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फर्जी खबरों का चीर-फाड़ करने वाली वेबसाईटों में किसका पैसा लगा है

फेक न्यूज पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी के गाइडलाइन्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पलट देने के बाद से इस पर देश में राजनीति जारी है। इस बीच यह खुलासा हुआ है कि एंटी फेक न्यूज चलाने वाली कंपनियों में हाई प्रोफाइल लोगों के पैसे लगे हुए हैं। एंटी फेक न्यूज ब्रॉडकास्टिंग में लगे तीन बड़े नाम ‘ऑपइंडिया’, ‘अल्ट न्यूज’ और ‘बूम लाइव’ में जानी-मानी सेलिब्रिटीज और उद्योगपतियों के पैसे लगे हैं। रैडिफ डॉट कॉम के मुताबिक मशहूर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय का जिंदाबाद ट्रस्ट अल्ट न्यूज को डोनेशन दे रहा है जबकि मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के चेयरमैन टीवी मोहनदास पाई और इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने ऑपइंडिया को पैसे दिए हैं।

अल्ट न्यूज को अल्ट लेफ्ट द्वारा संचालित किया जाता है। यह आम लोगों से 9 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का साधारण डोनेशन भी लेता है। इसके संस्थापक प्रतीक सिन्हा का कहना है कि वेब पोर्टल की स्थापना लाभ कमाने के मकसद से नहीं की गई है। उन्होंने बताया है कि वो लेफ्ट ओरियंटेड हैं लेकिन किसी खास पार्टी से न तो कोई लगाव है और न ही किसी का समर्थन करते हैं। उन्होंने लिखित रूप में जिंदाबाद ट्रस्ट से डोनेशन मिलने की बात कबूल की है। इस ट्रस्ट की स्थापना अरुंधति रॉय ने साल 1997 में बुकर प्राइस में मिले पैसे से की थी। हालांकि, यह नहीं पता चल सका है कि ट्रस्ट ने अल्ट न्यूज को पैसे कब दिए थे। सिन्हा के मुताबिक, अल्ट न्यूज बहुत ही उम्दा कार्य कर रहा है और राजनीतिक प्रपंचों को खबर बनाकर पेश करने की मुहिम को कड़ी टक्कर दे रहा है।

सिन्हा वियतनाम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे लेकिन इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में दूसरी चार्जशीट दायर होने के बाद स्वदेश लौटकर उन्होंने ‘ट्रूथ ऑफ गुजरात’ नाम का एक वेब पोर्टल लॉन्च किया था। सिन्हा के पिता मुकुल सिन्हा गुजरात दंगों के वकील थे, इसलिए उनके पास पर्याप्त जानकारी थी जिसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता था। सिन्हा कहते हैं कि टीवी चैनलों पर अक्सर बिना क्रॉस चेकिंग के गलत और अधूरी सूचनाएं दी जाती हैं, इसलिए वहां सबसे ज्यादा फेक न्यूज की आशंका रहती है।

साल 2016-17 में इस कंपनी का कुल राजस्व 77 लाख रुपये (7.7 मिलियन) था। इनमें से 35 लाख रुपये विज्ञापनों से और करीब 23 लाख रुपये सब्सक्रिप्शन से हासिल हुए थे। कंपनी ने फ्रीलांस राइटर्स को 2016-17 में करीब 12 लाख रुपये का भुगतान किया था। शर्मा ने अपने को न्यूट्रल कहने से इनकार किया और बताया कि ऑपइंडिया विचारधारा के तौर पर राइटिस्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश फेक न्यूज की सूचनाएं राजनीतिक दलों या उनसे संबद्ध लोगों द्वारा फैलाई जाती हैं।

बूम लाइव के प्रोमोटर गोविंदराज इथीराज हैं। वो इस तरह के बिजनेस में नए नहीं हैं। ‘इंडिया स्पेंड’ और ‘फैक्ट चेकर’ जैसी वेबसाइट के मास्टरमाइंड्स में भी शामिल हैं। इथीराज एक बिजनेस जर्नलिस्ट रहे हैं, इसलिए आंकड़ों की बाजीगरी कर बनाई गई खबरों की अहमियत समझते हैं। इन्होंने इसकी शुरुआत 2016 में ही की थी। 2015-16 में इनकी कंपनी का टर्नओवर 27.8 करोड़ रुपये (278 मिलियन) था जो अगले साल 2016-17 में करीब 153 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 43.9 करोड़ रुपये (439 मिलियन) हो गए। इथीराज बताते हैं कि फेक न्यूज से जुड़ी अधिकांश बातें बीजेपी और उनसे जुड़े लोगों की तरफ से फैलाई जाती हैं। उनके मुताबिक कांग्रेस की तरफ से इतनी गति में फेक न्यूज नहीं फैलाया जाता है। इथीराज के मुताबिक वो किसी भी फेक न्यूज की खिलाफत बिना किसी राजनीतिक दुर्भावना के अपने को सेंटर में रखकर करते हैं। उन्होंने कहा कि बूम लाइव का किसी भी राजनीतिक दल से कोई सरोकार नहीं है।

साभार-https://www.jansatta.com/ से



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