आप यहाँ है :

पुस्तक चर्चा
 

  • मन की बात  ” कुछ अपनी कुछ उनकी “

    मन की बात ” कुछ अपनी कुछ उनकी “

    अपने स्व से मिली प्रेरणा और चतुर्दिक परिवेश से प्राप्त संवेदनाओं के समन्वित स्वरों का तरंगित आयाम जब वैचारिक रूप से साकार होता है तो सृजन सन्दर्भों के विविध पक्ष उभरने लगते हैं। यही सन्दर्भ सृजन मूल्यों को समर्पित व्यक्ति के लिए सामाजिक,सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवेश का निर्माण करते हैं और वह अपने पथ पर अनवरत बढ़ता हुआ प्रेरणात्मक पुञ्ज प्रदान करता है। इन्हीं सन्दर्भों का बतियाता दस्तावेज़ है कृष्णा कुमारी की कृति - "कुछ अपनी कुछ उनकी " साक्षात्कार की यह कृति मात्र प्रश्नोत्तरी नहीं है वरन् व्यक्तित्व-कृतित्व का वह वार्तालाप है जो भीतर की चेतना और बाह्य परिवेश की संवेदना का विवेचन प्रस्तुत कर संवाद स्थापित करता है और प्रेरणात्मक अनुभवों को साझा करता है।

  • नज़ीर ‘बनारसी’ की 113वीं जयंती पर ‘नज़ीर बनारसी यादों के आईने में’ पुस्तक का विमोचन

    बेनज़ीर थे नज़ीर 'बनारसी' - संकट मोचन मंदिर महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र नज़ीर 'बनारसी' की शायरी व कविताएँ आगामी पीढ़ियों के लिए धरोहर - पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव वाराणसी। गंगा-जमुनी तहजीब और बनारसी मिजाज के मशहूर शायर नज़ीर 'बनारसी' की 113वीं जयंती के उपलक्ष्य में नज़ीर बनारसी एकेडमी और डॉ. अमृत लाल इशरत मेमोरियल सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में नागरी नाटक मंडली, वाराणसी में आयोजित समारोह में 'नज़ीर बनारसी यादों के आईने में' पुस्तक का विमोचन संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र, मुख्य अतिथि पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव और गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया।

  • ‘सीआईयू क्रिमिनल्स यूनिफॉर्म’: इसका हर पन्ना किसी फिल्म की तरह आँखों से गुजरता है

    ‘सीआईयू क्रिमिनल्स यूनिफॉर्म’: इसका हर पन्ना किसी फिल्म की तरह आँखों से गुजरता है

    अपराध जगत को लेकर हिंदी और अंग्रेजी में ऐसे तो कई पुस्तकें आई है, लेकिन मुंबई में जाने माने उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के सामने एक अज्ञात वाहन में जिलेटिन रखने और इसके बाद के रोमांचक, खौफनाक, रहस्यमयी और हर पल एक नई साजिश को उजागर करने वाले घटनाक्रम को लेकर जाने माने पत्रकार संजय सिंह और राकेश त्रिवेदी की पुस्तक ‘सीआईयू क्रिमिनल्स यूनिफॉर्म’ एक ऐसी पुस्तक है जो पाठकों को अलपराध जगत से लेकर पुलिस की अंदरूनी व्यवस्था, राजनीतिक षड़यंत्र, घात-प्रतिघात की एक रहस्यमयी दुनिया की सैर कराती है।

  • देश विभाजन का सच समझाती पुस्तक

    देश विभाजन का सच समझाती पुस्तक

    वैद्य गुरुदत्त का जन्म 1894 में हुआ था और वे लाहौर के पास के रहने वाले थे। उन्होंने न केवल अंग्रेजविरोधी आंदोलनों को नजदीक से देखा, बल्कि वे उसमें सहभागी भी रहे।

  • इतिहासविद् फ़िरोज़ अहमद की “हाड़ौती इतिहास लेखमाला ” का विमोचन

    इतिहासविद् फ़िरोज़ अहमद की “हाड़ौती इतिहास लेखमाला ” का विमोचन

    मुख्य अतिथि महाराव इज्यराज सिंह जी ने कहा कि अपने क्षेत्र विशेष को जानने और समझने के लिए यह महत्वपूर्ण पुस्तक है।

  • बहस का मंच बनने को तैयार एक जंगल बुक: वाइल्डलाइफ इण्डिया@50

    बहस का मंच बनने को तैयार एक जंगल बुक: वाइल्डलाइफ इण्डिया@50

    राजनीतिक गलियारों से लेकर समाज की पर्यावरण मंचों पर यह सवाल आए दिन उठता रहता है। आज के समय में समाज के सहयोग बिना जंगल सुरक्षा की कल्पना कितनी व्यावहारिक है ?

  • डॉ. मनीष श्रीवास्तव की पुस्तक शृंखला क्रांतिदूत के चौथे और पांचवें भाग का विमोचन

    डॉ. मनीष श्रीवास्तव की पुस्तक शृंखला क्रांतिदूत के चौथे और पांचवें भाग का विमोचन

    उत्तर प्रदेश, झांसी के मूल निवासी डॉ. मनीष श्रीवास्तव पिछले पंद्रह वर्षों से मैं इंडोनेशिया में कार्यरत हैं। कार्यक्रम में लेखक डॉ. मनीष श्रीवास्तव को सर्वभाषा ट्रस्ट की और से सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया।

  • “भारतीय स्थापत्य की अमूल्य निधि जैन मंदिर” पुस्तक का लोकार्पण

    “भारतीय स्थापत्य की अमूल्य निधि जैन मंदिर” पुस्तक का लोकार्पण

    मुख्य अथिति विजयवर्गीय ने कहा कि धार्मिक पर्यटन और आस्था स्थलों के बारे में खोजपूर्ण लेखन एक साधना और तपस्या है। पुस्तक में देश भर के जेन मंदिरों को पर्यटन आकर्षण से जोड़ते हुए भारतीय स्थापत्य के संदर्भ में डॉ. सिंघल ने जिस करिश्माई अंदाज़ में लेखन किया है यक़ीनन यह ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया है।

  • आर्यों ने छुआछूत मिटाई

    आर्यों ने छुआछूत मिटाई

    ये घटना घरोंडे की आज से लगभग 70 -80 साल पुरानी है। स्वामी भीष्म जी के पास आश्रम में पं. चन्द्रभानु जी व 16 विद्यार्थी थे।

  • रेखा पीएम पंचोली के उपन्यास “लोक डाउन एंड कोचिंग सिटी कोटा” का लोकार्पण

    रेखा पीएम पंचोली के उपन्यास “लोक डाउन एंड कोचिंग सिटी कोटा” का लोकार्पण

    मुख्य वक्ता विजय जोशी ने कहा कि साहित्यकार सीधे सीधे जनसरोकार से जुड़ा हुआ रहता है।

Get in Touch

Back to Top