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राजभाषा में उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक द्वारा विभिन्‍न पुरस्‍कारों का वितरण

मुंबई। पश्चिम रेलवे की क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति की राजभाषा बैठक 23 सितम्‍बर, 2021 को पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री आलोक कंसल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। राजभाषा बैठक में श्री कंसल ने समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में अनेक भाषाएं प्रचलित हैं, परन्तु हिंदी का एक विशिष्ट स्थान है, क्योंकि इस भाषा का आम जनता अत्यधिक प्रयोग करती है। हिंदी के गुणों को ध्यान में रखते हुए ही इसे भारतीय संविधान में मान्यता दी गई है। आज हिंदी का प्रयोग साहित्य में ही नहीं, बल्कि विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, विधि, कृषि, इंजीनियरिंग तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी काफी बढ़ रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी के अभूतपूर्व विकास के परिणामस्वरूप विश्व में विभिन्न प्रगतिशील देशों की आपसी दूरियाँ भी कम हो गईं हैं। महाप्रबंधक ने कहा कि आजकल अधिकतर कार्य कम्प्यूटरों पर ही किए जा रहे हैं। इसलिए सभी कम्प्यूटरों में हिंदी में कार्य करने की सुविधा अवश्य होनी चाहिए। वेबसाइटों पर सभी प्रकार की जानकारियां अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी के सरल और प्रचलित शब्दों में उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हिंदी में विदेशी भाषाओं के शब्दों को भी आत्मसात करने की शक्ति है। हिंदी शब्दावली के निर्माण के कार्य में भारत काफी आगे बढ़ चुका है। उन्‍होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भत्ता, भूलचूक, भुगतान, छूट, बकाया, पक्के नियम, कहा-सुनी, और अर्जी आदि ऐसे शब्द हैं, जिन्हें हिंदी की पारिभाषिक शब्दावली में शामिल कर लिया गया है।

राजभाषा बैठक के प्रारंभ में पश्चिम रेलवे के मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री सुरेन्‍द्र कुमार ने समिति के अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक, पश्चिम रेलवे के सभी विभागों के प्रमुखों, मंडल रेल प्रबंधकों, अपर मंडल रेल प्रबंधकों, सभी मुख्‍य कारखाना प्रबंधकों और अन्य वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि सरकारी कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाना एक राष्ट्रीय कार्य है, क्योंकि यह आम जनता की भाषा है। यह भाषा भिन्न- भिन्न प्रान्तों के लोगों के बीच सेतु बनकर भारत की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकारी कामकाज में हिंदी के सरल एवं प्रचलित शब्दों का प्रयोग करने से हमारे कार्यालयों में हिंदी को लागू करने में काफी आसानी होगी। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी कार्यालयों में हिंदी के आम बोल-चाल के सरल, सहज एवं प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया जाए।

पश्चिम रेलवे में अप्रैल से जून-2021 के दौरान राजभाषा कार्यान्वयन में हुई प्रगति संबंधी आंकड़े समिति के सदस्य सचिव डॉ सुशील कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत किये गये। उल्‍लेखनीय है कि पश्चिम रेलवे में राजभाषा का प्रचार-प्रसार करने के लिए 1 सितम्‍बर से 15 सितम्‍बर, 2021 तक आयोजित राजभाषा पखवाड़े के दौरान रखी गई हिंदी प्रतियोगिताओं में सफल 30 अधिकारियों तथा कर्मचारियों को महाप्रबंधक द्वारा नकद पुरस्‍कार राशि तथा योग्‍यता प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्‍मानित किया गया।

इन प्रतियोगिताओं के तहत प्रथम पुरस्‍कार हेतु 1200 रु., द्वितीय पुरस्‍कार हेतु 1000 रु., तृतीय पुरस्‍कार हेतु 800 रु. और दो प्रेरणा पुरस्‍कारों हेतु प्रत्‍येक के लिए 600 रु. की नकद पुरस्‍कार राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर पश्चिम रेलवे के सभी मंडलों, कारखानों और प्रधान कार्यालय के विभागों में कार्यरत उन 54 अधिकारियों/ कर्मचारियों को भी नकद पुरस्‍कार राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान करके ‘महाप्रबंधक राजभाषा पुरस्‍कार-2021’ से सम्‍मानित किया गया, जिन्‍होंने वित्‍त वर्ष 2020-21 के दौरान राजभाषा में उत्‍कृष्‍ट कार्य किया। इस अवसर पर पश्चिम रेलवे के राजभाषा विभाग की त्रैमासिक पत्रिका ई-राजहंस के नये अंक का विमोचन भी महाप्रबंधक द्वारा किया गया। पश्चिम रेलवे क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति की इस राजभाषा बैठक में पश्चिम रेलवे के अपर महाप्रबंधक के अलावा विभिन्‍न प्रधान विभागाध्‍यक्ष एवं अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे। अंत में पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी श्री अशोक कुमार लोंढे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह समारोह सम्‍पन्‍न हुआ।

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