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महेश पंचोली में साहित्यकार ही नहीं कलाकार का दिल भी धड़कता है

हाड़ोती में कवि के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले महेश पंचोली न केवल एक साहित्यकार हैं वरन इनमें एक कलाकार और चित्रकार का दिल भी धड़कता है। खास बात यह है की इनके साथ-साथ इनकी धर्मपत्नी और सुपुत्री भी काव्य सृजन में अच्छा खासा दखल रखते हैं। आपकी विद्यार्थी काल से ही साहित्य के प्रति रुचि रही जो अनवरत जारी हैं।

पंचोली अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बताते हैं “जब 1984 में दसवीं में पढ़ता मेरे पिता जी को भी किताबे पढ़ते व कविताऐं लिखते देखा तो मेरा भी इस और रुझान हुआ। मै भी कविता लिखने लगा। जब पहली कविता लिखी तो सबको पसंद आई और सबने मेरा होंसला बढ़ाया। इससे मुझे खुशी हुई और मैं धीरे-धीरे कलम को कागज पर चलाता गया, मैं रुका नहीं, न मेरे मन में कभी इच्छा रही थी कि मेरी कविताऐं छपेगी पुस्तकें भी प्रकाशित होंगी। हां ! बस माँ शारदे लिखवाती रही, मैं लिखता चला गया। कभी सोच कर नहीं लिखा, बस जैसे ही विचार आते लाइनें बनती जाती और कविता तैयार होती गई।” वह बताते हैं “मैंने हिन्दी में कविता,दोहा,हाइकु,कुण्डलिया छंद,भजन,मुक्तक,राजस्थानी गीत लिखे और उनका संकलन कर लिया। फिर मैं प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगा तो वहां मुझे प्रोत्साहन के लिए पुरस्कार मिलने से मुझे खुशी होती थी। सन 1990 में जिम्मेदारियों के कारण वापस गांव जाना पड़ा वहां रहकर जमीन की देखरेख करने लगा। मैं पूर्णरुप से कृषि कार्य से जुडा़ किसान हूँ । यह कहते हुए मुझे गर्व होता है, परंतुअपना लेखन भी बराबर बनाए रखा।”

पंचोली आगे बताते हैं ” मेरा एक बार भारतेन्दु समिति कोटा में आना हुआ वहां मुझे रामेश्वर रामू भैया मिले उन्होंने मुझे प्रोत्साहित करते हुए कहा महेश बाबू अखिल भारतीय साहित्य परिषद का गांव में ही गठन करो। बस फिर क्या था मुझे धुन सी लग गई। गांव जाते ही जितने साहित्यकार थे सबको सदस्य बनाकर समिति का गठन किया। मासिक काव्य गोष्ठियां शुरू की जिसका सिलसिला 15 वर्ष तक निर्बाध चला। इसी बीच कवि सम्मेलन भी आयोजित करवाये । उसके बाद यात्रा आगे बढ़ी सन 2011में कोटा अपना मकान खरीदा और बच्चों को पढाना भी था। कोटा में भी अनवरत भारतेंदु समिति की रविवारिय संध्याकालीन काव्य गोष्ठियों में भागीदारी करता रहा। धीरे-धीरे अन्य संस्थाओं और साहित्यकारों से भी संपर्क बनता चला गया।

कोटा में भी सृजन ओ तखलीक काव्य संस्था के सचिव पद पर रहते हुये मासिक गोष्ठियों में तथा श्रीकर्मयोगी सेवा संस्था और कई अन्य संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हैं।”

कवि के रूप में पहचान बनाने वाले महेश पंचोली राजस्थानी गीत,हिन्दी कविता,गीत, दोहे ,मुक्तक,हाइकु,सभी विधाओं के लेखन में दक्ष हैं। आपकी दो कृतियां हिन्दी काव्य संग्रह “दिया जलता रहा” और बाल काव्य संग्रह “मम्मी का मैं राजदुलारा” प्रकाशित हो चुकी हैं। दूसरी कृति का प्रकाशन पंडित जवाहरलाल नेहरु बाल साहित्य अकादमी जयपुर द्वारा प्रकाशित किया जाना साहित्यकार के उत्कृष्ठ सृजन का प्रमाण है।आपकी तीन कृतियां बाल काव्य संग्रह “मेरा उपवन” ,हिन्दी काव्य संग्रह “भावों की सरिता” और राजस्थानी काव्य संग्रह “आपां पढ़बा न चालां” प्रकाशन के लिए तैयार हैं।

आपकी काव्य रचनाएं शब्दप्रभात,चिदम्बरा,वाणी वन्दना,शब्द विभावरी,सांरग सुरभि,संस्थान संगम काव्य सृजन,काव्यांजलि पत्रिका,केसरिया क्रान्ति,गोतम पत्रिका आदि अन्य पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित होती हैं। आकाशवाणी कोटा केंद्र से भी आपकी काव्य रचनाओं का प्रसारण किया जाता है। आपने हाड़ोती अंचल के अनेक कवि सम्मेंलनों में भागीदारी कर काव्यपाठ किया है और कई काव्य गोष्ठीयों में सफल संचालन भी किया हैं। आपकी एक कविता की बानगी देखिए……………
आहत मन कुछ कहता है
नयनों से झरझर बहता है
कौन सुनेगा इसकी बातें
हर इन्सां अपनी धुन रहता है
देखता जब लाचार इन्सानों को
देखता अत्याचार करते शैतानों को
यह भी कहां चुपचाप रहता है
आहत मन कुछ कहता है ।
देख अस्मत लुटती नारी की
देश में जड़े फेली भ्रष्ट्राचारी की
इन्सां बुराई को क्यों सहता है
आहत मन कुछ कहता है ।
कर्जे में पड़ा है देखो
आज देश का किसान
परिवार भटका जिनका
शहीद हुये जो जवान
फिर भी माला लेकर
देशवासी खड़ा रहता है
पर यह सब देख
आहत मन कुछ कहता है ।

