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जब पर्रिकर ने खुद पर ही जुर्माना लगा दिया

मुंबई। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का कैंसर से लंबी जंग के बाद निधन हो गया। वह ऐसे पहले मुख्यमंत्री थे जो आईआईटी से पढ़कर निकले थे। आईआईटी बॉम्बे में वह मेस सेक्रटरी थे। उनके साथी बताते हैं कि वह छात्रों और मेस वर्कर्स के साथ बेहद कड़ाई से पेश आते थे। हॉस्टल में उनके साथ रहे उनके जूनियर और दोस्त बकुल देसाई याद करते हैं कि एक बार उन्होंने खुद पर ही जुर्माना लगा लिया था।

देसाई ने बताया कि पर्रिकर अकाउंट्स को लेकर बेहद सख्त थे। वह हिसाब सफाई से रखते थे। उनका एक ही मकसद था कि छात्रों के लिए बिल को कैसे कम किया जाए। देसाई याद करते हैं कि जब वह पहली बार 1978 में वह कॉलेज पहुंचे थे तब पर्रिकर ने उन्हें रैगिंग से बचाया था और तभी दोनों में दोस्ती हो गई थी। देसाई बताते हैं कि पर्रिकर नियमों को लेकर इतने सख्त थे कि एक बार उनके रिश्तेदार ने परिसर से फूल तोड़ा तो पर्रिकर ने खुद पर ही फाइन लगा लिया था।

कुछ वक्त पहले आईआईटी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए पर्रिकर ने अपने हॉस्टल के दिन याद किए थे। देसाई एक किस्सा बताते हैं- ‘मेस वर्कर्स ने एक दिन लंच टाइम में हड़ताल पर जाने का फैसला किया। पर्रिकर उस वक्त 40 लड़कों के साथ मेस में पहुंचे और पूरे हॉस्टल के लिए खाना बनाया। वह दुनिया का सबसे अच्छा खाना था। उस घटना के बाद वर्कर्स काम पर लौट आए थे।’ एक बार पर्रिकर ने मेस वर्कर्स को अपनी लुंगी में आलू, प्याज और टमाटर चुराकर ले जाते हुए पकड़ लिया था।

दिवंगत पर्रिकर निजी जिंदगी में कितने सरल थे इसकी बानगी आपको यहां बताते हैं। पर्रिकर किसी भी समारोह में साधारण कपड़ों के साथ पहुंच जाते थे। एक ऐसा ही किस्सा है कि वह एक पांच सितारा होटल में किसी आयोजन में हिस्सा लेने गए थे। यहां भी वह साधारण कपड़ों के साथ और चप्पल पहने पहुंच गए थे। जब वह होटल के गेट पर पहुंचे तब गार्ड ने उन्हें रोक दिया। तब पर्रिकर गोवा के सीएम थे। दरअसल, गार्ड पर्रिकर को पहचान नहीं पाया। तब पर्रिकर ने कहा कि वह गोवा के सीएम हैं, तब जाकर उन्हें होटल में प्रवेश मिला।

मनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर की जिंदगी 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू हुई। सामान्य परिवेश से निकलर उन्होंने आईआईटी मुंबई से शिक्षित होने से लेकर गोवा के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और फिर गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर आखिरी सांस ली। पर्रिकर की जिंदगी एक आम आदमी के पोस्टर बॉय बनने की कहानी की जबरदस्त मिसाल है। आगे की स्लाइड में देखें उनकी राजनीति और जिंदगी के चमकते और संघर्ष से सफलता तक की कहानी…

गोवा के इस दिग्गज राजनेता को राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी सादगी और जीवट के लिए याद किया जाता है। कैंसर की दुर्गम लड़ाई से लड़ते हुए उन्होंने आखिरी सांस ली। जीवन के आखिरी वक्त तक वह सक्रिय रहे और कैंसर से लड़ते हुए मुख्यमंत्री के दायित्व निभाते रहे।

गोवा की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पर्रिकर रक्षा मंत्री के तौर पर शामिल हुए। रक्षा मंत्री रहने के दौरान देश के दूर-दराज के इलाकों में भी लोग उनकी सादगी के कारण उन्हें बेहद पसंद करते थे। आधी बांह के ट्रेडमार्क शर्ट-पैंट, चश्मे और सिंपल घड़ी में नजर आनेवाले पर्रिकर की सादगी, लेकिन तकनीक और विज्ञान के लिए दिलचस्पी ने उन्हें देशभर के युवाओं का फैन बना दिया।

मनोहर पर्रिकर की पत्नी की भी 2001 में कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई थी। उस वक्त पर्रिकर गोवा के सीएम भी थे। हालांकि, इस निजी त्रासदी से ऊबरकर न सिर्फ उन्होंने बतौर सीएम अपना दायित्व निभाया, बल्कि दोनों युवा बेटों की परवरिश भी शानदार तरीके से अकेले ही की।

