ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

पुस्तक चर्चा
 

  • पश्चिम रेलवे के सेवानिवृत कार्मिक अधिकारी  श्री शिवदत्त के ग़ज़ल संग्रह का विमोचन

    पश्चिम रेलवे के सेवानिवृत कार्मिक अधिकारी श्री शिवदत्त के ग़ज़ल संग्रह का विमोचन

    पश्चिम रेलवे के चर्चगेट स्थित प्रधान कार्यालय से सेवानिवृत उप मुख्य कार्मिक अधिकारी तथा पूर्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी श्री शिवदत्त ‘अक्स’ द्वारा लिखित ग़ज़ल संग्रह ‘अक्स-ए-ग़ज़ल’ का विमोचन मुंबई के यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान सभागृह में पिछले दिनों आयोजित एक समारोह में हुआ।

  • महाभारत  तेलुगू भाषा में भी प्रकाशित होगी

    महाभारत तेलुगू भाषा में भी प्रकाशित होगी

    दुनिया में हिन्दू धर्म की सबसे अधिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाली गीताप्रेस ने महाभारत को तेलुगू भाषा में प्रकाशित करने का फैसला किया है.

  • कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक बच्चों की दुनिया की सच्चाई सामने लाएगी

    कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक बच्चों की दुनिया की सच्चाई सामने लाएगी

    नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की किताब 'एवरी चाइल्ड मैटर्स' ने मार्केट में दस्तक दे दी है। दिल्ली के कांस्टिलट्यूशनल क्लब के स्पीकर हॉल में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इसका विमोचन किया।

  • राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों का सम्मान

    राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों का सम्मान

    Respect of journalists on National Journalism Day

  • अभी तुम इश्क़ में हो का लोकार्पण

    अभी तुम इश्क़ में हो का लोकार्पण

    भोपाल। ललित कलाओं के प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं शोध की अग्रणी संस्था स्पंदन द्वारा सुपरिचित कथाकार, उपन्यासकार, कवि पंकज सुबीर के बहुचर्चित ग़ज़ल संग्रह ‘‘अभी तुम इश्क़ में हो’’ पर विचार

  • आरजे सुदीप्ता  यूट्यूब चैनल “मसाला चाय” पर पेश करेंगी पुस्तक समीक्षा

    आरजे सुदीप्ता यूट्यूब चैनल “मसाला चाय” पर पेश करेंगी पुस्तक समीक्षा

    वाराणसी की रहने वाली आरजे सुदीप्ता बीएचयू से जर्नलिज्म करने के बाद कई एफएम रेडियो में काम करने के बाद अब नई शुरुआत की है। अब वो अपने यूट्यूब चैनल मसाला चाय पर किताबो की समीक्षा पेश करेंगी।

  • पत्रकारिता के दार्शनिक आयाम का आधार है ‘आदि पत्रकार नारद का संचार दर्शन’

    पत्रकारिता के दार्शनिक आयाम का आधार है ‘आदि पत्रकार नारद का संचार दर्शन’

    भारत में प्रत्येक विधा का कोई न कोई एक अधिष्ठाता है। प्रत्येक विधा का कल्याणकारी दर्शन है। पत्रकारिता या कहें संपूर्ण संचार विधा के संबंध में भी भारतीय दर्शन उपलब्ध है। देवर्षि नारद का संचार दर्शन हमारे आख्यानों में भरा पड़ा है। हाँ, यह और बात है कि वर्तमान में संचार के क्षेत्र में 'भारतीय दर्शन' की उपस्थिति दिखाई नहीं देती है। उसका एक कारण तो यह है कि लंबे समय तक संचार माध्यमों पर कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को दबदबा रहा है। यह उजागर तथ्य है कि कम्युनिस्टों को 'भारतीय दर्शन' स्वीकार नहीं, वह प्रत्येक विधा को कार्ल माक्र्स या फिर विदेशी विचारकों के चश्मे से देखते हैं। अब यह स्थिति बदल रही है। देशभर में विभिन्न विषयों को भारतीय दृष्टिकोण से देखने की एक परंपरा विकसित हो रही है। उन लोगों को प्रोत्साहन मिल रहा है, जो ज्ञान-विज्ञान ए

  • कौन थे जनरल थिमैया, जिन्हें नेहरूजी और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन ने अपमानित किया था

    कौन थे जनरल थिमैया, जिन्हें नेहरूजी और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन ने अपमानित किया था

    बताया गया है कि चीन के मोर्चे पर भारत की नीतियों से शीर्ष स्‍तर पर मतांतर था. उसी कड़ी में रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन और थिमैया की मीटिंग हुई. वहां पर मेनन ने जनरल से कहा कि वह अपनी बात प्रधानमंत्री से सीधे कहने के बजाय पहले उनसे साझा कर मामले को इसी स्‍तर पर सुलझाएं. इसके साथ ही यह कहते हुए मेनन ने मीटिंग खत्‍म कर दी कि यदि मसले सार्वजनिक हुए तो उसके राजनीतिक प्रभाव की कीमत चुकानी होगी. इसके तत्‍काल बाद थिमैया ने इस्‍तीफा दे दिया।

  • मुख्यमंत्री ने किया ‘विचार प्रवाह‘ का विमोचन

    मुख्यमंत्री ने किया ‘विचार प्रवाह‘ का विमोचन

    रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिला मुख्यालय राजनांदगांव में श्री गौतम पारख की पुस्तक ‘विचार प्रवाह‘ का विमोचन किया। उन्होंने लेखक श्री पारख के व्यक्तित्व और कृतित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री पारख ने इस पुस्तक में अपने विचारों को बड़ी बेबाकी से प्रस्तुत किया है। श्री पारख में संत कबीर की तरह खरी-खरी बात कहने का साहस नजर आता है। लेखक सांसारिक जीवन में है और आजीविका के लिए व्यवसाय भी करते है लेकिन भीतर से उनका हृदय संन्यासी की तरह है।

  • रूमानियत और मधुर प्रेम की जो दुनियाः अभी तुम इश्क़ में हो

    रूमानियत और मधुर प्रेम की जो दुनियाः अभी तुम इश्क़ में हो

    "अकाल में उत्सव" "ये वो सहर तो नहीं" जैसे सामाजिक सरोकारों पर आधारित उपन्यास लिखने वाले पंकज सुबीर जी "कितने घायल कितने बिस्मिल" "रेपिश्क" जैसी देह के इस पार और उस पार गहरे अहसासों को खंगालती कहानियाँ लिखने वाले पंकज सुबीर "कसाब एट द रेट ऑफ यरवदा डॉट को डॉट इन" जैसी आतंकवाद की जड़ों को ढूंढती कहानी लिखने वाले पंकज सुबीर जब एक नई किताब लेकर आते हैं जिसका नाम हो "अभी तुम इश्क. में हो" तो हैरानी और जिज्ञासा एक साथ होती है,कि क्या लिखा होगा ? ज्यादा आश्चर्य जब होता है जब बुक हाथ में लेने पर मालूम होता है कि

Back to Top