कुछ हटकर सोचते हैं श्री सुरेश प्रभु

जीवाश्म ईंधन से इस्तेमाल से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों के हानिकारक प्रभावों पर सचेत करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सौर और पवन उर्जा जैसी वैकल्पिक उर्जा के उपयोग के माध्यम से उर्जा परिदृश्य में बड़े बदलाव की वकालत की है।

पिछले दिनों दिल्ली में  एक स्मारक व्याख्यान में श्री प्रभु ने  कहा, ‘दुनिया भर में बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन हो रहा है जिसका जलवायु पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। सभी लोग सहमत हैं कि जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैस वायुमंडलीय तापमान बढ़ा रही है और जलवायु में परिवर्तन ला रही है।’ ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन के परिणामों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा, ‘हाल की बेमौसम वर्षा और मौसम में इतने बड़े बदलाव की कल्पना नहीं की जा सकती। अतिवादी मौसम से कृषि पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है मसलन फसलें नष्ट हो रही हैं।’ प्रभु ने कहा कि वर्तमान उर्जा परिदृश्य पर्यावरण की दृष्टि से टिकाउ नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘हमें अवश्य ही उर्जा के नए स्रोत को ढूंढना चाहिए जो टिकाउ हो और आज यह एक बड़ी चुनौती है।’ सौर और पवन उर्जा की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि ये उर्जा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत में 300 दिनों तक अच्छी धूप होती है। हमें सौर उर्जा का आयात नहीं करना होगा। हमें सौर उर्जा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’