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विश्व के वर्तमान परिदृश्य में गांधीजी के विचार सबसे अधिक प्रासंगिक-कुमार प्रशांत

कोटा। शांति एवं अहिंसा निदेशालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय संभागीय गांधी जीवन दर्शन प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ सोमवार को नगर विकास न्यास के ऑडिटोरियम में देश के प्रसिद्ध गांधीवादी विचारकों द्वारा किया गया। समारोह में गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, मैग्सेसे पुरूस्कार विजेता डॉ. राजेन्द्रसिंह, शांति एवं अहिंसा निदेशालय के निदेशक मनीष शर्मा, संभागीय आयुक्त दीपक नन्दी एवं कोटा के जिला संयोजक पंकज मेहता सहित देश के विख्यात गांधीवादी विचारक उपस्थित रहे।

कुमार प्रशांत ने कहा कि गांधीजी का जीवन दर्शन वर्तमान में पूरे विश्व में प्रासंगिक है। दुनियाभर की घटनाओं की तरफ देखते हैं तो गांधीजी के विचार ही विश्व में अहिंसा एवं शांति स्थापित करने में मार्ग दिखलाते हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी कहते थे समाज के अन्तिम छोर तक बैठे व्यक्ति तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे। समाज में भाईचारा एवं सर्वधर्म समभाव बना रहे तभी सही मायने में तरक्की होगी। उन्होंने कहा कि गांधीजी का सत्याग्रह चुनने के लिए आज वर्तमान पीढ़ी को तीन वाक्य जीवन के आधार बनाने होंगे, सच बोलना सीखें, सच बोलने वालों का साथ दें तथा सच बोलने वालों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि कोई नागरिक यदि यह नहीं कर सकता उसे जीवन में गांधीजी के बताए मार्ग पर चलकर निर्णय लेना होगा कि गलत करने वालों का समर्थन नहीं करें।

डॉ. राजेन्द्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रपिता गांधी ने प्रकृति के सरंक्षण के लिए अलख जगाने कार्य किया वह आज भी जरूरत है। सत्य, अहिंसा के मार्ग पर चलकर बापू ने जो विचार दिए उनका प्रचार-प्रसार युवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक धर्म प्रकृति का संरक्षण देने वाला है, गांधीजी ने हमेशा प्रकृति संरक्षण व इंसान बनने की सीख लोगों को दी थी। उन्होंने कहा कि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें गांधीजी के विचारों को अपनाना होगा तभी सही मायने में मानवता व प्रकृति संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंच सकेगा।

गांव-ढाणी तक पहुंचाऐंगे विचार

मनीष शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से गांव-गांव तक गांधीजी के विचारों का प्रचार-प्रसार करने के साथ सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर पात्र लोगों की मदद करना है। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में गांधीजी के विचारों के द्वारा ही शांति, अहिंसा स्थापित कर विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को आव्हान किया कि वे अब जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत स्तर तक नागरिकों का चयन कर गांधीजी के विचारों का प्रचार-प्रसार करें।

संभागीय आयुक्त दीपक नन्दी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संभाग स्तर पर आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रमों से निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा मिलेगी तथा समाज में भाईचारा व शांति स्थापित होने से विकास की ओर तेजी से बढ़ेंगे। पूर्व कुलपति प्रो. बीएम शर्मा ने गांधीजी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शांति एवं अहिंसा निदेशालय एवं राज्य सरकार द्वारा स्थापित गांधी म्यूजियम को महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

जिला संयोजक पंकज मेहता ने कहा कि गांधीजी वर्तमान ही नहीं भविष्य भी है, उनके विचार आज विश्वभर में लोगों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। युवा पीढ़ी को गांधी जीवन दर्शन से रूबरू कराने से निश्चित रूप से समाज में सत्य, अहिंसा की भावनाओं का प्रबल किया जा सकता है। समारोह को गांधी आश्रम वर्धा से आए मनोज ठाकरे, प्रशान्त नागोसे, बारां जिले के संयोजक कैलाश जैन, बून्दी के संयोजक राजकुमार माथुर ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर अतिरिक्त कलक्टर राजकुमार सिंह, सीईओ जिला परिषद ममता तिवाड़ी, आयुक्त नगर निगम वासुदेव मालावत, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त नरेश मालव, गांधी जीवन दर्शन समिति के प्रदेश के सहसंयोजक हेमन्त धारीवाल, टोंक के संयोजक अनुराग गौत्तम, झालावाड़ की संयोजक मीनाक्षी चन्द्रावत, प्रशिक्षक बिजेन्द्र सिंह सिद्धू, संजय आचार्य, संदीप दीवाकर, रूपेन्द्र चंपावत सहित, गांधीवादी विचारक, संभाग के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण शिविर के अवसर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा गांधीजी की सम्पूर्ण जीवन यात्रा पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का डिजिटल एवं फ्लेक्स के माध्यम से प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में गांधीजी के जन्म से लेकर, शिक्षा प्राप्त करने, विदेश जाने तथा विभिन्न विचारकों, समाजसेवियों से सम्पर्क के दौरान के दुर्लभ छायाचित्रों का प्रदर्शन किया गया है। राष्ट्रपिता द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई गई भूमिका के विभिन्न अवसरों को भी छायाचित्रों के माध्यम से जीवंत किया गया है। गांधी शांति प्रतिष्ठान के सौजन्य से तैयार इस प्रदर्शनी में गांधीजी के सम्पूर्ण जीवन यात्रा को डिजिटल माध्यम से भी प्रशिक्षणार्थियों को दिखलाया गया।

प्रशिक्षण शिविर में प्रातः 5 बजे से लेकर 9 बजे तक प्रकृति प्रार्थना, प्रभात फेरी एवं श्रमदान कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को गांधीजी के विचारों को आत्मसात् करने की प्र्रेरणा दी गई।

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