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प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता पर बनी पश्चिम रेलवे की लघु फिल्म छा गई

मुंबई। 5 मई, 1992 को दुनिया की सबसे पहली लेडीज स्पेशल ट्रेन और 25 दिसम्बर, 2017 को देश की पहली वातानुकूलित ट्रेन चलाने सहित अनेक महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों का श्रेय हासिल कर विभिन्न क्षेत्रों में हमेशा अग्रणी रहने वाली पश्चिम रेलवे ने भारतीय रेल पर पहली बार किसी ट्रेन के डिब्बे में प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीन स्थापित कर ‘स्वच्छ रेल – स्वच्छ भारत’ अभियान के क्रम में एक और अनूठी उपलब्धि हासिल की है। इस बीच सम्पूर्ण भारतीय रेल पर मनाये जा रहे ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े के अंतर्गत पश्चिम रेलवे द्वारा ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ के खिलाफ बनाई गई रोचक हिंदी लघु फिल्म ‘मैं हूँ प्लास्टिक हटेला’ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर सुपरहिट हो गई है और इसे पूरे देश के विभिन्न भागों से काफी सराहना मिल रही है। इस वाइरल हो चुकी लघु फिल्म को ट्विटर और फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर अब तक बड़ी संख्या में लाइक्स मिल चुके हैं और इसे पसंद करने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।

1 मिनट 41 सैकेंड की इस रोचक लघु फिल्म को रेल मंत्रालय के ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट करके सराहा गया है, वहीं सीएनबीसी आवाज़ सहित अनेक संचार माध्यमों ने इसे एक अनूठी जागरूकता पहल बताते हुए इसकी जमकर तारीफ की है। माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भी ‘लेस प्लास्टिक इज़ फ़ैनटास्टिक’ कैप्शन के साथ अपने सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो शेयर किया है तथा जागरूकता फैलाने के लिए पश्चिम रेलवे के अनूठे तरीके को सराहा है। पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री ए. के. गुप्ता ने इस सृजनात्मक उत्कृष्टता के लिए पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री रविंद्र भाकर और उनकी समूची टीम को हार्दिक बधाई दी है। इस लघु फिल्म को अभी तक विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर 1 लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों द्वारा देखा जा चुका है।

इस लघु फिल्म में ‘प्लास्टिक हटेला’ किरदार के माध्यम से दुनिया पर हो रहे प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को बेहद असरदार और रोचक ढंग से दर्शाया गया है। महात्मा गांधीजी की 150 वीं जयंती के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2 अक्टूबर, 2019 से पूरे देश में ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा को दृष्टिगत रखते हुए इस लघु फिल्म का सम-सामयिक महत्त्व और अधिक बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पिछले दिनों पश्चिम रेलवे द्वारा बिना टिकट यात्रा के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए ‘रैप सॉन्ग’ के रूप में चलाये गये – ‘तेरा टाइम आयेगा’ अभियान को भी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा पसंद किया गया था। इस लघु फिल्म का प्रदर्शन पश्चिम रेलवे के सभी स्टेशनों पर लगे डिजिटल स्क्रीन के अलावा विभिन्न मंडल रेल कार्यालयों और कारखानों में लगे डिजिटल संचार माध्यमों के ज़रिये भी किया जा रहा है। ‘प्लास्टिक हटेला’ किरदार की लोकप्रियता को मद्देनज़र रखते हुए इसकी तस्वीर वाले स्पेशल सेल्फी पॉइंट पश्चिम रेलवे के मुंबई उपनगरीय खंड के विभिन्न प्रमुख स्टेशनों पर लगाये गये हैं, जिनके ज़रिये प्लास्टिक के बहिष्कार के महत्त्वपूर्ण सामाजिक संदेश को बखूबी दर्शाया जा रहा है।

‘स्वच्छ रेल – स्वच्छ भारत’ अभियान के अंतर्गत भारतीय रेल पर पहली बार किसी ट्रेन के डिब्बे में सर्वप्रथम प्लास्टिक क्रशिंग मशीन की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि पश्चिम रेलवे के लोअर परेल कारखाने द्वारा एलएचबी पेन्ट्रीकार (03840WR) में PET बॉटल क्रशिंग मशीन की स्थापना करके हासिल की गई है। यह मशीन प्रतिदिन 300 प्लास्टिक बोतलों को क्रश करने की क्षमता रखती है। ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े के चौथे दिन का थीम ‘स्वच्छ स्टेशन’ रहा तथा इसे सभी स्टेशनों पर गहन स्वच्छता अभियान के साथ चिह्नित किया गया। अभियान के दौरान क्लीनिंग मशीन, टूल्स और प्लांट के संचालन और उपलब्धता, सफाई कर्मचारियों के लिए प्रोटेटिक्व गियर, स्टेशन पर कूड़ेदान की पर्याप्त उपलब्धता को सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। स्टेशन स्वच्छता के लिए ‘फिल द डस्टबिन’, ‘डोनेट द डस्टबिन’ जैसे अनेक अभियान चलाये गये। पश्चिम रेलवे के सभी मंडलों के ‘ए’ वन एवं ‘ए’ श्रेणी स्टेशनों और उनके परिसंचरण क्षेत्रों पर सफाई कर्मचारियों, यूनियन प्रतिनिधियों, स्टेशन कर्मचारियों, पर्यवेक्षक कर्मचारी, गैर-सरकारी संगठनों के स्वयंसेवक, स्कूल के विद्यार्थियों तथा सामाजिक संगठनों के समन्वय और सहयोग से इस व्यापक स्वच्छता अभियान को मनाया गया। स्वच्छ स्टेशनों के अलावा नालियों एवं शौचालयों की साफ-सफाई तथा सभी ढंग से हाइड्रेंट पाइप की रख-रखाव पर भी प्रमुख फोकस रहा। नालियों एवं वॉटर आउटलेट के चोक होने से बचाने के लिए प्लास्टिक बॉटल क्रशर लगाये गये।

बांद्रा टर्मिनस स्टेशन पर अणुव्रत फाउंडेशन द्वारा ‘प्लास्टिक को ना कहें’ अभियान चलाया गया तथा मेसर्स मंगल रबड़ प्रतिष्ठान द्वारा वलसाड स्टेशन पर 10 डस्टबिन दान किये गये। महालक्ष्मी स्थित ईएमयू कारखाने में श्रमदान का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारियों, निरीक्षकों तथा रेल कर्मचारियों ने भाग लिया। इस अभियान के अंतर्गत फेरस, रबड़ और प्लास्टिक कचरों को इकट्ठा किया गया। इस अभियान के अंतर्गत पर्यवेक्षकों एवं कर्मचारियों को सिंगल यूज़ प्लाटिक का इस्तेमाल नहीं करने और स्क्रैप सामग्रियों को ठीक ढंग से अलग-अलग करने और उनके निपटान की जानकारी दी गई। अनेक स्वच्छता जागरूकता पोस्टर स्टेशनों और क्षेत्रीय इकाइयों पर लगाये गये हैं। पश्चिम रेलवे के अन्य सभी मंडलों में भी पूरे उत्साह से ‘स्वच्छ स्टेशन’ थीम को मनाया गया और विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में रेल कर्मियों ने भाग लिया।

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