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जब मैने करगिल की टाईगर हिल पर तिरंगा फहरायाः नायक दीपचंद

हमारे लिए किसी सैनिक या पुलिसकर्मी का मतलब होता है वर्दी पहने वो व्यक्ति जो अपने कर्तव्य पर डटा रहता है, लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि इस सैनिक या पुलिस कर्मी के प्रति हमारा, समाज का क्या दायित्व होना चाहिए। जो सैनिक और जवान आपकी रक्षा के लिए घर-परिवार भूलकर दुश्मनों से भिड़ जाते हैं, वे जब मोर्चे पर बलिदान हो जाते हैं तो हम सब उनके परिवार को भूल जाते हैं। लेकिन मुंबई के श्री जयवंत राऊतजी ने ठान ऱखा है कि मोर्चे पर, देश की सीमा पर और देश के लिए बलिदान होने वाले वीर सैनिकों और पुलिस कर्मियों के परिवारों को किसी तरह का अभाव हनीं होने देंगे। अपने इसी संकल्प की पूर्ति के लिए वे विगत 6 वर्षों से मुंबई से सटे बोरिवली- दहिसर में प्रतिवर्ष एक आयोजन के माध्यम से ऐसे बलिदानी सैनिकों के परिवार जनों और वीर सैनिकों के साथ ही पुलिस कर्मियों को सम्मानित करते हैं जिन्हें समाज, सरकार और हम लोग भुला बैठते हैं।

उनके इस आयोजन की सबसे खास बात ये होती है कि वे युवा पीढ़ी को इसमें आमंत्रित करते हैं ताकि वीर सैनिक और पुलिसकर्मी जब अपने संघर्ष और आतंकवादियों और दुश्मनों से जूझने की गाथाएँ सुनाए तो वो अगली पीढ़ी तक भी पहुँचे। श्री जयवंत राऊतजी *जनजागृति प्रतिष्ठान* नामक संस्था के बैनर तले इस कार्यक्रम का आयोजन करते हैं।

इस आयोजन में इन वीर सैनिकों और पुलिसकर्मियों की गाथाएँ सुनकर आप कई बार सिहर उठते हैं, तो कई बार संवेदना से द्रवित हो जाते हैं, तो कभी रोमांच से भर उठते हैं तो कभी इस बात पर गर्व करते हैं कि हमारे देश में ऐसे वीर योध्दा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जान की बाजी लगाने को तैयार रहते हैं।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए वीर सैनिक नायक दीपचंद ने अपने जोशीले वक्तव्य में कहा कि समाज को जानना चाहिए कि एक सैनिक कितने काम करता है। इसके लिए जरुरी है कि आप लोग सैनिकों के साथ जुड़ें। अपने पारिवारिक आयोजनों में, बच्चों के जन्म दिन में अपने आसपास रहने वाले किसी सैनिक को बुलाएँ और उससे जानें कि एक सैनिक सीमा पर रहकर क्या करता है। उन्होंने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के लोगों का पुलिस और सैनिकों से कोई संवाद ही नहीं है, दोनों एक दूसरे की तकलीफों और समस्याओँ से अनजान हैं।

उन्होंने एक सैनिक का दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हम देश की सीमा पर तो दुश्मनों से बहादुरी से लड़ लेते हैं मगर हम अपने देश में अपने नागरिकों की उपेक्षा के शिकार होते हैं। हम ट्रैन में जाते हैं तो हमें नीचे की सीट के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता है। किसी सैनिक के शहीद होने पर लोग खूब झंडे लहराकर जूलूस निकालते हैं लेकिन उसके परिवार को भूल जाते हैं। सामने जीवित सैनिक हो तो उसकी उपेक्षा करते हैं।


उऩ्होंने कहा कि मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ, 27 साल पहले मैने तोपखाना में गनर रूप में सेवा शुरु की। पहली बार श्रीनगर में इन्फैंट्री की ड्यूडी मिली। वहाँ कश्मीरी भाषा सीखी, 8 महीने तक कश्मीरी वेशभूषा, दाढ़ी में कश्मीरी हुलिया बनाकर रखा और भारतीय फौज के जासूस के रूप में 5 बार आतंकवादियों से मिलकर उनके अड्डों का पता लगाया। एक अड्डे पर आतंकवादियों को घेरकर ऑप्रेशन शुरु किया। लेकिन आतंकवादी नहीं मिले, मेरी खबर पक्की थी। मगर कोई अफसर विश्वास नहीं कर रहा था। मैं भी अड़ गया कि आतंकवादी इसी घर में है। फिर एक अधिकारी सुरिंदर जी ने घर की तलाशी लेते लेते बिस्तर में दुबककर छुपे आतंकवादी का पता लगाया तो उसने गोली चला दी, सुरिंदर जी की बाँह में गोली लगी मगर उन्होंने आतंकवादियों को मार गिराया। एक अड्डे पर आतंकवादी जिस घर में छुपे थे उसे रॉकेट लाँचर से उड़ा दिया और उनको वहीं मार दिया। इस हमले में हमारे वीर अवतार सिंह शहीद हो गए।

