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प्रभु की दूरदृष्टि से पटरी पर आ रही है भारत की रेल

केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु स्वतंत्र भारत के अब तक के पहले रेल मंत्री हैं जो रेल यात्रियों और जन सामान्य से सीधे संवाद कायम कर भारतीय रेल का नक्शा बदलने के लिए प्रयत्नशील हैं और उन्हें अपने उद्देश्यों में कामयाबी भी मिलती दिखाई पड़ रही है।मिशन रफ़्तार के तहत राजधानी शताब्दी ट्रेनों में डबल इंजिन लगा कर उसकी रफ़्तार बढ़ाने और वर्तमान समय में 1 घण्टे से पहले पहुँचाने की कोशिश जल्द ही रंग लानेवाली है।अजमेर -दिल्ली के बिच शताब्दी ट्रेन में किये गए प्रयोग में रेल अधिकारीयों को 40 मिनिट का फायदा भी मिला है ।

स्वच्छता के प्रति अधिकारियों-कर्मचारियों से लेकर सामान्य रेलयात्रियों में भी जागरूकता लाने में प्रभु सफल हुए हैं।सोशल मिडिया पर सक्रिय रहकर श्री प्रभु ने रेल सेवाओं को मिल रहे प्रतिसाद की जानकारी भी प्राप्त करते हैं और रेल सेवाओं को उच्च श्रेणी का बनाने के लिए लोगों से मिल रही जानकारी भी इकट्ठा करते हैं।उनके द्वारा पिछले दिनों प्रस्तुत रेल बजट में इसका समावेश भी उन्होंने किया।कम्युनिटी नेटवर्क लोकल सर्विसेस अब 2900 ट्रेनों और 4500 स्टेशनों के सम्बन्ध में लोगों से प्राप्त अपने फीडबैक को रेल मंत्रालय द्वारा साझा करेगी।सुरक्षा,स्वच्छता,सुविधा,समय सुचिता के साथ ही अन्य सुविधाओं के सम्बन्ध में यात्री हजारों ट्रेनों और स्टेशनों का ऑनलाइन मूल्यांकन कर सकते हैं।

दशकों से भाई भतीजावाद के बाद भांजावाद के मकड़जाल में फंसकर भ्रष्टाचार के नित नए कीर्तिमान बनानेवाले रेल मंत्रालय से इन दो वर्षों में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं हुआ है।केंद्रीय मंत्री सीधे यात्रियों से जुड़ने का साहस कर रहा है ।इसके लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु की जितनी भी प्रशंसा की जाये ,कम है।

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