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ऑफिस में घंटों बैठने और मीटिंग करने से परिणाम नहीं आतेः श्री अश्वनी लोहानी

अगर अधिकारी अपने काम के प्रति ईमानदार है तो वह शेर की तरह किसी भी परिस्थिति का मुकाबला कर सकता है, उस पर न तो कोई राजनीतिक दबाव का कोई असर होता है न किसी यूनियन का। एअर इंडिया के अध्यक्ष-सह-प्रबंधक श्री अश्वनी लोहानी जब मुंबई के श्री भागवत परिवार द्वारा आयोजित एक बेहद अनौपचारिक कार्यक्रम में बदहाल और लगातार घाटे में जा रही एअर इंडिया को विश्वसनीय संस्थान बनाने को लेकर अपनी बात कह रहे थे, तो मुंबई के वर्ली स्थित जिंदल कंपनी के बोर्ड रुम में उपस्थित मुंबई के जाने माने उद्योगपति, कारोबारी और समाजसेवा से जुड़े लोग आश्चर्य, कुतुहल और रोमांच के साथ उनके एक एक शब्द की गहराई को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। वहाँ उपस्थित श्रोताओं के लिये ये यकीन करना मुश्किल था कि घाटे, बदहाली और तमाम नकारात्मक कारणों से चर्चा में रहे एअर इंडिया को मात्र 16 माह में वैश्विक स्तर पर एक नई व विश्वसनीय पहचान देने वाले शख्स ने ये तमाम उपलब्धि रात-दिन दफ्तर में बैठकर नहीं बल्कि अधिकारियों, कर्मचारियों और यात्रियों के साथ सीधे चर्चा कर के हासिल की है। श्री लोहानी का पूरा वक्तव्य उनके अनुभवों और काम के प्रति उनकी निष्ठा का ऐसा निचोड़ था जिसमें प्रबंधन के बेहतरीन सूत्र छुपे हुए थे।

श्री लोहानी ने हजारों करोड़ के घाटे में जा रही एअर इंडिया को मुनाफे में लाने के लिए बगैर किसी शोर-शराबे के ऐसे क्रांतिकारी प्रयोग किए हैं जो दुनिया के किसी भी प्रबंध संस्थान के लिए केस स्टडी का विषय हो सकता है, लेकिन श्री लोहानी विनम्रतापूर्वक उनकी चर्चा न करते हुए इतना ही कहते हैं, ये उपलब्धियाँ एक व्यक्ति की नहीं, पूरे संस्थान के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का नतीजा होती है।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव श्री जयंत कुमार बाँठिया ने अपने रोमांचक व प्रेरक संस्मरणों से पूरे माहौल को भावुकता से सराबोर कर दिया। श्री बाँठिया देश भर में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर 8 लाख से ज्यादा निःशुल्क ऑप्रेशन कर चुकी लाईफ लाईन एक्सप्रेस से जुडे हैं और चाहते हैं कि हर प्रदेश सरकार एक ऐसी लाईफ लाईन एक्सप्रेस चलाए जो देश के उन क्षेत्रों में जाकर लोगों की गंभीर ऑप्रेशन आदि कर सकें जहाँ न तो सर्वसुविधायुक्त अस्पताल हैं न बिजली है, न डॉक्टर हैं और न मरीजों की ऐसी हैसियत है कि वे किसी बड़े अस्पताल में जा सकें। उन्होंने कहा कि नक्सली क्षेत्रों में नक्सली सभी लोगों का विरोध करते हैं, उन पर हमला करते हैं लेकिन वो किसी एंबुलेंस या चिकित्सा सेवा देने वाले किसी वाहन पर कभी हमला नहीं करते, अगर राज्य सरकारें ऐसी लाईफ लाईऩ एक्सप्रेस के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों मे इलाज की सुविधा पहुँचाए तो नक्सलियों का रवैया भी बदल सकता है।