उन्होंने गर्व से बताया कि मुझे देश के लिए करगिल में भी लड़ने का मौका मिला और वहाँ मैने दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए अपने हाथ और पैर खो दिए। वहाँ जाने कितना माईऩस ताममान रहता है मगर हमें होश ही नहीं रहता कि हमें ठंड लग रही है। हम रात रात भर कड़कड़ाती ठंड में फायरिंग करते थे। तोलिंग की जीत के बाद हम तोपों को अपने हाथों में उठाकर खड़ी पहाड़ी पर चढ़े, सामने से दुश्मनों की गोलियाँ चल रही थी मगर हम आगे बढ़ते रहे।तब वहाँ बंकर भी नहीं थे। हमारा एक साथी बलिदान हो चुका था लेकिन ये समय हमारे दुःख या शोक मनाने का नहीं था, हम टाईगर हिल पर पाकिस्तानियों से आमने सामने लड़ रहे थे। पाकिस्तानी हमें साफ साफ देखकर निशाना लगा रहे थे। हजारों फायरिंग हुई हमारे पास छुपने की जगह नहीं थी लेकिन हम डटे रहे। मैने मेरे साथ लड़ रहे मुकेश कुमार से वादा किया था कि इस गोलीबारी में जो बच जाएगा वो दूसरे के परिवार का ख्याल रखेगा। हमें ऐसे हौसलों के साथ वहाँ युध्द करना होता है। मुकेश ने मेरी ही गोद में अपना दम तोड़ा। मैने मुकेश कुमार को खो दिया मगर आज भी उसका परिवार मेंरा परिवार है। एक सैनिक अपने जीवन में बहुत कुछ खो देता है मगर हौसला नहीं खोता। मैने अपने दोस्त मुकेश से कहा कि मैं उसकी मौत का बदला लूँगा और दूसरे दिन मैने अपने साथियों के साथ जाकर टाईगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया।

मैं एक साल टाईगर हिल पर रहा। एक साल बाद तोप के गोले के विस्फोट मे मेंरे एक हाथ और दोनो पैर चले गए। डॉक्टरों ने कहा था कि मेरे 5 प्रतिशत जीने का चांस है। मुझे 22 बोतल खून चढ़ा और 24 घंटे बाद होश आया तो डॉक्टर भी हैरान रह गए। मैं बचपन से हनुमानजी का भक्त हूँ, उन्होंने मुझे शक्ति दी और आज मैं आपके बीच हूँ। उन्होंने कहा कि मैने अपने काम की शुरुआत मात्र 750 रुपये महीने से की।

उन्होंने कहा कि जब मेरे लिए नकली टांगे लगाने की बात हुई तो डॉक्टरों ने कहा कि ये आपके वजन से ज्यादा है इसलिए काम नहीं करेगी। लेकिन आज मैं अपनी नकली टाँगों से भी फुटबाल खेलता हूँ।

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने एक प्रेरक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि जब मुझे कुछ भी सामान लेना होता था तो मुझे किसी की मदद लगती थी। मेरा डेढ़ साल का बेटा ये देखता था। एक दिन मुझे डिब्बे से बिस्किट निकालना थे, तो मेरा बच्चा मेरे पास आया और इशारे से कहा कि आप मुझे कंधे पर उठाओ और मैं बिस्किट का डिब्बा ले लूंगा। उसका ये हौसला देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गई। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी आज मोबाईल और टीवी पर अपना समय खराब कर रही है, इनको सैनिकों के बीच जाना चाहिए, उनके परिवारों से मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि मैने मेरे घर में 21 परमवीर चक्र प्राप्त सैनिकों के फोटो घर में लगा रखे हैं, जिसमें से 4 मेरे साथी थे।

