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पुस्तक चर्चा
 

  • चिपको आंदोलन ने  एक नया इतिहास बनाया

    चिपको आंदोलन ने एक नया इतिहास बनाया

    चिपको आंदोलन की आज 45वीं वर्षगांठ है. इस मौके पर गूगल ने एक खूबसूरत डूडल इसे समर्पित किया है. साथ ही इस आंदोलन के बारे में गूगल ने लिखा है कि यह एक ‘ईको-फेमिनिस्ट’ आंदोलन था जिसका पूरा ताना-बाना महिलाओं ने ही बुना था.

  • दीपक चोऋषिया की पुस्तक कूड़ा धन का विमोचन किया श्रीमती सुमित्रा महाजन ने

    दीपक चोऋषिया की पुस्तक कूड़ा धन का विमोचन किया श्रीमती सुमित्रा महाजन ने

    वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया न्यूज़ चैनल के मुख्य संपादक दीपक चौऋषिया की पुस्तक 'कूड़ा धन' का मंगलवार की शाम कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान बतौर अतिथि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के पर फूलों की माला अर्पित करने और दीप प्रज्जवलित करने के साथ की गई।

  • डॉ. रमन सिंह द्वारा शोध पत्रिका  ‘मेधा’ के 22वें अंक का का विमोचन

    डॉ. रमन सिंह द्वारा शोध पत्रिका ‘मेधा’ के 22वें अंक का का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने निवास कार्यालय में संस्कृत शोध पत्रिका ‘मेधा’ के 22वें अंक का विमोचन किया। इसका प्रकाशन शासकीय दूधाधारी श्रीराजेश्री महन्त वैष्णवदास स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय द्वारा किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह महाविद्यालय संस्कृत भाषा का प्रमुख शोध केन्द्र भी है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गणेश कौशिक, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती राधा पाण्डेय, उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. किरण गजपाल, शोध पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सत्येन्दु शर्मा, संपादक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा और अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव तिवारी इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने शोध पत्रिका के प्रकाशन पर सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस पत्रिका में संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में वेद, ज्योतिष, व्याकरण, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं।

  • ‘श्रीराम संस्कृति की झलक’ पुस्तक का विमोचन

    ‘श्रीराम संस्कृति की झलक’ पुस्तक का विमोचन

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने निवास पर ‘श्रीराम संस्कृति की झलक’ पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक पूर्व विधायक श्री राजेश्री डॉ. महंत राम सुन्दर दास हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि 946 पृष्ठों की इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के सभी मंदिरों की स्थापत्य कला, मंदिर के रख-रखाव, पूजा के विधान तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न धार्मिक पर्वों और व्रतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।

  • श्री राम नाईक के संस्मरणों की पुस्तक  ‘चरैवेति! चरैवेति को पुरस्कार

    श्री राम नाईक के संस्मरणों की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति को पुरस्कार

    महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा मराठी भाषा गौरव दिन के अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक को उनके मराठी संस्मरण संग्रह ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ को लक्ष्मीबाई तिलक पुरस्कार तथा रुपये एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। मुंबई में आयोजित समारोह में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री विनोद तावड़े ने यह अवार्ड देकर राज्यपाल को सम्मानित किया।

  • वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की किताब देखकर प्रधानमंत्री ने जताई ये इच्छा…

    वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की किताब देखकर प्रधानमंत्री ने जताई ये इच्छा…

    पद्मश्री पुरस्‍कार से सम्‍मानित वरिष्‍ठ पत्रकार आलोक मेहता ने ‘नमन नर्मदा’ नाम से अंग्रेजी में एक किताब लिखी है। 105 पेज की इस किताब में 1312 किलोमीटर लंबी नदी के 80 रंगीन फोटोग्राफ भी हैं, जिनमें से कई तो दुर्लभ किस्म के हैं। उनकी किताब शुभी पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की गई है।

