पुस्तकालयों के माध्यम से देश की सभ्यता, संस्कृति, विरासत आगामी पीढ़ियों तक पहुँचती है

वाराणसी। पुस्तकालय सिर्फ किताबों और पत्र-पत्रिकाओं के संग्रहण व अध्ययन का जरिया मात्र नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से देश की सभ्यता, संस्कृति, विरासत, संस्कार आगामी पीढ़ियों तक पहुँचते हैं। पुस्तकालय सभ्य समाज की पहचान होते हैं। इंटरनेट व सोशल मीडिया के इस दौर में विविध प्रकार के ज्ञान, सूचनाओं, स्रोतों, आदि के प्रमाणीकरण में भी पुस्तकालयों की अहम् भूमिका है। उक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने नव भारत निर्माण समिति के तत्वावधान में आयोजित ऋषिव वैदिक अनुसंधान, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, सुद्धिपुर, वाराणसी में मां सरस्वती पुस्तकालय का उद्घाटन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बीएचयू वाराणसी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अपर्णा सिंह की पुस्तक “दि पैन मॉडल ऑफ़ एस्योर्ड कैरियर प्रेडिक्शन्स” का विमोचन भी किया, वहीं कवि सम्मेलन में भागीदार युवा कवियों आयुष कश्यप, आशीष द्विवेदी, रमाकान्त, अंश ग़ाफ़िल, सुधांशु रघुवंशी कुटज, नीरज नीर को सम्मानित भी किया।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि समाज और राष्ट्र की दशा व दिशा के निर्धारण में पुस्तकालयों की अहम भूमिका है। किताबें सबसे अच्छी मित्र और धरोहर होती हैं। शोध और नवाचार में पुस्तकालयों की अहम भूमिका है। पुस्तकालय स्वयं में ज्ञान मन्दिर हैं जहाँ स्वयं देवी सरस्वती विराजमान होती हैं, तभी तो मनुष्य यहाँ ज्ञान रुपी धन को पाकर जीवन के अज्ञान रुपी अँधेरे को दूर कर पाता है। आज प्रिंटेड पुस्तकों के साथ-साथ ई-बुक्स और डिजिटल बुक्स का भी दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में आजादी के अमृत काल के बजट में देश में नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी खोलने की घोषणा भी की गई है।

श्री यादव ने मां सरस्वती पुस्तकालय के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पुस्तकालय अनुसंधान, सूचना, ज्ञान और पढ़ने की खुशी के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे अध्ययन-अध्यापन में रुचि रखने वालों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों, गरीब बच्चों और शोधार्थियों को काफी मदद मिलेगी।

बीएचयू वाराणसी के लाइब्रेरियन श्री केडी सिंह ने कहा कि पुस्तकें मार्गदर्शक होती हैं और पुस्तकालय ज्ञान के अमूल्य भंडार होते हैं। पुस्तकों के माध्यम से जीवन के विविध आयामों को समझा जा सकता है। पुस्तकालय हमें बुरी आदतों से बचाकर अच्छा नागरिक बनाते हैं।

नव भारत निर्माण समिति के संयोजक श्री बृजेश सिंह ने कहा कि पुस्तकालय हमारे सामाजिक और शैक्षिक जीवन का एक अहम स्थान हैं। युवाओं को पुस्तकालयों की ओर आकर्षित करने की आवश्यकता है और मां सरस्वती पुस्तकालय इस ओर पहल करके अहम भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर नव भारत निर्माण समिति के संयोजक बृजेश सिंह, सचिव प्रमोद पांडेय, डॉ. शिव शक्ति प्रसाद द्विवेदी, पंडित देवाशीष डे, आचार्य नवनीत त्रिपाठी, शिखा सिंह, अंबरीश ठाकुर, दान बहादुर सिंह, आचार्य नवनीत त्रिपाठी, सुभाशीष चटर्जी, रमेश सिंह, धर्मेंद्र कुमार सिंह सहित तमाम शिक्षाविद व बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

(प्रमोद पांडेय)
सचिव
नव भारत निर्माण समिति
वाराणसी।