ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

भारत गौरव
 

  • ऐसे थे घनश्याम दास बिड़ला

    ऐसे थे घनश्याम दास बिड़ला

    एक ज़माना था जब किसी की रईसियत पर तंज़ कसना होता था तो कहते, ‘तू कौन सा टाटा-बिड़ला है?’

  • वैज्ञानिकों ने बनाया चलता-फिरता सौर कोल्ड स्टोरेज

    वैज्ञानिकों ने बनाया चलता-फिरता सौर कोल्ड स्टोरेज

    वास्को-द-गामा (गोवा), 29 मई (इंडिया साइंस वायर) : भंडारण के अभाव में बड़ी मात्रा में फल और सब्जियां समय से पहले खराब हो जाते हैं। नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा से संचालित मोबाइल कोल्ड-स्टोरेज यूनिट बनायी है, जो फल तथा सब्जियों को नष्ट होने […]

  • आधुनिक लद्दाख के निर्माता कुशक बकुला रिम्पोछे

    आधुनिक लद्दाख के निर्माता कुशक बकुला रिम्पोछे

    श्री रिम्पोछे का जन्म 19 मई, 1917 को लेह (लद्दाख) के पास माथो गांव के एक राज परिवार में हुआ था। 1922 में 13वें दलाई लामा ने उन्हें 19वां कुशक बकुला घोषित किया। तिब्बत की राजधानी ल्हासा के द्रेपुंग विश्वविद्यालय में उन्होंने 14 वर्ष तक बौद्ध दर्शन का अध्ययन किया। 1940 में लद्दाख वापस आकर उन्होंने अपना जीवन देश, धर्म और समाज को समर्पित कर दिया। अब

  • मोदी के लिए टूटते प्रोटोकॉल

    मोदी के लिए टूटते प्रोटोकॉल

    देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कद विश्व समुदाय के सामनें लगातार इतना बढ़ रहा है, कि भारत के पीएम 30 साल बाद स्वीडन की यात्रा पर गए। पहली बार स्वीडन के प्रधानमंत्री ने अपनी परंपरा तोड़कर नरेंद्र मोदी की अगुवाई के लिए एयरपोर्ट पर स्वागत किया। उनके द्वारा पीएम मोदी को रिसीव करना हमारे लिए गर्व की बात है, कि किसी देश का प्रधानमंत्री भारत के प्रधानमंत्री के अगुवाई के लिए अपनी परंपरा को तोड़ने पर भी विवश हो जाए। बात यहीं पर समाप्त नही हो जाती है। बल्कि कॉमनवेल्थ समिट में आने वाले 52 देशों के प्रमुखों में से मोदी ही अकेले ऐसे प्रधानमंत्री

  • वेदों की पढ़ाई के लिए वेद विश्वविद्यालय बनाने की संघ की योजना

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) वेदों की पढ़ाई और वेदों पर रिसर्च को प्रमोट किया जाएगा। संघ से जुड़ा संगठन विश्व हिंदू परिषद(वीएचपी) वेद यूनिवर्सिटी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए गुडगांव में करीब 40 एकड़ जमीन ली जा रही है। अभी वीएचपी के वेद विद्यालय और कुछ महाविद्यालय चलते हैं लेकिन यह वेद यूनिवर्सिटी वीएचपी की और

  • मृणालिनी साराभाई की सौवीं जयंती पर गूगल ने याद किया डूडल से

    मृणालिनी साराभाई की सौवीं जयंती पर गूगल ने याद किया डूडल से

    नई दिल्ली : सर्च इंजन गूगल ने शुक्रवार को जानी-मानी शास्त्रीय नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई को उनकी 100वीं जंयती पर डूडल के जरिए श्रद्धांजलि दी. डूडल में मृणालिनी छतरी लिए दर्पण एकेडमी ऑफ पर्फार्मि

  • रामायण सर्किट से जुड़ेगी  जनकपुर-अयोध्या एक्सप्रेस

    रामायण सर्किट से जुड़ेगी जनकपुर-अयोध्या एक्सप्रेस

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की नेपाल यात्रा पर हैं। उनकी इस यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों को सामन्य बनाने के एक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। पीएम मोदी सबसे पहले सीता के

  • रामेश्वरनाथ काव: पहले रॉ चीफ, जिन्होंने चीन की नाक के नीचे सिक्किम का विलय भारत में कराया

    नई दिल्ली । बात 1968 की है, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सीआईए और एमआई 6 की तर्ज पर भारत में भी खुफिया मामलों के लिए अलग एजेंसी की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद रिसर्च ऐंड अनैलेसिस विंग (रॉ) की स्थापना की गई। रॉ के पहले निदेशक के तौर पर चुना गया आर एन काव को। बेहद आकर्षक, शांत और शर्मीले स्वभाव के माने जाने वाले काव का जन्म आज के ही दिन (10 मई, 1918) हुआ था। आइए भारत के पहले 'बॉन्ड' के बारे में जानते हैं कुछ दिलचस्प बातें:

  • महाराणा प्रताप होने का मतलब…

    महाराणा प्रताप होने का मतलब…

    मेवाड़ में एक रीति है. उत्तराधिकारी अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं जाता. शुरुआत इसी बात से करते हैं. फ़रवरी, 1572 में उदयपुर से कोई 20 मील दूर माउंट आबू की तरफ, गोगुन्दा में राणा उदय सिंह का अंतिम संस्कार हो रहा था. सभी सामंत, ठाकुर और बड़े कुंवर प्रताप सिंह सिसोदिया वहां मौजूद थे. लेकिन उदय सिंह के छोटे बेटे, कुंवर जगमाल नदारद थे. खट

  • विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के साथ भारत को गौरवान्वित करने वाले वीरचंद गाँधी

    विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के साथ भारत को गौरवान्वित करने वाले वीरचंद गाँधी

    ११ सितंबर १८९३ से शिकागो—अमेरिका में विश्वधर्म सम्मेलन प्रारंभ हुआ जो १७ दिन चला। सर्व धर्म परिषद शिकागो में विश्वविख्यात जैनाचार्य श्रीमद् विजयानंद सूरि प्रसिद्ध नाम आत्मारामजी को जैन धर्म के प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया और उन्हें अपनी में मानद सदस्य का स्थान दिया । साधु जीवन की मर्यादा के अनुसार श्री आत्मारामजी म.सा. का जाना संभव नहीं था तो परिषद् के अत्यधिक आग्रह पर आ

Back to Top