धर्मगुरू सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन की 10वीं बरसी मनाने के लिए मुंबई में लगभग एक लाख दाऊदी बोहरा एकत्र हुए

मुंबई:। भारत और विदेश से लगभग एक लाख दाऊदी बोहरा सदस्य दिवंगत सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन को उनकी 10वीं बरसी पर श्रद्धांजलि देने के लिए मुंबई में एकत्र हुए।

इस अवसर पर उनको याद करते हुए, 53 अल-दाई अल-मुतलक और विश्वव्यापी दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु परमपावन सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने भिंडी बाजार में नवनिर्मित सैफी मस्जिद में उपदेश दिया। अपने उपदेश में, सैयदना सैफुद्दीन ने अपने पिता सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन और अपने दादा सैयदना ताहेर सैफुद्दीन को और 100 वर्षों से अधिक समय तक समुदाय का मार्गदर्शन करने और मानवता की सेवा करने के उनके अथक प्रयासों को याद किया।

सैयदना सैफुद्दीन ने अपने उपदेश को पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) की शिक्षाओं पर केंद्रित किया, जिसमें जीवन में धैर्यवान और स्थिर रहकर चुनौतियों और प्रतिकूल परिस्थितियों पर काबू पाने के गुण की व्याख्या की गई थी। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया, विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने और समाज के विकास में योगदान देने के लिए धार्मिक और लौकिक शिक्षा को संतुलित करना।

मुंबई में धर्मोपदेश में भाग लेने के लिए नासिक से आईं अलिफिया जरीवाला ने कहा, “सैयदना के धर्मोपदेश से मुझे जो ख़ास सीख मिली, उनमें से एक समग्र शिक्षा प्राप्त करने और हमारे विश्वास के मूल्यों को बनाए रखते हुए उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का उनका संदेश है।समाज में अपनी भूमिका को समझना और सही संतुलन बनाना एक संपूर्ण जीवनशैली की कुंजी है।”

हजारों उपस्थित लोगों की मेजबानी के लिए की गई व्यवस्था पर बोलते हुए, मुंबई में दाऊदी बोहरा समुदाय के मामलों का प्रबंधन करने वाली संस्था अंजुमने शियाअली के सचिव मुस्तफा कांचवाला ने कहा: “दुनिया भर से लगभग एक लाख समुदाय के सदस्यों ने मुंबई में इस ऐतिहासिक अवसर पर भाग लिया। सैय्यदना मुफद्दल सैफुद्दीन द्वारा सैफी मस्जिद में दिए गए उपदेश का मुंबई और उपनगरों के 45 सामुदायिक केंद्रों में सीधा प्रसारण किया गया।

उन्होंने आगे कहा, “हम आयोजन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस सहित स्थानीय अधिकारियों के निरंतर समर्थन के लिए आभारी हैं।”

इस ऐतिहासिक अवसर पर अहमदाबाद के धंधुका से आए मुर्तजा कोठावाला ने कहा, “एक दशक बीत गया होगा, लेकिन सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन की यादें दिल और दिमाग में जीवित हैं और उनके मूल्य जीवन के सभी पहलुओं में हमारा मार्गदर्शन करते हैं।”

आधी सदी तक 52वें अल-दाई अल-मुतलक के रूप में सेवा करते हुए, सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने दुनिया भर में अनगिनत लोगों के दिलों को छुआ। उनके नेतृत्व को शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक कल्याण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता द्वारा चिह्नित किया गया था। अंतरधार्मिक संवाद और पर्यावरण प्रबंधन की उनकी वकालत ने एक सामंजस्यपूर्ण और टिकाऊ दुनिया के उनके दृष्टिकोण को उजागर किया। उनकी शिक्षाओं ने 21वीं सदी में एक पूर्ण और सार्थक जीवन जीने के साथ-साथ आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति सच्चे रहने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।