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वकील से उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बनने वाली इंदु मल्होत्रा कौन है

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने मोदी सरकार से उत्तराखंड के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसफ और सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की है. सूत्रों के मुताबिक कॉलेजियम द्वारा गुरुवार को कानून मंत्रालय के पास नाम की सिफारिश भेजी गई है. मोदी सरकार अगर इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे देती है तो इंदू मल्होत्रा आजादी के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज बनने वाली देश की सातवीं महिला होंगी. इसके अलावा इंदू देश की पहली महिला वकील भी होंगी जो सर्वोच्च न्यायालय में सीधे जज बनेंगी. अब सवाल उठता है कि ये इंदू मल्होत्रा कौन हैं… तो हम आपको बता रहे हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट की एक सीनियर वकील हैं जो पिछले तीन दशकों से वकालत कर रही हैं.

आपको बता दें कि इंदू 2007 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ वकील नामित की जाने वाली दूसरी महिला थीं. इंदू मध्यस्थता कानून में विशेषज्ञ हैं. वे विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मामलों में मध्यस्थता करती दिखाई भी दी हैं. उनकी इसी काबिलियत को ध्यान में रखते हुए दिसंबर 2016 में भारत सरकार ने भारत में मध्यस्थता तंत्र के संस्थानीकरण की समीक्षा करने के लिए उन्हें कानून और न्याय मंत्रालय में उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) का सदस्य बनाया था.

इंदू मल्होत्रा का जन्म 1956 में बेंगलुरु में सीनियर एडवोकेट स्वर्गीय ओम प्रकाश मल्होत्रा के घर हुआ था. ओम प्रकाश मल्होत्रा ​​सर्वोच्च न्यायालय में एक वरिष्ठ अधिवक्ता थे. इंदू के पिता एक विशिष्ट लेखक भी थे जिन्होंने औद्योगिक विवादों के कानून पर किताब लिखी थी. उनकी इस टिप्पणी के छह संस्करण प्रकाशित किए गए थे जिसकी जमकर प्रशंसा भी हुई थी. अपने बाद के वर्षों के दौरान उन्होंने कानून और प्रैक्टिस ऑफ आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिशन पर एक टिप्पणी की, और उस किताब के दो संस्करण निकले.

इंदु मल्होत्रा ​​ओम प्रकाश मल्होत्रा ​​की सबसे छोटी संतान हैं. उन्होंने कार्मल कॉन्वेंट स्कूल, नई दिल्ली से अपनी शुरुआती पढ़ाई की है. अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लेडी श्री राम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में बीए ऑनर्स और बाद में वहीं से राजनीति विज्ञान में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की. अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने डीयू के मिरांडा हाउस कॉलेज और विवेकानंद कॉलेज में में राजनीति विज्ञान के लेक्चरर के रूप में भी काम किया. 1979 से 1982 की अवधि के दौरान उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की.

इंदू मल्होत्रा ने एलएलबी करने के बाद 1983 में वकालत शुरू की और दिल्ली के बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया. 1988 में, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ‘एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड’ के रूप में क्वालिफाई किया, और परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया. इसके लिए उन्हें कानून दिवस पर मुकेश गोस्वामी मेमोरियल प्राइज से सम्मानित किया गया.

सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल जस्टिस आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट की इकलौती महिला जज हैं. आपको बता दें कि जस्टिस एम. फातिमा बीवी 1989 में सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनी थीं. उनके बाद जस्टिस सुजाता वी. मनोहर, जस्टिस रुमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई भी सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं थीं.

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