कवि की सामाजिक परिवेश की सत्यता को उजागर करती एक और काव्य सृजन की बानगी देखिए………….
मैं सताकर दूसरों को खुश होता हूँ
मैं लूट कर दूसरों को खुश होता हूँ
उजाड कर दुनिया दूसरों की खुश होता हूँ
दुखी देख दूसरों को मैं आराम से सोता हूँ
कल्पना में उड आसमान को छू लेता हूँ
जाकर समुद्र में गहराईयों को भांप लेता हूँ
कभी आत्मा को परमात्मा से जोड देता हूँ
कभी शरीर के लिये दूसरे की जान ले लेता हूँ
जानकर भी यह कि सबकुछ यहीं रह जाना है
फिर भी हर चीज को मैने अपना माना है
नारी को पूजने वाला उसका मैं रक्षक हूँ
या फिर साधु के भेष में छलिया भक्षक हूँ
संतुष्टि नहीं फिर बना फिरता हूँ सामने संत
दिखावे में जी रहा कर रहा खुद का ही अंत
मैं अज्ञानी,नादान दानव शैतान लुटेरा जानवर
शरीर,आत्मा,ज्ञानी,नभचर,जलचर या,थलचर
मैं कौन हूँ समझ ही नहीं पाया अपने आप को
अपने हित के लिये करता आया हूँ पुण्य,पाप को इन्सान भी हूँ या कोई ओर सोचकर मौन हूँ
मैं जान ही नहीं पाया मैं कौन हूँ मैं कौन हूँ

कवि हृदय पंचोली के दिल में एक कलाकार का दिल भी धड़कता है। आप अभिनय कला में भी प्रवीण हैं। आप कलाकार के रुप में रामलीला में व दशहरे के समय केशोरायपाटन व कोटा में रावण की भूमिका अभिनित कर चुके हैं और अपनी अभिनय कला का लोहा भी मनवा चुके हैं। इन्होंने सुरभि कला केन्द्र की रामलीला में रंगमंच पर शंकर और वशिष्ठ मुनि की भूमिका भी निभाई है। कर्मत्योगी रावण सरकार के द्वारा 2011 में आयोजित एक प्रतियोगिता में संभाग के तीस रावण की भूमिका करने वाले कलाकारों को बुलाकर भव्य आयोजन किया था। गीता भवन में आयोजित संवाद बोलना,चलना, ड्रेस आदि की प्रतियोगिता में इन्हें तीसरा स्थान प्राप्त हुआ और आपको शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। आप एक अच्छे चित्रकार भी हैं।

आपके सृजन के महत्व को देखते हुए आपको कोटा की विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। आपको 3 सितंबर 23 को मदर टेरेसा और शिशु भारती ग्रुप ऑफ एजुकेशन द्वारा ” अक्षर अभिनंदन” सम्मान से तथा हिंदी दिवस 14 सितंबर 23 को राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय कोटा द्वारा ” हिंदी साहित्य सेवा सम्मान – 2023″ से सम्मानित किया गया। आपको राष्ट्रीय कविचोपाल शाखा द्वारा साहित्यकार सम्मान,समरस संस्थान द्वारा काव्य शिरोमणि, राज्य सरकार के पुस्तकालय कोटा द्वारा साहित्य सृजन, श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान कोटा द्वारा शान-ए-राजस्थान ,काव्य कलश साहित्य समिति द्वारा काव्य कलश, वेस्ट सेन्ट्रल एम्पलाइज यूनियन द्वारा साहित्य भूषण, श्रावणी तीज मेला समिति द्वारा शान- ए- हाडोती,केरियर पाइन्ट यूनिवर्सिटी द्वारा गेस्ट आफ आनर सम्मान से आपको नवाजा गया। इनके अलावा हाडोती पालीवाल ब्राह्मण‌हितकारी समिति, मधुकर काव्य सृजन संस्थान, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, साहित्य समिति स्टेशन एवं चन्द्रेसल कवि सम्मेलन समिति आदि द्वारा भी आपको सम्मानित किया गया।

कवि महेश पंचोली का जन्म बूंदी जिले के कापरेन में 24 अगस्त1968 को पिता स्व हरिदत्त पंचोली और माता लीला देवी के परिवार में हुआ। आपकी प्रारंभिक एवम् हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा कापरेन में हुई और कॉलेज शिक्षा के लिए कोटा आए तथा कोटा से आपने विज्ञान विषय में बी.एससी. की डिग्री प्राप्त की। आप कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं।आपकी धर्मपत्नी यशोदा शर्मा शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापिक है और वह भी कविताऐं ,कहानी ,संस्मरण लिखती हैं। एम.एससी.में अध्ययन रत सुपुत्री गीतिका शर्मा भी हिन्दी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में कविता लिखती हैं। सुपुत्र नक्षत्र शर्मा धनबाद आईआईटी इलेक्ट्रिकल ब्रान्च में फाईनल इयर में अध्ययन रत हैं।

संपर्क
67 न्यू कमला उद्यान कुन्हाड़ी
बून्दी रोड़, कोटा राजस्थान

मो.न.9799366675,‌ 9462014354
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डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवम् पत्रकार, कोटा