मनोहर पर्रिकर को देश में राजनीति के भविष्य के संकेतों को समझनेवाले के तौर पर भी देखा जाएगा। 2013 में पर्रिकर बीजेपी के पहले अग्रणी नेताओं में से थे जिन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम उस वक्त बीजेपी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे किया था। गोवा में बीजेपी की सत्ता में वापसी कराने और गठबंधन के साथ सरकार चलाने के लिए भी बीजेपी आलाकमान ने पर्रिकर पर ही भरोसा किया। 2017 में गोवा चुनाव के बाद बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, लेकिन पर्रिकर दिल्ली से गोवा पहुंचे और आखिरकार जोड़तोड़ के बाद सरकार बनाने में कामयाब रहे।

प्रधानमंत्री मोदी जिन नेताओं पर खासा विश्वास करते थे, उनमें एक मनोहर पर्रिकर भी रहे। पर्रिकर और मोदी के बीच के रिश्तों का समीकरण इससे समझा जा सकता है कि पर्रिकर न सिर्फ उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने पीएम पद के लिए मोदी का नाम बढ़ाया था। वह लगातार राफेल डील को लेकर पीएम का बचाव करते रहे।

मनोहर पर्रिकर के बारे में दिलचस्प बात है कि छात्र जीवन से संघ से जुड़े रहे और ईसाई बहुल राज्य गोवा के सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। गोवा के लोगों के बीच पर्रिकर को ‘मैन विद प्लान’ के नाम से लोकप्रिय हुए। पर्रिकर जब प्रदेश के विपक्ष के नेता थे तो उनके भाषण न्यू गोवा के सपनों के साथ कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर कठोर तंज कसनेवाले थे। बतौर विपक्षी नेता उनके भाषणों में दूरदर्शिता और जोश था और इसने उन्हें प्रदेश में लोकप्रिय बनाया। सीएम बनने के बाद उन्होंने गोवा में फैले भ्रष्टाचार, अवैध माइनिंग के आरोप में कई कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई की और इसने उन्हें जनता के बीच फैसले लेनेवाला सीएम के तौर पर स्थापित किया।

गोवा के ज्यादातर लोगों की तरह मनोहर पर्रिकर को भी फुटबॉल खेलना काफी पसंद था। एक फुटबॉल टूर्नमेंट के दौरान उन्होंने कहा भी था कि गोवा के लोग अब फुटबॉल को भूल रहे हैं और क्रिकेट खेल रहे हैं। खुद पर्रिकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि राजनीति में आने के बाद वह आईआईटी हॉस्टल की मस्ती और फुटबॉल को मिस करते हैं।

बतौर सीएम गोवा में मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल को न्यू गोवा बनाने के उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। पर्रिकर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों और गोवा में निवेश को बढ़ाने पर काफी जोर दिया था। गोवा के सीएम का कार्यभार 2017 में संभालने के बाद उन्होंने कहा था कि गोवा हॉलिडे और शूटिंग भर की जगह नहीं है। वह गोवा को निवेश और इनफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देश का अव्वल प्रदेश बनाना चाहते हैं।

देसाई बताते हैं कि गोवा का मुख्यमंत्री रहते हुए भी पर्रिकर बेहद सादा जीवन जीते थे। देसाई याद करते हैं, ‘उन्होंने एक बार बताया था कि 2002 में उन्हें एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था क्योंकि उनके पास टिकट नहीं था। उनका टिकट प्रोटोकॉल ऑफिसर के पास था जो टिकट काउंटर पर था लेकिन सिक्यॉरिटी गार्ड ने उन्हें रोका और यह मानने से इनकार कर दिया कि वह गोवा के सीएम हैं। गार्ड ने अपने सीनियर्स को बताया था कि पर्रिकर रिक्शे से आए थे और अपना सामान खुद ही ले जा रहे थे।’

पर्रिकर अक्सर अपने ऑफिस या आसपास स्कूटर से चले जाते थे। हालांकि बाद में जाकर उन्होंने स्कूटर से चलना छोड़ दिया। जब उनसे इसके बारे में पूछा गया तब उन्होंने बताया कि वह हादसे की आशंका को देखते हुए स्कूटर नहीं चलाते हैं। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ता के एक सम्मेलन में कहा था, ‘मेरे दिमाग में काम को लेकर सोच चलती रहती है और स्कूटर चलाते समय अगर मेरा दिमाग कहीं और है तो फिर मैं किसी हादसे का शिकार हो सकता हूं। इसलिए अब मैं स्कूटर नहीं चलाता हूं।’

साभार- टाईम्स ऑफ इंडिया से



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