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जहाँ विदेश में भारतीयों को मिलता है अपने घर का माहौल

भारतीय विद्यार्थी संगठन अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारत से आए विद्यार्थियों की मदद करते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।

पढ़ाई के लिए अमेरिकी कॉलेजों में दाखिला लेने जा रहे भारतीय विद्यार्थी खुशकिस्मत हैं। इंडियन स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (आईएसओ), इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईएसए), स्टूडेंट्स ऑफ इंडिया एसोसिएशन (एसआईए) और हिंदू स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एचएसओ) जैसे संगठनों और एसोसिएशन की अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में जीवंत मौजूदगी है। ये दक्षिण में यूनिवर्सिटी ऑ़फ साउथ फ्लोरिडा (यूएसएफ) और यूनिवर्सिटी ऑ़फ टेक्सस, ऑस्टिन, से लेकर उत्तर में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी, पश्चिम में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कली और पूर्व में कोलंबिया यूनिवर्सिटी तक सक्रिय हैं। वास्तव में यदि आप ऐसे ही किसी भी विश्वविद्यालय को पढ़ाई के लिए चुनें तो आसार इस बात के हैं कि वहां कोई भारतीय विद्यार्थी संगठन सक्रिय हो।

इन सभी विद्यार्थी संगठनों का प्रयास रहता है कि वे अपने विश्वविद्यालय में भारतीय विद्यार्थियों को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक ज़िंदगी के नज़रिये से स्वागतपूर्ण माहौल उपलब्ध कराएं। कुछ मामलों में तो ये संगठन नए आने वाले विद्यार्थियों को हवाईअड्डे से लाने के साथ-साथ अस्थायी तौर पर उनके रहने का बंदोबस्त भी करते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा में स्टूडेंट्स ऑफ इंडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहित कौड़ा स्पष्ट करते हैं, ‘‘यूएसएफ में एसआईए सक्रिय संगठन है और भारत की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के साथ साथ विश्वविद्यालय समुदाय के सामने दुनिया में भारत की बढ़ती भूमिका को भी सामने रखने की कोशिश कर रहा है। हमें इस विश्वविद्यालय में 31 साल हो चुके हैं। संगठन की स्थापना 1985 में ए. विजय राव ने की थी जो कि टैंपा में भारतीय समुदाय के एक प्रभावशाली लीडर है। इस समय हमारे संगठन में कुल 1,300 सदस्य हैं जिसमें से 1,000 तो मौजूदा विद्यार्थी हैं जबकि 300 हमारे सक्रिय पूर्व विद्यार्थी हैं।’’

ज्यादातर भारतीय विद्यार्थी संगठनों का वजूद अमेरिका में पिछले तीन दशकों से है। ऑस्टिन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस की इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन इन सबमें सबसे पुरानी है जिसकी स्थापना 1954 में हुई थी। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हिंदू स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन इस मामले में सबसे नई है जो वर्ष 1992 में वजूद में आई।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हिंदू स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के को-प्रेसीडेंट मुकुंद सुब्रमणियम का कहना है, ‘‘एचएसओ विद्यार्थियों को अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ने का मंच देता है। इसके अलावा ये ऐसे सामाजिक माहौल को तैयार करने में मदद देता है ताकि भारतीय विद्यार्थी कैंपस में मौजूद दूसरे हिंदू छात्रों के साथ जुड़ कर एक विस्तारित परिवार की तरह संवाद कर सकें।’’

ये भारतीय विद्यार्थी संगठन ऐसे तमाम तरह की गतिविधियों का आयोजन करते हैं जिससे कि विद्यार्थी एक-दूसरे से मेलजोल कर सकें और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले सकें। हर संगठन तय करता है कि उन्हें कौनसे त्यौहार मनाने हैं, लेकिन दीवाली और होली तो होते ही हैं। इसके अलावा कुछ संगठन साल के आखिरी कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। जैसे कि ऑस्टिन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस की इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन दक्षिण एशियाई छात्रों की प्रतिभा को सामने लाने के लिए ताल नाम का एक कार्यक्रम आयोजित करती है जबकि मिशिगन स्टेट यूनीवर्सिटी में वार्षिक नाट्य कार्यक्रम सरगम का आयोजन किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही आयोजन अपने समुदाय में बड़े कार्यक्रम बन चुके हैं।

कौड़ा का कहना है, ‘‘स्टूडेंट्स इंडिया एसोसिएशन साथी भारतीयों में मजबूत सामुदायिक रिश्ते का लक्ष्य रखती है- ऐसा रिश्ता जो हमारे देश के मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं का गर्व के साथ प्रतिनिधित्व करता है। हम लोग सभी खास त्यौहारों जैसे कि होली, दीवाली, ईद, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे पर्वों को एकसाथ मनाते हैं। इन कार्यक्र्रमों में भारतीय और गैरभारतीय, सभी भाग लेते हैं। वर्ष 2015-16 एसआईए के लिए बहुत ही अच्छा रहा। इस वर्ष हमारे दीवाली आयोजन में सबसे ज्यादा करीब 900 लोगों ने हिस्सा लिया जो अब तक कभी नहीं हुआ था।’’

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में सक्रिय हिंदू स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के पास भी समृद्ध गतिविधियां हैं। एचएसओ के सह-अध्यक्ष सुब्रमणियम का कहना है, ‘‘संगठन साल भर में पांच पर्वों को मनाने के लिए विशेष रूप से सक्रिय रहता है जिसमें गांधी जयंती (न्यू यॉर्क शहर में इस दिन सामुदायिक सेवा का काम होता है), नवरात्रि, दिवाली, भारतीय शास्त्रीय कला को प्रदर्शित करने वाली क्लासिकल नाइट और होली।’’ वह कहते हैं, ‘‘इन कुछ कार्यक्रमों में हमने 500 लोगों से भी ज्यादा की उपस्थिति देखी है। हम साप्ताहिक तौर पर प्रार्थनासभा का भी आयोजन करते हैं जो हमारे संगठन की शुरुआत से हो रही है। इससे हमें कैंपस के भीतर ही अपने धर्म के पालन का मौका मिल जाता है।

भारतीय विद्यार्थी संगठनों की योजना कैंपस के और ज्यादा विद्यार्थियों तक अपनी पहुंच जारी रखने, अपने वार्षिक कैलेंडर में और ज्यादा कार्यक्रमों को शामिल करने और कैंपस में मौजूद दूसरे विद्यार्थी संगठनों और समूहों के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की है।

सुब्रमणियम का कहना है, ‘‘अगले साल हमारी योजना इन कार्यक्रमों को परंपरा के अनुरूप आयोजित करने की है। इसके अलावा कैंपस में मौजूद मुस्लिम, ईसाई, सिख और यहूदी और अन्य समुदायों के साथ अंतर-धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है।’’

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक जीवन के चलते भावी विद्यार्थी इस बात के लिए आश्वस्त रह सकते हैं कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे और ज़्यादा भारतीय विद्यार्थियों से मिल पाएंगे जिनके साथ वे सामाजिक मेलजोल बढ़ा सकते हैं।

नतासा मिलास स्वतंत्र लेखिका हैं। वह न्यू यॉर्क सिटी में रहती हैं।

साभार-https://span.state.gov/

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