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धनतेरस और दिवाली पूजन का मुहुर्त एवँ महत्त्व

पंचांग के अनुसार दिवाली का उत्सव 10 नवंबर 2023 धनतेरस के पर्व से प्रारंभ हो रहा है।  दिवाली का पर्व 12 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा।

इस साल  शुक्रवार, 10 नवंबर को धनतेरस है, इस दिन कुबेर जी की पूजा होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल धनतेरस में कई  संयोग करीब 59 साल के बाद बने हैं। धनतेरस पूजन की कुल अवधि 01 घंटा 56 मिनट है।

धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
10 नवंबर, शुक्रवार को शाम 05 बजकर 48 मिनट से शाम 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
प्रदोष काल-:  17:30 से 20:08 तक।
वृषभ लग्न काल-: 17:48 से 19:44

धनत्रयोदशी के साथ शुक्र प्रदोष और विष कुंभ योग का महासंयोग एक साथ हो रहा है। ऐसे में यदि वृषभ लग्न के दौरान कोई काम किया जाए तो उसमें ठहराव आता है। ऐसे में इस समय में सोना, चांदी या किसी भी चीज की खरीदारी करना इस दिन बेहद शुभ और फलदायी साबित होगा।

अगर आप पुष्य नक्षत्र में कोई खरीदारी करने से चूक गए हैं तो अगले सात दिन में 14 बड़े शुभ योग बन रहे हैं। इनमें आप कोई भी सामान खरीद सकते हैं।

इन सबमें सबसे शुभ मुहूर्त दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस पर रहेगा। इस दिन 4 राजयोग और एक 1 शुभ योग बन रहा है, इस तरह 5 योगों का महासंयोग 10 नवंबर को रहेगा। धनतेरस पर शुक्ल, ब्रह्म, इंद्र, स्थिर, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, दामिनी, उभयचरी, वरिष्ठ, सरल, शुभकर्तरी गजकेसरी और सर्वार्थसिद्धि जैसे योगों का संयोग बन रहा है।

धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदारी करना अच्छा माना जाता है। पंचांग के अनुसार धनतेरस के दिन यानी 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 11 नवंबर की सुबह तक खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त है।

दीपावली पूजन और मुहुर्त
दीपावली 12 नवंबर को है। इस दिन अमावस्या दोपहर तकरीबन 2.30 बजे बाद से शुरू होगी। शाम को लक्ष्मी पूजा के वक्त पांच राजयोग रहेंगे। इनके साथ आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग भी बनेंगे। इस तरह आठ शुभ योगों में दीपावली मनेगी।

ज्योतिषियों का कहना है दीपावली पर शुभ योगों की ऐसी स्थिति पिछले 700 सालों में नहीं बनी। इतने शुभ संयोग बनने से ये लक्ष्मी पर्व सुख-समृद्धि देने वाला रहेगा। दीपावली पर बन रही ग्रह स्थिति देश की तरक्की का शुभ संकेत दे रही है।

दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से नया साल शुरू होता है। व्यापारियों में पुष्य नक्षत्र और धनतेरस से नए बही-खाते लेकर कारोबारी नया साल शुरू करने की परंपरा भी रही है। दीपावली से ही जैन समाज का महावीर निर्वाण संवत भी शुरू होता है।

5 राजयोग कौन से होंगे
गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नाम के पांच राजयोग बन रहे हैं। जो शुक्र, बुध, चंद्रमा और गुरु की स्थिति से बनेंगे। ज्योतिष में गजकेसरी योग को सम्मान और लाभ देने वाला माना जाता है। हर्ष योग धन लाभ, संपत्ति और प्रतिष्ठा बढ़ता है। काहल योग स्थिरता और सफलता देता है। वहीं, उभयचरी योग से आर्थिक संपन्नता बढ़ती है। दुर्धरा योग शांति और शुभता बढ़ाता है।

रविवार को सुबह चतुर्दशी, दोपहर 2.30 बजे बाद अमावस्या
12 तारीख को सुबह रूप चौदस रहेगी। दोपहर 2.30 बजे बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। लक्ष्मी पूजन अमावस्या की रात में ही होता है, इस कारण दीपावली की पूजा 12 नवंबर  को ही होगी। पूजा के ज्यादातर मुहूर्त दोपहर 3 बजे से ही रहेंगे। अमावस्या सोमवार को दोपहर 3 बजे तक रहेगी, इसलिए अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या भी मनाई जाएगी। अमावस्या का स्नान दान वगैरह सोमवार को ही होगा।

अमावस्या दो दिन तक, लेकिन दीपावली 12 को ही क्यों ?
कार्तिक महीने की अमावस्या रविवार और सोमवार दोनों ही दिन रहेगी, लेकिन दीपावली 12 तारीख को मनेगी। रविवार की रात में अमावस्या होने से लक्ष्मी पूजन इसी तारीख को किया जाएगा। सोमवार को अमावस्या दिन में ही खत्म हो जाएगी।

ग्रंथों में इस बात का जिक्र है कि जिस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के वक्त अमावस्या हो तब लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए। इस बात का ध्यान रखते हुए ज्योतिषियों का कहना है कि दीपावली 12 नवंबर को ही मनाएं।

दीपावली पर ग्रहों की स्थिति देखते हुए ज्योतिषियों का कहना है कि मेष, मिथुन, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि के लिए अच्छा समय शुरू होगा।

दीवाली पर लक्ष्मी पूजन का मुहुर्त
हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस साल दिवाली 12 नवंबर, रविवार के दिन  है। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 12 नवंबर दोपहर 02 बजकर 44 मिनट पर  है। साथ ही इसका समापन 13 नवम्बर दोपहर 02 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में दीपावली का पर्व 12 नवंबर, रविवार के दिन मनाया जाएगा। साथ ही इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम माना जाता है।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त – 12 नवंबर शाम 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 35 मिनट तक।

निशिता काल मुहूर्त – 12 नवंबर की रात्रि 11 बजकर 35 मिनट से 13 नवंबर रात 12 बजकर 32 मिनट तक।

प्रदोष काल – शाम 05 बजकर 29 मिनट से 08 बजकर 08 मिनट तक।

वृषभ काल – शाम 05 बजकर 39 मिनट से 07 बजकर 35 मिनट तक।

चौघड़िया पूजा मुहूर्त – अपरान्ह मुहूर्त (शुभ का चौघड़िया) 12 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से 02 बजकर 46 मिनट तक।