आप यहाँ है :

दुनिया मेरे आगे
 

  • काशी विश्वनाथ मंदिर के बनने-उजड़ने की कहानी

    काशी विश्वनाथ मंदिर के बनने-उजड़ने की कहानी

    राम-कथा ने मेरा हर संदेह दूर कर दिया l मैं जान गया, “मेरे यहाँ होने का उद्देश्य क्या है। मैं काशी पर हुए अत्याचार की गवाही देने के लिए समाधि लगाए बैठा हूँ। भारत-भूमि में निवास करने वाले लोगों में धर्म और सामर्थ्य के जागरण के लिए तप कर रहा हूँ।

  • टूटते संबंध, बढ़ता अवसाद

    टूटते संबंध, बढ़ता अवसाद

    मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद से निकलने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने परिजनों एवं मित्रों के साथ समय व्यतीत करे. किसी भी समस्या या संकट के समय परिजनों से बात करे. स्वयं को अकेला न समझे. सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से बात करे. परिजनों को भी चाहिए

  • हिमालय सी अटल है भारत -नेपाल मैत्री

    हिमालय सी अटल है भारत -नेपाल मैत्री

    प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान भारत और नेपाल के बीच छह समझौते हुए हैं जिनमें भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और लुंबिनी बौद्ध विश्व विद्यालय के बीच डा. अम्बेडकर पीठ को स्थापित करने के लिए करार हुआ। नेपाली विश्व विद्यालय में भारतीय अध्ययन पीठ बनाने,

  • क्यों  धधक रहा है  श्रीलंका

    क्यों धधक रहा है श्रीलंका

    दुर्भाग्य से इन बातों से कोई भी सीख न लेते हुए दिल्ली और पंजाब जैसे राज्य, श्रीलंका की दिशा मे बढ रहे हैं. *श्रीलंका ने आर्थिक स्थिती की चिंता न करते हुए लोक लुभावन कदम उठाएं. कर कम किये. सब्सिडी बढाई.

  • हिन्दुओं की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है?

    हिन्दुओं की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है?

    आखिर इस्लाम को अपनी जड़े ज़माने का असम में अवसर मिल गया। जो काम पिछले 500 वर्षों में इस्लामिक तलवार नहीं कर पायी वह काम एक सूफी ने कर दिखाया। धीरे धीरे हज़ारों लोगों को इस्लाम में दीक्षित कर अज़ान पीर मर गया।

  • बँटवारे में कलकत्ता भारत से अलग हो जाता यदि महावीर गोपाल पाठ (मुखर्जी ) न होते…

    बँटवारे में कलकत्ता भारत से अलग हो जाता यदि महावीर गोपाल पाठ (मुखर्जी ) न होते…

    मैंने उत्तर दिया, 'इन भुजाओं से मैंने अपने क्षेत्र की महिलाओं को बचाया, मैंने लोगों को बचाया। मैं उन्हें सरेंडर नहीं करूंगा। *मैंने कहा, महान कलकत्ता हत्याकांड के दौरान गांधीजी कहाँ थे? तब वह कहाँ थे जब हिन्दू मारे जा रहे थे?

  • वह भी एक दौर था, ये भी एक दौर है

    वह भी एक दौर था, ये भी एक दौर है

    मेरी कई सारी रचनाएं पिछले दो-तीन दशकों के दौरान हिंदी की प्रसिद्ध पत्रिकाओं में छपी हैं।कुछ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में थीं।उनको अगर आज के पाठक के लिये पुनः प्रस्तुत किया जाय तो वह आनंदित ही होगा।

  • आदिवासियों के बीच अविस्मरणीय पल….

    आदिवासियों के बीच अविस्मरणीय पल….

    आयुक्त महोदय को 19 नवंबर 1986 को मिले इंद्रागांधी प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार के उपलक्ष में विभाग के सभागार में उनका स्वागत और सम्मान का।

  • म.प्र. में दम तोड़ती बाल विवाह जैसी कुरीतियां

    म.प्र. में दम तोड़ती बाल विवाह जैसी कुरीतियां

    यह बेहद सुकून की खबर है कि अब मीडिया में बेटियों को जगह दी जाने लगी है. गेस्टराइटर से लेकर संपादक तक बेटियां बन बैठी हैं. विशेषांक बेटियों पर पब्लिश किया जा रहा है. राज्य, शहर और गांव से महिला प्रतिभाओं को सामने लाकर उनका परिचय कराया जा रहा है.

  • गाँधी के  मुस्लिम तुष्टिकरण की भारी कीमत  हिंदू आज भी चुका रहे हैं

    गाँधी के मुस्लिम तुष्टिकरण की भारी कीमत हिंदू आज भी चुका रहे हैं

    ख्वाजा हसन निज़ामी दरवेश पत्र के माध्यम से मुसलमानों को भड़का रहा था। इन्द्र विद्यावाचस्पति ने स्वामी जी मुस्लिम मोहल्लों से रोज़ाना भ्रमण करने से मना भी किया। इस दौरान बनारस का दौरा कर स्वामी जी लौटे तो उन्हें निमोनिया ने घेर लिया।

Back to Top