज साहित्यकारों की मशहूर रचनाएँ संक्षेप में प्रकाशित की गई हैं, जो अपने जीवन में कभी न कभी रेलकर्मी रह चुके हैं। इनमें मशहूर साहित्यकार श्री माखनलाल चतुर्वेदी के अलावा सुप्रसिद्ध फिल्मी गीतकार सर्वश्री शैलेन्द्र, कैसर-उल-जाफरी, गुलशन बावरा, राजकवि इन्द्रजीत सिंह तुलसी और वरिष्ठ रेल अधिकारी सत्यप्रकाश मुख्य रूप से शामिल हैं। इस संस्करण का सम्पादन पश्चिम रेलवे के उप महाप्रबंधक (राजभाषा) डॉ. सुशील शर्मा और वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी श्री अशोक लोंढे के निर्देशन में राजभाषा विभाग की टीम द्वारा किया गया है, वहीं संकलन का आवरण पृष्ठ भारतीय रेल कल्याण संगठन (इरवो) के महाप्रबंधक श्री जे. सी. परिहार द्वारा बनाया गया है।

फोटो कैप्शनः- पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री जी. सी. अग्रवाल ‘कविता शतक’ काव्य संकलन के चौथे संस्करण का विमोचन करते हुए और आवरण पृष्ठ का एक दृश्य।

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