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  • सत्ता के मद में विवेक का अपहरण कब तक?

    सत्ता के मद में विवेक का अपहरण कब तक?

    शिवसेना के सांसद रवींद्र गायकवाड़ द्वारा एयर इंडिया के एक 60 वर्षीय कर्मचारी से मारपीट करने, चप्पलों से पीटने एवं गाली-गलौच करने की घटना ने न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को शर्मसार किया है, बल्कि मानवीय मूल्यों को भी नजरअंदाज किया है।

  • परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है ?

    परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है ?

    सब जानते हैं कि जल जीवन का पर्याय है, पर उसी जल के जीवन के लिए सार्थक हस्तक्षेप से जी चुराने की आदत से बाज़ नहीं आते हैं। हम मानते हैं जरूर कि जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है, हम जानते हैं कि जल हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है,

  • हिंदू-मुस्लिम एकता की भव्य इमारत खड़ी करने का अवसर

    हिंदू-मुस्लिम एकता की भव्य इमारत खड़ी करने का अवसर

    भारत के स्वाभिमान और हिंदू आस्था से जुड़े राम मंदिर निर्माण का प्रश्न एक बार फिर बहस के लिए प्रस्तुत है। उच्चतम न्यायालय की एक अनुकरणीय टिप्पणी के बाद उम्मीद बंधी है कि हिंदू-मुस्लिम राम मंदिर निर्माण के मसले पर आपसी सहमति से कोई राह निकालने के लिए आगे आएंगे। राम मंदिर निर्माण पर देश में एक सार्थक और सकारात्मक संवाद भी प्रारंभ किया जा सकता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह राम मंदिर निर्माण के मसले पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं, यदि दोनों पक्ष न्यायालय के बाहर सहमति बनाने को राजी हों। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक संवेदनशील और भावनाओं से जुड़ा मसला है। अच्छा यही होगा कि इसे बातचीत से सुलझाया जाए। निश्चित ही मुख्य न्यायमूर्ति का परामर्श उचित है। दोनों पक्षों को उदार मन के साथ इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

  • बिहार की ग्राम कचहरी का एक प्रत्यक्ष अनुभव – डॉ. चंद्रशेखर प्राण

    बिहार की ग्राम कचहरी का एक प्रत्यक्ष अनुभव – डॉ. चंद्रशेखर प्राण

    एक अगस्त, 2016 को तीसरी सरकार अभियान के एक कार्यक्रम के सिलसिले में बिहार राज्य में प्रवास के दौरान वहां की पंचायत सरकार व्यवस्था के अंतर्गत संचालित न्याय पंचायत की न्यायिक कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला | न्याय पंचायत बिहार राज्य में ‘ग्राम कचहरी’ के नाम से संबोधित किया जाता है| ‘ग्राम कचहरी’ के अनुभव को आप के साथ बांटना चाहता हूँ |

  • अमरिंदर सिंह की आशिकी में आरुशा का आलम

    अमरिंदर सिंह की आशिकी में आरुशा का आलम

    कैप्टन अमरिंदर सिंह गजब के शौकीन आदमी हैं। और शौक की अपनी कोई आचार संहिता नहीं होती। लोकलुभावन जलवे बिखेरनेवाले किसी बहुत बड़े फिल्म अभिनेता को लजीज खाना बनाने का शौक हो सकता है, और दुनिया भर को योग सिखानेवाला कोई संत नोटों में खेलने का शौकीन हो सकता है।

  • कट्टरपंथ की बुरी नजर से कला-संस्कृति को बचाना होगा

    कट्टरपंथ की बुरी नजर से कला-संस्कृति को बचाना होगा

    असम के 46 मौलवियों की कट्टरपंथी सोच को 16 वर्षीय गायिका नाहिद आफरीन ने करारा जवाब दिया है। नाहिद ने कहा है कि खुदा ने उसे गायिका का हुनर दिया है, संगीत की अनदेखी करना मतलब खुदा की अनदेखी होगा। वह मरते दम तक संगीत से जुड़ी रहेंगी और वह किसी फतवे से नहीं डरती हैं। इंडियन आइडल से प्रसिद्ध हुई नाहिद आफरीन ने हाल में आतंकवाद और आईएसआईएस के विरोध में गीत गाए थे। आशंका है कि कट्टरपंथियों को यह बात चुभ गई होगी। सुरीली आवाज का गला घोंटने के लिए कट्टरपंथियों ने 46 फरमान जारी करते हुए नाहिद को

  • लावारिस बच्चों के लिए बदलाव की बयार

    लावारिस बच्चों के लिए बदलाव की बयार

    सड़कों पर रहने वाले लावारिस नन्‍हे बच्‍चों के लिए अब प्रसन्‍न होने का समय है। आमतौर पर ‘स्‍ट्रीट चिल्‍ड्रन (लावारिस बच्‍चे)’ कहे जाने वाले 20 लाख से अधिक भारतीय बच्‍चे सुरक्षित देखभाल,पोषण, स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा के बगैर जीते हैं। मेरे लिए वे सड़क पर नन्‍हें फूलों की तरह हैं, जो हमारी सामूहिक उदासीनता के बावजूद जिंदा हैं।

  • नये भारत की दस्तक को पहचाने

    नये भारत की दस्तक को पहचाने

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणामों ने देश को अचम्भित कर दिया। उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड में भाजपा की शानदार जीत ने स्वतंत्रता के बाद नया इतिहास बनाया है। इस यादगार महाजीत के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा मुख्यालय में ‘‘नया भारत’ उभरने की बात कही है और उसे वे विकास का पक्षधर मानते हंै।

  • क्या आयुर्वेद दवाओं में स्टेरॉइड्स मिले होते हैं?

    सर्वप्रथम हम आयुर्वेद को लेकर उत्पन्न भ्रांतियों के काल को 3 भागों में बाँटते हैं और उस पर चर्चा करते हैं:

  • भारत का पहला रेड पायलट समुदायः मावफलांग के खासी

    भारत का पहला रेड पायलट समुदायः मावफलांग के खासी

    मेघालय राज्य की राजधानी शिलांग से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित है ज़िला-ईस्ट खासी हिल्स। यहां की जयंतिया पहाड़ियों के बीच सिमटी है घाटी - मावफलांग। समुद्र से 5,000 फीट की ऊंचाई पर बसे मावफलांग के पवित्र जंगलों की दास्तानें काफी पुरानी व दिलचस्प है। दैवशक्ति लबासा की निगाह में पवित्र जंगल का बुरा करना अथवा जंगल के भीतर बुरा सोचना-बोलना किसी बड़े अपराध से कम नहीं। इसकी सजा अत्यंत घातक होती है। इसी विश्वास और जंगल पर सामुदायिक हकदारी ने लंबे अरसे तक मावफलांग के जंगल बचाये रखे।

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