Thursday, February 22, 2024
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Homeकवितामिल भी न सके यार होली में

मिल भी न सके यार होली में

न रंग है न नूर का निखार इस बार यार होली में

जारी है करोना का प्रहार इस बार यार होली में

घुमाते रहो फ़ोन सभी रिश्तेदारों और मित्रों को

जमे रहो घर में चुपचाप इस बार यार होली में

रंग खेलने में जान का जोखिम है सम्भल के रहना

क्यों बनना करोना का शिकार इस बार यार होली में

उदास मन है अगर कोई आया नहीं गुजिया खाने

कुरियर कर दो यह उपहार इस बार यार होली में

गले नहीं मिलना हुआ तो दिल पे मत लेना यारों

मिलेंगे और भी मौक़े अगली बार यार होली में

प्रदीप गुप्ता

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एक निवेदन

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