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डॉ.चन्द्रकुमार जैन करेंगे विश्व हिन्दी सम्मेलन में भागीदारी

राजनांदगाँव। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में, भोपाल के लाल परेड मैदान में 10 से 12 सितम्बर तक होने जा रहे दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में, शहर के ख्याति प्राप्त वक्ता, साहित्यकार और शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के राष्ट्रपति सम्मानित प्राध्यापक डॉ.चन्द्रकुमार जैन आधिकारिक सहभागिता करेंगे। इसके साथ ही संस्कारधानी के साहित्यिक-सांस्कृतिक गौरव में चार चाँद लगाते हुए डॉ.जैन सम्मेलन के केन्द्रीय विषय ‘हिंदी जगत-विस्तार और सम्भावनाएँ’ के विविध आयामों पर अपनी रचनात्मक भागीदारी के अलावा हिन्दी पत्रकारिता की भाषा पर अपना विशिष्ट आलेख भी प्रस्तुत करेंगे। यह अद्वितीय अवसर है कि विश्व हिन्दी सम्मेलन के ऐतिहासिक आयोजन में राजनांदगांव जिले का प्रतिनिधित्व, शहर को विशिष्ट पहचान देने वाले डॉ.चन्द्रकुमार जैन के माध्यम से किया जा रहा है। सम्मेलन में 39 देशों से विद्वान भी शिरकत करेंगे। इनका चुनाव हिंदी के विकास में उनके योगदान को देख कर किया गया है।

गौरतलब है कि इस तीन दिवसीय हिन्दी विश्व महाकुम्भ का औपचारिक शुभारम्भ भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी करेंगे। सम्मेलन का आयोजन माननीय विदेश एवं प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज की अध्यक्षता में किया जा रहा है। मध्य प्रदेश राज्य सरकार सम्मेलन की स्थानीय आयोजक है और माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सम्‍मेलन के मुख्य संरक्षक हैं। भोपाल स्‍थित माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्‍वविद्यालय सम्‍मेलन की सहभागी संस्थाएं हैं। माननीय केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और विशिष्‍ट अतिथि के रूप में श्री अमिताभ बच्‍चन अच्छी हिन्दी बोलने की कला पर अपना वक्तव्य देंगे।

शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह ने इस गौरवशाली प्रसंग पर सगर्व प्रसन्नता व्यक्त की है। प्राचार्य डॉ.सिंह तथा हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो चन्द्रज्योति श्रीवास्तव सहित समस्त महाविद्यालय परिवार, गणमान्य जन, हिन्दी भाषा व साहित्य सेवी मित्रों ने डॉ.चन्द्रकुमार जैन को शुभकामनाएं दी हैं। आधिकारिक जानकारी के हवाले से डॉ.जैन ने बताया कि 1983 के बाद लगभग 32 वर्षो के अंतराल पर भारत में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। विश्व हिंदी सम्मेलनों की परंपरा 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन से शुरू हुई। तब से इन सम्मेलनों ने एक वैश्विक स्वरूप और गति प्राप्त कर ली है। क्रमानुसार, नौ सम्मेलन विश्व के विभिन्न देशों में आयोजित किए जा चुके हैं जिसमें मॉरीशस (पोर्ट लुई) में दो बार, भारत में नागपुर और नई दिल्‍ली में और पोर्ट ऑफ स्पेन (ट्रिनिडाड एण्‍ड टोबेगो), लंदन (यू. के.), पारामारीबो (सूरीनाम), न्यूयार्क (अमेरिका) तथा जोहांसबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में एक-एक बार आयोजन किया गया है। इन सम्मेलनों ने हमेशा से ही हिंदी स्नेही व्यक्तियों और प्रख्यात विद्वानों को आकर्षित किया है।

डॉ.जैन विश्व हिन्दी सम्मेलन भागीदारी को सौभाग्य का विषय मानते हैं। ज्ञातव्य है अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े डॉ.चन्द्रकुमार जैन अपनी लेखनी और वाणी के माध्यम से विगत तीन दशक से हिन्दी में अभिव्यक्ति की क्षमता का निरंतर प्रभावी परिचय देते रहे हैं। हिन्दी के साथ अंग्रेजी, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र और लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर तथा विधि की उपाधि प्राप्त डॉ.जैन अनेक विषयों के संसाधन पुरुष माने जाते हैं। वे अपनी भाषायी दक्षता का लाभ अपने विद्यार्थियों व समाज को प्रभावशाली अंदाज़ में लगातार प्रदान कर रहे हैं।

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