  • देश के गुमनाम नायकों पर पत्रकार विष्णु शर्मा ने लिखी शानदार पुस्तक

    देश के गुमनाम नायकों पर पत्रकार विष्णु शर्मा ने लिखी शानदार पुस्तक

    इतिहास यूं तो हमेशा से ही विवादों से घिरा रहता है, इतिहास का एक हीरो किसी के लिए हीरो होता है तो दूसरी जमात उसकी ऐतिहासिक खामियां ढूंढ कर उसकी छवि खराब करने की कोशिश में लग जाती है। अकबर, राणा प्रताप, सावरकर और गांधीजी तक इसके शिकार रहे हैं। ऐसे में नई पीढ़ी, जो इतिहास की स्कॉलर नहीं है, काफी कनफ्यूज्ड रहती है। ऐसे दौर में पॉजिटिव नजरिए से इतिहास लिखना एक मुश्किल काम है। विष्णु शर्मा ने अपनी किताब ‘इतिहास के गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएं’ में ये प्रयास किया है।

  • अमरीश पुरीः  परदे पर जिनकीमौजूदगी ही दर्शकों में सिहरन पैदा कर देती थी

    अमरीश पुरीः परदे पर जिनकीमौजूदगी ही दर्शकों में सिहरन पैदा कर देती थी

    अमरीश पुरी अपनी आत्मकथा में जिक्र करते हैं कि संघ का सदस्य रहने के दौरान ही उन्होंने यह पक्का इरादा कर लिया था कि वे फिल्मों में कभी काम नहीं करेंगे। हिंदी सिनेमा के महानतम खलनायक अमरीश पुरी कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य भी थे।

  • ‘संघ और समाज’ के आत्मीय संबंध को समझने में मदद करते हैं मीडिया विमर्श के दो विशेषांक

    ‘संघ और समाज’ के आत्मीय संबंध को समझने में मदद करते हैं मीडिया विमर्श के दो विशेषांक

    लेखक एवं राजनीतिक विचारक प्रो. संजय द्विवेदी के संपादकत्व में प्रकाशित होने वाली जनसंचार एवं सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित पत्रिका 'मीडिया विमर्श' का प्रत्येक अंक किसी एक महत्वपूर्ण विषय पर समग्र सामग्री लेकर आता है। ग्यारह वर्ष की अपनी यात्रा में मीडिया विमर्श के अनेक अंक उल्लेखनीय हैं- हिंदी मीडिया के हीरो, बचपन और मीडिया, उर्दू पत्रकारिता का भविष्य, नये समय का मीडिया, भारतीयता का संचारक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति अंक, राष्ट्रवाद और मीडिया इत्यादि। मीडिया विमर्श का पिछला (सितम्बर) और नया (दिसम्बर) अंक 'संघ और समाज विशेषांक-1 और 2' के शीर्षक से हमारे सामने है। यूँ तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) सदैव से जनमानस की जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। क्योंकि, संघ के संबंध में संघ स्वयं कम बोलता है, उसके विरोधी एवं मित्र अधिक बहस करते हैं। इस कारण संघ के संबंध में अनेक प्रकार के भ्रम समाज में हैं। विरोधियों ने सदैव संघ को किसी 'खलनायक' की तरह प्रस्तुत किया है। जबकि समाज को संघ 'नायक' की तरह ही नजर आया है। यही कारण है कि पिछले 92 वर्ष में संघ 'छोटे से बीज से वटवृक्ष' बन गया। अनेक प्रकार षड्यंत्रों और दुष्प्रचारों की आंधी में भी संघ अपने मजबूत कदमों के साथ आगे बढ़ता रहा।

  • तीस साल की साधना का प्रतिफल है पं. दीनदयाल उपाध्याय संपूर्ण वाङ्मय

    तीस साल की साधना का प्रतिफल है पं. दीनदयाल उपाध्याय संपूर्ण वाङ्मय

    कोई इंसान कितना जुनूनी हो सकता है और अपने जुनून के लिए जीवन के पूरे तीस साल दाँव पर लगा दे उसका साक्षात उदाहरण है एकात्म मानव अनुसंधान एवँ विकास प्रतिष्ठान के डॉ. महेश शर्मा। पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. महेश शर्मा ने तीस साल के अनथक प्रयासों के बाद पं. दीनदयाल उपाध्याय के शताब्दी वर्ष में स्वर्गीय दीनदयाल उपाध्याय वाङ्मय के 15 खंडों में प्रकाशित कर एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज इस देश को दिया है जिसमें पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अपने समकालीन भारत से लेकर आने वाले दौर में भारत के समक्ष चुनौती बनकर खड़े रहने वाले खतरों से आगाह किया था। एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत देने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सामाजिक-राजनैतिक दर्शन के लिए जाना जाता है। इस संपूर्ण खंड का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन किया है।

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