" सृजन के सरोकार और जन मानस " विषय पर कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी का व्याख्यान सम्पन्न
कोटा, श्री करनी नगर विकास समिति के आश्रय भवन दिवा संगम की साप्ताहिक गोष्ठी में " सृजन के सरोकार और जन मानस " विषय पर व्याख्यान सम्पन्न हुआ। मुख्य वक्ता कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी रहे तथा प्रो. हरिमोहन शर्मा ने अध्यक्षता की। वक्ता का परिचय वरिष्ठ बाल साहित्यकार एवं कवि विष्णु शर्मा हरिहर ने दिया। सत्र का संचालन दिवा संगम के निरंजन महबूबानी ने किया।
अपने व्याख्यान में वक्ता विजय जोशी ने कहा कि सृजन सदैव अपने समय का साक्षी होकर तत्कालीन परिस्थितियों और स्थितियों को परखता हुआ दिशा प्रदान करता है। यही दिशा उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों का वह सोपान होती है जहाँ मनुष्य अपने जीवन मूल्यों के साथ नैतिक दायित्वों के प्रति सजग और क्रियाशील रहता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की यह सजगता एवं क्रियाशीलता सृजनात्मक सन्दर्भों के विकास तथा उन्हें समृद्ध करने का मार्ग प्रशस्त करती है। जहाँ व्यक्ति को अपने वैचारिक धरातल पर जीवन और जगत् के विविध आयामी प्रसंगों से साक्षात्कार होता है और वह अपने धारित प्रवाह को अपने विवेक एवं बुद्धि लब्धतता के साथ वर्तमान सन्दर्भों तथा पारम्परिक मूल्यों से समन्वित करता है। यही नहीं वह अपने स्व को प्रगतिशीलता की ओर अग्रसर करता हुआ रचनात्मक और सकारात्मक वातावरण निर्मिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता।
विजय जोशी ने आगे कहा कि वातावरण की यह निर्मिती व्यक्ति के स्वयं से आरम्भ होती है और समकालीन पीढ़ी तक अपनी पहुँच स्थापित करते हुए उसे संस्कारित ही नहीं करती अपितु दिशा निर्देशित भी करती है। इस माने में कि तेजी से विकसित और समृद्ध होते तकनीक के इस युग में जहाँ नवाचार के साथ विविधता को प्राथमिकता के साथ अंगीकार करते हुए अपने अनुभवों को व्यवहारिक रूप से स्वीकारने तथा सामाजिक रूप से जागरूक एवं रचनात्मक पीढ़ी अपनी सोच और विचार के साथ आगे बढ़ रही है।
अपने उद्बोधन में प्रो. हरिमोहन शर्मा ने सृजन के विविध पक्षों एवं जन सरोकार पर उसकी महत्ता को प्रतिपादित किया। साहित्यकार विष्णु शर्मा हरिहर ने सृजन, सरोकार और जन मानस तीनों के अन्तर्सम्बन्धों पर प्रकाश डालते हुए वक्ता विजय जोशी का परिचय देते हुए उनके कथा एवं कथेतर साहित्य तथा उसकी अन्तर्वस्तु पर विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर समिति की ओर से प्रबुद्ध वरिष्ठजनों के लिए आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता विजय जोशी का दिवा संगम के प्रो. हरिमोहन शर्मा एवं श्री पृथ्वीराज सेन द्वारा अभिनंदन - प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया।





