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नीरा राडिया द्वारा गबन किये गए पैसे वापस आएँगे?

दिल्ली पुलिस ने बिचौलिया नीरा राडिया के खिलाफ धोखाधड़ी और धन ऐंठने का मामला दर्ज किया, जिसमें यस बैंक और डीएचएफएल से 650 करोड़ रुपये की ऋण धोखाधड़ी भी शामिल है

क्या धोखा खाने वाले को त्वरित न्याय मिलेगा और नीरा राडिया द्वारा गबन किये गए उनके पैसे वापस किये जाएंगे?

नीरा राडिया को यस बैंक और डीएचएफएल के साथ बैंक ऋण धोखाधड़ी के लिए पकड़ा गया!

विवादास्पद बिचौलिया नीरा राडिया डीएचएफएल से जुड़े यस बैंक के 650 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी के लिए फिर से चर्चा में है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने राडिया और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक डॉक्टर की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है जो पहले उनके अस्पताल परियोजना का हिस्सा थे। डॉ. राजीव कुमार शर्मा को आरोपी द्वारा धोखा दिया गया, और उन्हें धमकी भी दी गयी। नीरा राडिया के अलावा, दिल्ली पुलिस ईओडब्ल्यू ने नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (नीरा राडिया द्वारा नियंत्रित एक कंपनी), उनकी बहन करुणा मेनन और उनके लंबे समय के सहयोगियों सतीश कुमार नरुला और यतीश वहाल को ठगी, आपराधिक विश्वासघात, खातों में हेराफेरी, धोखाधड़ी, जालसाजी, धन का गबन, जाली दस्तावेजों का निर्माण और उपयोग, आपराधिक धमकी, आपराधिक साजिश, और अन्य आरोपों के लिए आरोपित किया है।

14-पृष्ठों की प्राथमिकी (एफआईआर) में बताया गया है कि कैसे नीरा राडिया और अन्य आरोपियों ने अपनी कंपनियों और अपने अस्पताल के उपक्रम नयति हेल्थकेयर के माध्यम से डीएचएफएल के विवादास्पद कपिल वाधवान (पहले से ही यस बैंक धोखाधड़ी के आरोप में जेल में) से लगभग 150 करोड़ रुपये का धन लिया और बाद में वधावन को पैसा लौटाने के लिए यस बैंक से 650 करोड़ रुपये का ऋण लिया[1]। ऋण गुरुग्राम में अस्पताल के निर्माण के लिए लिये गए थे और शिकायत में कहा गया है कि पहले से ही बैंकों से बहुत सारे ऋण ले लिए गए थे और ऋण राशि को राडिया और सहयोगियों द्वारा कई जगह बाँट दिया गया था।

दिल्ली पुलिस ईओडब्ल्यू की 14-पृष्ठों की एफआईआर में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोपों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भी नीरा राडिया के खिलाफ मामला दर्ज करने की उम्मीद है।

याचिकाकर्ता डॉक्टर जो वीआईएमएचएएनएस (विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, न्यूरो एंड अलाइड साइंसेज) में काम करते हैं, उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उनके शेयर भी आरोपी राडिया द्वारा गुप्त रूप से कम किए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके अलावा कई और डॉक्टरों को भी राडिया और सहयोगियों द्वारा उनका भुगतान न करके धोखा दिया गया था। इन सभी को आरोपियों ने धमकाया, जिसमें शारीरिक क्षति और फर्जी शिकायतो की धमकी शामिल थीं।

नीरा राडिया 2010 में 2जी घोटाले से संबंधित टेप बातचीत में पकड़े जाने के बाद कुछ समय के लिए चुप रही, अपनी बिचौलिया कंपनियों को बंद कर रही थीं[2]। उनका मुख्य ग्राहक कोई और नहीं बल्कि रतन टाटा थे। 2013 के अंत तक राडिया ने एक अस्पताल श्रृंखला व्यवसाय शुरू किया, और उनके अस्पताल का उद्घाटन रतन टाटा ने किया था। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को लीक हुई बातचीत में पकड़ी गयीं सांठगांठ की 12 विशिष्ट घटनाओं की जांच करने का आदेश दिया, लेकिन 2015 में, सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय को यह सूचित करते हुए मामले को कमजोर कर दिया कि वार्तालाप प्रकृति में आपराधिक नहीं थे।

अब राडिया फिर से यस बैंक और डीएचएफएल से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़ी गतिविधियों में फंस गयी हैं, वे पहले से ही सीबीआई और ईडी द्वारा जांच जाँच के दायरे में हैं। दिल्ली पुलिस ईओडब्ल्यू की 14-पृष्ठों की एफआईआर में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोपों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भी नीरा राडिया के खिलाफ मामला दर्ज करने की उम्मीद है।

साभार – https://hindi.pgurus.com/ से

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