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ये सरकार अँग्रेजी की इतनी गुलाम क्यों है

महोदय,

भारतीय डाक भुगतान बैंक की वेबसाइट https://ippbonline.com और मोबाइल एप्लीकेशन केवल अंग्रेजी में बनाये गए हैं और बैंक की हिंदी वेबसाइट के नाम पर केवल मुखपृष्ठ ही हिंदी में है अन्य सभी टैब में जानकारी केवल अंग्रेजी में डाली गई है. बैंक की सभी ऑनलाइन सेवाएँ और ऑनलाइन फॉर्म भी केवल अंग्रेजी में बनाए गए है, उसमें नाम-पता आदि हिंदी में लिखने पर जानबूझकर प्रतिबन्ध लगाया है ताकि अंग्रेजी न जानने वाले देश के करोड़ों नागरिकइस वेबसाइट और ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल ना कर सकें और इसके लिए वे किसी एजेंट/बैंक अधिकारी अथवा बिचौलिए पर आश्रित रहें.

यह अंग्रेजी न जानने वाले करोड़ों ग्राहकों के साथ धोखा है क्योंकि जो ग्राहक अंग्रेजी नहीं जानते हैं और फिर भी उन्हें बैंक सेवाएँ सिर्फ अंग्रेजी में बेची जाएंगी, उन्हें बहलाया फुसलाया जाएगा, एजेंट अथवा बैंक अधिकारी कहेगा, फॉर्म/दस्तावेज अंग्रेजी में होने से कुछ नहीं होता है हम तुम्हे सबकुछ समझा देंगे और तुम्हारा फॉर्म भी भर देंगे अथवा फॉर्म किसी और से भरवा लो पर खाता जरूर खोलो.

एजेंट/बैंक के अधिकारी आसानी से अंग्रेजी न जानने वाले ग्राहकों के साथ सेवाओं के नाम पर धोखाधड़ी कर सकेंगे और उन्हें गुमराह करके बैंक में खाते खुलावएंगे और जब ग्राहक कोई शिकायत करेगा तब उस एजेंट अथवा अधिकारी का जवाब होगा कि आपने खुद आवेदन/फॉर्म पर हस्ताक्षर किए थे, आपने हमारी शर्तों को स्वीकार किया था. अंग्रेजी भाषा आम जनता के शोषण एक आसान साधन है.

भारत के महामहिम राष्ट्रपति जी के २ जुलाई २००८ के आदेश के अनुसार भारतीय डाक भुगतान बैंक की 100% वेबसाइट https://ippbonline.com, नेट बैंकिंग एवं ऑनलाइन सेवाएँ तथा 100% मोबाइल एप्लीकेशन अविलम्ब भारत की राजभाषा में तथा सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करवाइए.

ठोस कार्यवाही अपेक्षित है.

प्रवीण कुमार जैन ,
कम्पनी सचिव,
Company Secretary,
वाशी, नवी मुम्बई – ४००७०३, भारत
Vashi, Navi Mumbai – 400703, Bharat



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