इस अवसर पर श्री भागवत परिवार के अध्यात्मिक मार्गदर्शन श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने कहा कि आज की पीढ़ी का एक मात्र लक्ष्य पैसा कमाना रह गया है। उन्होंने बताया कि मैने चार्टर्ड एकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहे छात्रों से जब पूछा कि वे सफल चार्टर्ड एकाउंटेंट कैसे बन सकते हैं तो उनमें से अधिकांश ने कहा कि हेराफेरी करके। जब युवा पीढ़ी का सोच इस स्तर पर आ जाए तो हमें इस पर चिंता करनी चाहिए कि हम अपनी इस पीढ़ी को वो मूल्य, वो संस्कार और वो चरित्र क्यों नहीं दे पाए जो उन्हें ईमानदार व निष्ठावन बनाए। उन्होंने कहा कि श्री भागवत परिवार विभिन्न गतिविधियों, आयोजनों व कार्यक्रमों के माध्यम से युवी पीढी को उन जीवन मूल्यों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है जो उन्हें सही दिशा दे सके। इसी कड़ी में श्री भागवत परिवार ने अतुल्य भारत ग्रंथ का प्रकाशन किया है जिसमे भारतीय विरासत, कला, साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म, धर्म और जीवन शैली से जुड़े रोचक, शोधपूर्ण लेख प्रकाशित किए गए हैं।

कार्यक्रम में भोपाल से आए श्री संजय सिंह ने श्री लोहानी द्वारा मध्य प्रदेश के पर्यटन विकास निगम के संचालक के रूप में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि उनके काम आज भी मध्य प्रदेश के पर्यटन के लिए मील के पत्थर की तरह हैं।

इस कार्यक्रम में एअर इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक श्री मुकेश भाटिया, श्री भागवत परिवार के श्री एसपी गोयल, श्री लक्ष्मीकांत सिंगड़ोदिया, श्री सुनील सिंघल, श्री शशिकांत सिंघल, श्री सुरेंद्र विकल, उद्योगपति श्री संजय जगताप, श्री दिनेश अग्रवाल, श्री विनय चौधरी, श्री कैलाश चौधरी, श्री गोपाल कंदोई, श्री महावीर प्रसाद नेवटिया व राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय मीडिया प्रवक्ता श्री रतन शारदा सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।


लोहानी जी का अंदाजे बयाँ वाकई कुछ और है- जानिए कैसे हैं लोहानी जी

ईमानदारी ऐसी कि अशोका होटल में आईटीडीसी का अपना ऑफिस होने पर भी कभी बीवी-बच्चों संग सरकारी पैसे से इस दिल्ली के फाइव स्टार होटल मे एक कप चाय भी नहीं पी। खुद को पहले नजीर बनाकर स्टाफ को भी शाहखर्ची से रोकने में सफल हुए अश्वनी लोहानी ने जब घाटे में चल रही इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन आईटीडीसी को मुनाफे में पहुंचा दिया तो सब हैरान हो गए।

घाटे में दम तोड़ते दो बड़े संस्थानों को इस रेलवे अफसर ने जब जिंदा कर दिखाया तो खबर मोदी तक पहुंची और उन्होंने अश्वनी को बड़ी जिम्मेदारी देने का मन बनाया।

मोदी जी को लगा कि यूपीए राज में कंगाल हुए एयर इंडिया को संकट से उबारने के लिए ईमानदार अफसर की तलाश पूरी हुई। बस फिर क्या था कि उन्होंने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए इंडियन *रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस* के इस अफसर को *एयर इंडिया का सीएमडी* बना दिया और कहा कि-एयर इंडिया को घाटे से उबार दो तो मैं जानूं।

महज एक साल के भीतर अश्वनी ने दो हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही इस सरकारी नागर विमान सेवा कंपनी को 105 करोड़ के मुनाफे में पहुंचाकर एक बार फिर सबको हैरान करते हुए मोदी जी का भरोसा जीत लिया।



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