Friday, June 14, 2024
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वाई फाई की खोज की थी खूबसूरत अभिनेत्री हेडी लामार ने

ऑक्‍सीजन, भोजन, पानी और कपड़ा. जीवन के एकदम बुनियादी जरूरतें, जिसके बिना जीवन मुमकिन नहीं. क्‍या इसके अलावा भी कुछ है, जिसके बिना अब रहना तकरीबन नामुमकिन है.

साल 2010 में फिनलैंड एक नया कानून लेकर आया, जिसे तब लोगों ने थोड़े मजाक और थोड़े शुबहा के साथ देखा था. राइट टू फूड, राइट टू एजूकेशन और राइट टू लाइफ की तरह राइट टू वाई-फाई. फिनलैंड ने फाई-फाई इंटरनेट कनेक्‍शन को अपने नागरिकों के बुनियादी अधिकारों में शुमार किया. उसके बाद स्‍वीडन में भी यही कहानी दोहराई गई.

तो जनाब वाई-फाई ही वो चीज है, जो जीवन में रोटी, कपड़ा के बाद सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. एक दिन इंटरनेट बंद हो जाए तो जिंदगी के सारे काम रुक जाते हैं.

अगर आपकी जिंदगी में भी वाई-फाई की उतनी अहमियत है, जितनी मछली के लिए पानी की तो पता है, इस आविष्‍कार के लिए आपको किसका शुक्रगुजार होना चाहिए?

हेडी लामार का. एक बला की खूबसूरत ऐतिहासिक शख्सियत, जो अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री भी थीं.

आज वाई-फाई, ब्‍लू टूथ आदि में जिस तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाता है, उसकी खोज हेडी लामार ने की थी. यह एक तरह का गाइडेंस सिस्टम था, जिसकी मदद से अपने टॉरपीडो और रेडियो फ्रीक्‍वेंसी को जाम होने से रोका जा सकता था. दुश्‍मन देश अकसर मित्र देशों के रेडियो मैसेजेज और टारपीडो को जाम कर देते थे. लेकिन इस तकनीक ने उसका तोड़ निकाल लिया था.

यही तकनीक आगे चलकर वाई-फाई के रूप में विकसित हुई.

अभिनेत्री से आविष्‍कारक का हेडी का सफर
हेडी का जन्‍म 9 नवंबर, 1914 को ऑस्ट्रिया के वियना में हुआ था. वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं. पिता एक बड़े अधिकारी और मां पियानिस्‍ट थीं. उनके पिता यहूदी और मां ईसाई थी. हेडी की परवरिश एक कुलीन, समृद्ध और प्रगतिशील घर में हुई, जहां शुरू से ही किताबों और संगीत का माहौल था.

बहुत कम उम्र से ही वह थिएटर और फिल्‍मों में काम करने लगी थीं. 12 साल की उम्र में तो उन्‍होंने वियना में एक ब्‍यूटी कॉन्‍स्‍टेस्‍ट जीत लिया था. खूबसूरत दिखने और अभिनय करने के साथ हेडी की रुचि विज्ञान और टेक्‍नोलॉजी में भी थी.

बचपन से ही, जब वह अपने पिता के साथ लंबी सैर पर जाती थीं, जो पिता टेक्‍नोलॉजी और विज्ञान की ढेर सारी कहानिया सुनाते थे. हेडी के लिए सिर्फ इतना जानना काफी नहीं था कि ये बल्‍ब है, जो बिजली से जलता है. या ये रेडियो है, जिसमें आवाजें आती हैं. उनके सवाल होते कि बल्‍ब जलता कैसे है, बिजली कहां से आती है, बिजली कैसे बनती है. क्‍या इस रेडियो के अंदर घुसकर लोग बैठे हुए हैं. इसमें से आवाज कैसे आ रही है. अगर कोई सैकड़ों मील दूर कहीं और बैठकर बोल रहा है तो वो आवाज इस डिब्‍बे से कैसे आ रही है.

पिता बड़े धैर्य से हेडी के इन सारे सवालों का जवाब देते. पिता ने अपनी नन्‍ही बिटिया को कुछ इस तरह पाला कि वह बड़ी होकर एक आजादख्‍याल, उन्‍मुक्‍त और तार्किक स्‍त्री बने.

हेडी हर गलत बात का विरोध करने वाली, अपने मन की सुनने वाली, डूबकर प्रेम करने वाली और प्रेम से भी ऊपर अपनी आजादी को चुनने वाली एक स्‍त्री थी. हेडी के पहले पति एक अपने जमाने के एक अमीर उद्योगपति थे. ये शादी ज्‍यादा चली नहीं, क्‍योंकि शादी के बाद हेडी को पता चला कि उसके पति के नाजियों के साथ नजदीकी रिश्‍ते हैं. वह नाजियों को अपने घर की आलीशान दावतों में बुलाने लगा. हेडी भागकर पेरिस चली गई और फिर वहां से लंदन.

लंदन में हेडी की मुलाकात लुइस बी. मेयर से हुई. यह वही लुइस थे, जो प्रसिद्ध मेट्रो गोल्‍डवियन मियर स्टूडियो के प्रमुख थे. लुइस ने हेडी को हॉलीवुड बुला भेजा. यहीं से हेडी के हॉलीवुड कॅरियर की शुरुआत हुई. उन्‍होंने अपने समय की कई महत्‍वपूर्ण फिल्‍मों में अभिनय किया और बतौर अभिनेत्री खूब दौलत और शोहरत दोनों कमाई.

दूसरे विश्‍व युद्ध के समय हेडी हेडी उन मित्र देशों के साथ थीं, जो जर्मनी के खिलाफ लड़ रहे थे. इसी दौरान उन्‍हें पता चला कि मित्र देश एक रेडियो कंट्रोल्‍ड टारपीडो का इस्‍तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उसके साथ सबसे बड़ा खतरा ये था कि वो अकसर दुश्‍मन देशों के हाथ लग जाता. वे उसकी फ्रीक्‍वेंसी को हैक कर दूसरे की बातें सुन लेते या उसे जैम करके मैसेज को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने से रोक सकते थे.

तभी हेडी के दिमाग में एक आइडिया आया. ये आइडिया उन्‍होंने अपने मित्र कंपोजर और पियानिस्‍ट मित्र जॉर्ज एंथील के साथ साझा किया. आइडिया ये था कि अगर एक फ्रीक्‍वेंसी हॉपिंग सिगनल बनाया जाए तो शायद वह संभवत: टारपीडो के रेडियो गाइडेंस सिस्‍टम का बचाव कर सकता है.

उसके बाद दोनों ने मिलकर एक फ्रीक्‍वेंसी हॉपिंग सिगनल विकसित किया, जिसकी मदद से मित्र देशों के टारपीडो बिना जाम में फंसे या ट्रैक हुए आसानी से जा सकते थे.

आगे चलकर हेडी लामार और जॉर्ज की विकसित की गई इसी तकनीक का इस्‍तेमाल कर ब्‍लू टूथ या वाई-फाई जैसी टेक्‍नोलॉजी को विकसित किया गया. लेकिन इस दिशा में पहला कदम रखने का श्रेय हेडी लामार को जाता है.

साभार https://yourstory.com/hindi से

 

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