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वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास (4 खण्ड में)

श्री पुरुषोंत्तम नागेश ओक जी ने आज से लगभग 50 साल पहले वास्तविक इतिहास लिखने का कार्य शुरू किया था। यह कार्य अत्यंत कठिन था। संस्थाओं और व्यवस्था पर वामपंथी विचारधारा वाले लोगों का कब्जा था। श्री ओक ने सीमित संसाधनों में भी अप्रतिम कार्य किया। उनकी योग्यता और परिश्रम को पढ़ कर ही समझा जा सकता है।

वैदिक संस्कृति विश्व की प्राचीन संस्कृति है और इसका प्रभाव एक समय सारे विश्व पर था। इस बात के अनेकों प्रमाण हमें आज भी प्राप्त होते हैं। इनमें से कुछ बातों को हम आसानी से अनुभव कर सकते हैं और कुछ बातों के प्रमाणों के लिए अत्यधिक खोज और श्रम की आवश्यकता है। यदि हम विश्व की सभी संस्कृतियों का ऐतिहासिक और पुरातात्विक अध्ययन करें तो हमें ज्ञात होता है कि सम्पूर्ण विश्व में मात्र वैदिक संस्कृति और संस्कृत भाषा ही थी। इनमें से तो बोगाजकुई में तो साक्षात् अनेकों वैदिक संस्कृति के प्रमाण मिलें हैं तथा मनु की नाव से समानता प्राप्त कथाएँ कुरान और बाईबिल के अलावा, मिस्र के असुरबेनीपाल के पुस्तकालय से प्राप्त गिलमेश नामक कथा पुस्तक से भी मिली है। इसी तरह के अनेकों प्रमाण पुरुषोत्तम नागेश ओक जी ने अपने जीवनकाल में संकलित किये और उन्हें प्रस्तुत पुस्तक के रुप में हम सबके समक्ष प्रस्तुत किया है।

अनेकों समानताएं हम आपस में एक-दूसरे देशों में देख सकते हैं। इससे अनुमान होता है कि सभी राष्ट्रों में एक ही संस्कृति विद्यमान थी जो धीरे – धीरे ह्वास को प्राप्त होती गई थी।

लेखक – पुरुषोत्तम नागेश ओक
₹500 (डाक खर्च सहित)
कुल 1627 पृष्ठ (सभी 4 भाग में।)पेपरबैक
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