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मनोरंजन जगत
 

  • मिफ़्फ़ 2018 में श्याम बेनेगल को व्ही शांताराम लाइफटाइम अचिवमेंट सम्मान

    मिफ़्फ़ 2018 में श्याम बेनेगल को व्ही शांताराम लाइफटाइम अचिवमेंट सम्मान

    मुंबई। वृत्तचित्र, लघु और एनिमेशन फिल्मों को समर्पित मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्व, मिफ़्फ़ 2018 के प्रतिष्ठित व्ही शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से वरिष्ठ निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल को सम्मानित किया जा रहा है. शनिवार को एनसीपीए में आयोजित मिफ़्फ़ 2018 के समापन समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री सी विद्यासागर राव ट्राफी, शॉल, प्रमाण-पत्र और दस […]

  • कमाल अमरोही ने ऐसे रचाई थी मीना कुमारी से शादी

    कमाल अमरोही ने ऐसे रचाई थी मीना कुमारी से शादी

    ये 1949 का साल था. करीब 30 साल के एक लेखक ने अशोक कुमार सहित 'बॉम्बे टॉकीज' के डायरेक्टरों को एक कहानी सुनाई.

  • नादिया हंटरवाली को याद किया गूगल ने

    नादिया हंटरवाली को याद किया गूगल ने

    गूगल ने ‘फीयरलेस नादिया’ को उनकी 110वीं जयंती पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी है। ऑस्‍ट्रेलियाई अभिनेत्री और स्‍टंटवुमन मैरी एन इवंस को उनके इसी नाम से दुनिया भर में जाता था। हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में मौत को मात देने वाले स्‍टंट कर उन्‍होंने अपनी पहचान बनाई। 1930 और 40 के दशक में वह मुंबई सिनेमा के मशहूर चेहरों में से एक थीं। पांच साल की उम्र में भारत आई नादिया ने कई हुनर सीखे। उन्‍हें घुड़सवारी, शिकार, फिशिंग और शूटिंग में मजा आता था। 1935 में आई फिल्‍म ‘हंटरवाली’ ने उन्‍हें पूरे भारत में ख्‍याति दिलाई। इससे पहले नादिया ‘देश दीपक’ और ‘नूर-ए-यमन’ जैसी फिल्‍मों में काम कर चुकी थीं। नादिया अपने सभी स्‍टंट खुद किया करती थीं। चलती ट्रेन में फाइट हो, घुड़सवारी, झरनों से कूदना, सीढ़ियों व हवाई जहाज से लटकना या शेरों की बीच शूट करना उनके लिए बेहद आसान था।

  • हजारों चीनी सैनिकों से जूझने वाले जोगिंदर सिंह पर बन रही है फिल्म

    हजारों चीनी सैनिकों से जूझने वाले जोगिंदर सिंह पर बन रही है फिल्म

    पंजाबी अभिनेता गिपी ग्रेवाल की आने वाली फिल्म 'सूबेदार जोगिन्दर सिंह' होगी। यह देश की पहली ऐसी जीवनी हैं जो किसी परमवीर चक्र विजेता पर बनी है। इस फिल्म को पंजाबी के अलावा तीन भाषाओं हिंदी, तमिल और तेलगु में भी रिलीज किया जा रहा है. फिल्म में कई बड़े कलाकार हैं. गिपी आज के ज़माने के नए अदाकारों के साथ मुख्य भूमिका में नजर आएंगे. गिप्पी ग्रेवाल के अलावा गुग्गु गिल, कुलविंदर बिल्ला, अदिति शर्मा, राजवीर जवंदा, रोशन प्रिंस, करमजीत अनमोल, सरदार सोही भी फिल्म में हैं.

  • राजेश खन्ना को राजीव गांधी सियासत में लाए

    राजेश खन्ना को राजीव गांधी सियासत में लाए

    हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपने सशक्त अभिनय के ज़रिये उन्होंने कामयाबी की जो बुलंदियां हासिल कीं, वह हर किसी को नसीब नहीं हो पाती हैं। 29 दिसंबर, 1942 को पंजाब के अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना था। उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक़ था। फिल्मों में उनके आने का क़िस्सा बेहद रोचक है। युनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फ़िल्मफ़ेयर के बैनर तले 1965 में नये अभिनेता की खोज के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें दस हज़ार लड़कों में से आठ लड़के फ़ाइनल मुक़ाबले तक पहुंचे, जिनमें एक

  • डॉ. सुभाष चन्द्रा ने पूछा, फिल्मों की सफलता की वजह क्या होती है?

    डॉ. सुभाष चन्द्रा ने पूछा, फिल्मों की सफलता की वजह क्या होती है?

    हैदराबाद में GEC 2017 में सिनेमा पर सबसे बड़ी चर्चा में राज्यसभा सासंद डॉ सुभाष चंद्रा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा से जुड़ी कई शख्सियतों से 'फ्यूचर ऑफ सिनेमा' पर चर्चा की. डॉ.चंद्रा ने कहा कि सिनेमा में तेजी से बदलाव हो रहा है.

  • भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में इस बार क्या है खास

    भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में इस बार क्या है खास

    गोआ में 20 से 28 नवंबर तक चलने वाले भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 82 से ज्यादा देशों की 195 फिल्मों को दिखाया जाएगा, जिसमें से 10 वर्ल्ड प्रीमियर, 10 एशियाई तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर और 64 से ज्यादा भारतीय प्रीमियर आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।

  • मामी फिल्म समारोह का शानदार शुभारंभ 12 अक्टूबर को

    मामी फिल्म समारोह का शानदार शुभारंभ 12 अक्टूबर को

    मुंबई। 200 से ज्यादा फिल्मों के साथ मामी, यानी मुंबई फिल्म फेस्टिवल का 19वां सीजन 12 अक्तूबर से मुंबई में शुरु होने जा रहा है।

  • ‘प्यासा’ के बनने की कहानी भी बताती है कि गुरु दत्त क्या थे और क्यों थे

    ‘प्यासा’ के बनने की कहानी भी बताती है कि गुरु दत्त क्या थे और क्यों थे

    ‘प्यासा’ हिंदी सिनेमा की महानतम फिल्मों में से एक है. जब तक हमारा सिनेमा सांस लेता रहेगा, ‘प्यासा’ अमर रहेगी. जब-जहां दुनिया को ठुकराने वाले बेचैन नायक गढ़े जाएंगे, ‘प्यासा’ फिल्मकारों की पाठशाला बनेगी. जिन दिनों किसी से बांटी न जा सकने वाली गहरी उदासी जिस्म से लिपटेगी, और इस भौतिकवादी दुनिया की क्षणभंगुरता एकदम साफ नजर आएगी, तब ‘प्यासा’ ही होगी जो दर्शकों को सबसे ज्यादा याद आएगी.

  • ज्वैल थीफः  फिल्मी दुनिया के वो रिश्ते, वो हुनर और वो सुनहरे दिन

    ज्वैल थीफः फिल्मी दुनिया के वो रिश्ते, वो हुनर और वो सुनहरे दिन

    अपने समय से आगे की सोच थी 1967 में बनी फिल्म 'ज्वैल थीफ' में। आज भी इस फिल्म का जादू बरकरार है। इस फिल्म के निर्माण से जुड़े रोचक किस्से बता रही हैं दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ फीचर एडिटर जयंती रंगनाथन

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