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पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के निधन से आंचलिक साहित्य और पत्रकारिता के एक सुनहरे युग का अंत : डाॅ. रमन सिंह

रायपुर। मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कवि, साहित्यकार और पत्रकार पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। भारत सरकार से पद्मश्री सम्मानित और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष श्री चतुर्वेदी का आज सवेरे अपने गृह नगर बिलासपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर में जारी शोक संदेश मे कहा है कि लोकप्रिय साहित्यकार पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के निधन से छत्तीसगढ़ में साहित्य और पत्रकारिता के एक सुनहरे युग का अंत हो गया। मुख्यमंत्री आज सवेरे नई दिल्ली में थे। उन्होंने पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के निधन की सूचना मिलते ही टेलीफोन पर उनके सुपुत्र और बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री सूर्यकांत चतुर्वेदी से सम्पर्क किया और अपनी संवेदना प्रकट की।

मुख्यमंत्री ने रायपुर में जारी शोक संदेश में कहा-पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ी और हिन्दी भाषाओं के विद्वान लेखक, चिन्तक और संवेदनशील कवि थे, जिन्होंने लगभग सात दशकों तक अपनी रचनाओं से प्रदेश के लोक साहित्य और यहां की लोक संस्कृति के विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया। डाॅ. रमन सिंह ने कहा- छत्तीसगढ़ के साहित्यिक और सांस्कृतिक इतिहास में पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के इस महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। डाॅ. रमन सिंह ने उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। ज्ञातव्य है कि पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी को साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2004 में राज्य स्थापना दिवस ’राज्योत्सव’ के अवसर पर राजधानी रायपुर में पंडित सुन्दरलाल शर्मा राज्य अलंकरण से सम्मानित किया गया था। उन्हें और वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय लाला जगदलपुरी को संयुक्त रूप से यह सम्मान प्रदान किया गया था। पंडित चतुर्वेदी को इस वर्ष 03 अप्रैल को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अलंकरण से भी सम्मानित किया गया था।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में 02 अप्रैल 2018 को राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित समारोह में पंडित चतुर्वेदी को पद्मश्री अलंकरण से नवाजा था। पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी का जन्म 20 फरवरी 1926 को तत्कालीन बिलासपुर जिले के अकलतरा के पास ग्राम कोटमी सोनार में हुआ था। वह कोटमी सोनार ग्राम पंचायत के सरपंच भी रह चुके थे। उन्होंने लम्बे समय तक कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के बिलासपुर जिला संवाददाता के रूप में भी काम किया।

पंडित चतुर्वेदी ने सरपंच के रूप में अपनी ग्राम पंचायत में जन सहयोग से शराब बंदी सहित विकास के कई प्रमुख कार्य सफलता पूर्वक सम्पादित किए थे। इसके फलस्वरूप उनकी ग्राम पंचायत को राज्य शासन द्वारा तत्कालीन अविभाजित बिलासपुर जिले सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत घोषित किया गया था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने 13 वर्ष की उम्र से ही खादी पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने स्वाध्याय से एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। स्वर्गीय पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ की आंचलिक पत्रकारिता में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह ’भोलवा भोलाराम बनिस’ और कविता संग्रह ’पर्रा भर लाई’ को छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य एवं लोक कला मंच भाटापारा द्वारा प्रदत्त ’हरिठाकुर सम्मान’ वर्ष 2003 में सृजन सम्मान संस्था रायपुर द्वारा ’हिन्दी गौरव सम्मान’ सहित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की संस्था बख्शी सृजन पीठ द्वारा प्रदत्त ’साधना सम्मान’ भी शामिल है।



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