मॉडल से संत बने भ्ययू महाराज की आत्महत्या ने सबको चौंकाया

इन्दौर। आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली है. इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में उनकी मौत की पुष्टि की है. उनके खुदकुशी के पीछे पारिवारिक कारण बताये जा रहे हैं. भैय्यूजी महाराज उस समय चर्चा में आये थे जब अण्णा आंदोलन के समय उन्होंने सरकार के साथ बातचीत में बड़ी भूमिका निभाई थी. उस आंदोलन के समय शरद यादव ने भय्यू जी महाराज की आलोचना भी की थी. भय्यू जी महाराज के भक्तों में कई नामी-गिरामी की हस्तियां शामिल थीं. वह पहले फैशन डिजाइनर थे बाद में अध्यात्म की ओर मुड़ गये.
भय्यूजी महाराज से जुड़ी 10 बातें

भय्यू महाराज को मॉडर्न और राष्ट्रीय संत माना जाता था. उन्होंने करीब 49 साल की उम्र में दूसरी शादी की थी. उन्होंने पहली पत्नी की मौत होने के बाद बेटी कुहू और मां का ख्याल रखने के लिए ही ये शादी की थी. उनकी पहली पत्नी माधवी का दो साल पहले निधन हो चुका है. पहली शादी से उनकी एक बेटी कुहू है, जो पुणे में रहकर पढ़ाई कर रही है.

1968 को जन्मे भय्यू महाराज का असली नाम उदयसिंह देखमुख था. वह शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे. कभी कपड़ों के एक ब्रांड के लिए मॉडलिंग कर चुके भय्यू महाराज अब गृहस्थ संत थे. सदगुरु दत्त धार्मिक ट्रस्ट उनके ही देखरेख में चलता था.

उनका मुख्य आश्रम इंदौर के बापट चौराहे पर है. उन्होंने 30 अप्रैल 2017 को एमपी के शिवपुरी की डॉ. आयुषी के साथ सात फेरे लिए.

वह मर्सीडीज जैसी महंगी गाड़ियों में चलने वाले भय्यू जी रोलेक्स ब्रांड की घड़ी पहनते हैं और आलीशान बिल्डिंग में रहते हैं।

वह चर्चा में तब आए जब अण्णा हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपना दूत बनाकर भेजा था. बाद में अण्णा ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था.

पीएम बनने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे. तब उपवास खुलवाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को ही आमंत्रित किया था.

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीएम नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम विलासराव देखमुख, शरद पवार, लता मंगेशकर, उद्धव ठाकरे और मनसे के राज ठाकरे, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी भी उनके आश्रम आ चुके हैं.

सामाजिक कार्यों में संलग्‍न रहने वाले भय्यूजी हजारों कन्‍याओं का विवाह करवाने में भी करवाया था. मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र के कई जलाशयों के पुनर्निर्माण में उनकी काफी महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है. इन्‍होंने वृक्षारोपण अभियान और संविधान की प्रतियों को बांटने का अभियान भी चलाया.

कांग्रेस, बीजेपी, शिव सेना जैसी पार्टी के दिग्‍गज नेताओं के साथ इनके बेहतर संबंध रहे इसके बावजूद राजनीति में कभी नहीं आए. मध्य प्रदेश सरकार ने इनको हाल ही में कई संतों के साथ कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था लेकिन इन्होंने इनकार कर दिया.

राजनीतिक रूप से ताकतवर संतों में से एक थे भय्यू जी महाराज. उनके काफिले में भी कई गाड़ियां चलती थीं. फिल्मी सितारों से लेकर राजनेताओं का उनके आश्रम में जमावड़ा लगा रहता था.