उन्होंने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले चार महीने में महाराष्ट्र के कितने ही सैनिक शहीद हो गए मगर उनको कोई नहीं जानता। समाज को सैनिकों के परिवारों के बीच जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि सैनिक के साथ साथ उसका परिवार, उसकी पत्नी और बच्चे, माता-पिता भी बहुत बड़ा बलिदान देते हैं, मगर समाज उनका मूल्यांकन नहीं करता।

इस अवसर पर श्री मंगेश नाईक और श्री अरुण जाधव ने कसाब को जीवित पकड़ने के दौरान के घटनाक्रम को सुनाया तो लोग साँस रोके उन्हें सुनते रहे। घटना का एक एक दृश्य उनके शब्दों में किसी फिल्म के दृश्य की तरह सामने आ रहा था और श्रोताओँ को लग रहा था मानो वे कोई फिल्म देख रहे हैं।

पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे की साहसगाथा सुनकर तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि हमारे वीर सैनिक किन स्थितियों से जूझते हैं। उन्होंने मणिपुर में आतंकवादियों के अड्डे पर किए गए हमले की दास्तान सुनाई तो सुनने वालों के रौंगटे खड़े हो गए। किस तरह वे गोली लगने के बावजूद रातभर बगैर इलाज के जंगल में जंगली जानवरों और कीड़े मकोडों के बीच दम साधे पड़े रहे। दूसरे दिन सुबह होने पर उन्हें हैलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया।

श्री संजय पटेल ने कहा कि भारत विकास मंच के माध्यम से हम समाज को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। मुंबई के आसपास के वनवासी समाज के लोग आज बी आदिम युग में जी रहे हैं, समाज के संपन्न व शिक्षित लोगों को उनके साथ संवाद करना चाहिए, उनसे जुड़ना चाहिए, इसी संकल्प को लेकर हम काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम के आयोजन में श्री जयवंत राऊत के साथ ही श्री संजय नेवे, कु. भाग्यश्री राऊत, श्री किशोर पुरव ,श्री संदिप परब कु. शीतल राणे,श्री पंकज पाटील सर,श्री मनीष नाग की भी प्रमुख भूमिका रही। इस समारोह के लिए शिवसेना नेता डॉ. विनोदजी घोसाळकर भरपूर सहायता कर इसे सफल बनाने में योगदान देते हैं।
इस आयोजन में उन्होंने कीर्ति चक्र से सम्मानित सूबेदार संतोष राळे, शौर्यचक्र से सम्मानित पैरा कमांडो मधुसूदन सुर्वे , बंगला मुक्ति संग्राम मे पाकिस्तान पर पाए हुए ऐतिहासिक विजय के साक्षीदार, हवलदार जगन्नाथ शिरसाट ,मुंबई पर 26/11 /2008 को हुए आतंकी हमले के दौरान अपनी सूझबूझ और बहादुरी से कसाब का सामना करने वाले सहायक पुलिस उपनिरीक्षक मंगेश नाईक, सहायक पुलिस उपनिरीक्षक अरुण जाधव जैसे योध्दाओं को सम्मानित किया। इसके साथ ही किसानों के लिए कार्य कर रहे अशोक देशमाने, लोकनेता डॉ. विनोदजी घोसाळकर, समाज सेवक प्रशांत पुजारीजी का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर अतिथि के रूप मे गोखले कॉलेज की प्राचार्या डॉ.सुहासिनी संत, सेंट रॉक कॉलेज की प्राचार्या श्रीमती नीरजा शरण, पूर्व नगर सेवक माननीय विलासबंधु चोरघे, मुंबई के वनवासियों के बीच बापू के नाम से लोकप्रिय समाजसेवी श्री संजयभाई पटेल, सेंट रॉक लॉ कॉलेज की मुख्याध्यापिका श्रीमती श्वेताली पाटिल, ठाकुर कॉलेज के एनसीसी अधिकारी मेजर नंदकुमार चौधरी, श्रीमती शैला मुळे, स्व.डॉ कीशोर राऊतजी की पुत्री सौ. नेहा देशमुख जैसे समर्पित व सुधी लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम के आयोजन में श्री जयवंत राऊत के साथ ही श्री संजय नेवे, कु. भाग्यश्री राऊत, श्री किशोर पुरव ,श्री संदिप परब कु. शीतल राणे,श्री पंकज पाटील सर,श्री मनीष नाग की भी प्रमुख भूमिका रही। इस समारोह के लिए शिवसेना नेता डॉ. विनोदजी घोसाळकर भरपूर सहायता कर इसे सफल बनाने में योगदान देते हैं।

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