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सउदी अरब में महिला ड्रायवरः हजारों भारतीयों की नौकरी पर ख़तरा

सऊदी अरब में महिलाओं को कार चलाने का अधिकार दिए जाने के बाद वहां मौज़ूद क़रीब 14 लाख ड्राइवरों/शोफरों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट आ गया है. इनमें भी अधिकांश तादाद भारतीयों की है.

जेद्दाह से प्रकाशित अख़बार मलयालम न्यूज़ के समाचार संपादक रहे हसन कोया ने द हिंदू को बताया, ‘सऊदी अरब में चूंकि अब तक महिलाओं को कार चलाने का अधिकार नहीं था. दूसरी तरफ सार्वजनिक परिवहन की स्थिति भी यहां ख़राब है. इसलिए बड़े पैमानों पर लोग ड्राइवरों को नौकरी पर रखते हैं. या फिर किराए की टैक्सियों से यात्रा करते हैं. ख़ास तौर पर लड़कियां/महिलाएं घर से बाहर स्कूल, कॉलेज, शॉपिंग मॉल, दफ्तर जैसी जगहों पर आने-जाने के लिए पूरी तरह इन्हीं पर निर्भर हैं. लेकिन अब जब वे ख़ुद कार चलाने लगेंगी तो ज़ाहिर तौर पर स्थिति बदलेगी.’

सऊदी अरब की प्रवासी संयोजन समिति (पीसीसी) के अध्यक्ष अट्‌टकोया पल्लिकेंडी भी यही मानते हैं. उनका कहना है, ‘सऊदी महिलाओं को कार चलाने का अधिकार मिलना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है. लेकिन प्रवासियों के पहलू से देखें तो यह उनके लिए बड़ा झटका है.’ वे बताते हैं, ‘सऊदी अरब में ज्यादातर परिवार भारतीयों और ख़ासतौर पर केरल के रहने वालों को ड्राइवर के तौर पर रखना पसंद करते हैं क्योंकि वे भरोसेमंद और काम पर रखने के लायक होते हैं. ऐसे में इस फैसले के बाद रोज़ी-रोटी का संकट सबसे ज़्यादा इसी समुदाय के सामने आने वाला है.’

इसके अलावा एक और तथ्य है.ख़बर के मुताबिक सऊदी अरब में पढ़ी-लिखी महिलाओं की तादाद काफी ज़्यादा है और वे तेजी से आला दर्ज़े की नौकरियां भी हासिल कर रही हैं. उनके लिए ज़्यादा मुफीद स्थिति यही होगी कि वे ख़ुद कार चलाकर दफ्तर जाएं. इस वज़ह से भी प्रवासी ड्राइवरों की नौकरी पर संकट आसन्न माना जा रहा है.

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