Sunday, March 3, 2024
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Monthly Archives: June, 2023

आईआईएमसी बना देश का सर्वश्रेष्ठ मीडिया शिक्षण संस्थान

भारतीय जन संचार संस्थान सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में प्रमुख शिक्षण संस्थान है।

आपातकाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

आपातकाल से कांग्रेस को बहुत हानि हुई। जनता में सरकार की छवि धूमिल होने लगी तथा उसके प्रति आक्रोश बढ़ता गया। इसके दृष्टिगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग करके चुनाव करवाने की अनुशंसा कर दी।

बचपन बचाओ आंदोलन व एसएसबी ने नेपाल सीमा से शादी के लिए अगवा की गई नाबालिग को बचाया

नाबालिग की बड़ी बहन की शादी आरोपी से हुई थी। परंतु वह उसकी छोटी बहन से विवाह करना चाहता था और इसी इरादे से उसने एक अन्य अभियुक्त के साथ मिलकर नाबालिग का अपहरण कर लिया और उसे नेपाल ले जा रहा था।

700 साल पहले कैसा था भारत

इस पुस्तक में दी हुई इसकी अरबी भाषा की कविता तथा अन्य कवियों के यत्र तत्र उद्धृत एक-दो चरणों से प्रतीत होता है कि यह प्रकांड पंडित न था।

देवताओँ के वैद्य – अश्विनी कुमार

वेदों ने यहां तक कह दिया है कि प्राणायाम के द्वारा राजयक्ष्मा रोग तक नष्ट हो जाता है और जीवन लाभ होता है।

‘द सोर्स’ ने 12 प्रतिभाशाली फिल्म निदेशकों का बनाया समूह, तलाशेगा विविध कहानियां!

'द सोर्स' को बॉलीवुड के अलावा पत्रकारिता जगत की हस्तियों का भी साथ मिल रहा है। 'द सोर्स' के साथ ‘आजतक’, ‘एबीपी न्यूज़’, ‘IBN7’ और फिर ‘News18’ में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार अनुपम श्रीवास्तव भी जुड़े हैं।

प्रेम कथाओं का प्लैटर : आधा इश्क़

संग्रह की कुछ बॉलीवुड की याद भी दिलाती हैं। विशेषकर ‘आध्यात्मिक प्रेम’ पढ़कर दिलवाले दुल्हनियाँ सिनेमा का नायक याद आता है जो अपनी प्रियतमा को लेकर भागता नहीं, न ही चुपके से शादी करता है बल्कि पिता का दिल जीतता है।-

टेक्नो फ्रेंडली संवाद से स्वच्छता

कल्पना कीजिए कि मंडला से झाबुआ तक फैले मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बैठकर कैसे निगरानी की जा सकती है? कैसे उन स्थानों में कार्य कर रही नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगमों से संवाद बनाया जा सकता है?

हनुमान बाग अयोध्या में लगा हनुमानजी को छप्पन भोग

56 बारातियों के समलित होने के कारण ये नाम:-श्रीकृष्ण की बारात में बने थे 56 भोगभोग शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि जब भगवान बारात लेकर श्रीराधा रानी को ब्याहने बरसाना गए थे तो उऩकी बारात के स्वागत- सत्कार के लिए श्रीवृषभानजी की ओर से 56 भोग बनाए थे.

हिन्दी से हिंग्लिश का सफर

मध्यकाल में हिन्दी का स्वरूप स्पष्ट हो गया और उसकी प्रमुख बोलियों का विकास होने लगा था । इस अवधि के दौरान, भाषा के तीन रूप उभरे – ब्रजभाषा, अवधी और खड़ी बोली।
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