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26000 घंटे तक कटाई-घिसाई, 280 टन के विशाल ग्रेनाइट पत्थर से बनी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने एमबीए की पढ़ाई की। उसके बाद नौकरी भी… लेकिन 2008 में मूर्तिकार बनने के लिए अरुण योगीराज ने नौकरी छोड़ दी। वे मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल पर उनकी भव्य प्रतिमा का निर्माण भी योगीराज ने ही किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (8 सितंबर 2022) को राजपथ के पुनर्विकसित स्वरूप और नए नाम कर्तव्य पथ (Rajpath renamed Kartavya Path) का उद्घाटन करेंगे। साथ ही इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण भी किया जाएगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा को 280 मीट्रिक टन वजन वाले विशाल ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरा गया है।

मूर्तिकारों ने 26,000 घंटे के अथक कलात्मक प्रयासों से विशाल ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर 65 मीट्रिक टन वजन की इस प्रतिमा को तैयार किया है। काले रंग के ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित 28 फुट ऊँची यह प्रतिमा इंडिया गेट के समीप एक छतरी के नीचे स्थापित की जाएगी। संस्कृति मंत्रालय ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को इसकी जानकारी दी।

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, नेताजी (Netaji Subhas Chandra Bose) की इस प्रतिमा को पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक औजारों का उपयोग करके पूरी तरह हाथों से बनाया गया है। अरुण योगीराज के नेतृत्व में मूर्तिकारों के एक दल ने यह प्रतिमा तैयार की है। इस विशाल ग्रेनाइट पत्थर को तेलंगाना के खम्मम से 1,665 किमी दूर नई दिल्ली तक लाने के लिए 100 फुट लंबा 140 पहियों वाला ट्रक विशेष रूप से तैयार किया गया था।

MBA की पढ़ाई कर चुके अरुण योगीराज (Arun Yogiraj) पाँचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार हैं। वे मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। उनके पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए कार्य कर चुके हैं। एमबीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में भी काम किया, लेकिन 2008 में मूर्तिकार बनने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को तैयार इन्होंने और इनकी टीम ने ही किया है। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल पर उनकी भव्य प्रतिमा का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया था।

संस्कृति मंत्रालय के बयान में यह भी कहा गया है कि नेताजी की प्रतिमा को उसी जगह पर स्थापित किया जाएगा, जहाँ इस साल के प्रारंभ में पराक्रम दिवस (23 जनवरी) के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया था। इस होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर किया गया था।

बताया जा रहा है कि प्रतिमा का अनावरण आजाद हिंद फौज के पारंपरिक गीत “कदम कदम बढ़ाए जा” की धुन के साथ किया जाएगा। एक भारत-श्रेष्ठ भारत और अनेकता में एकता की भावना को प्रदर्शित करने के लिए देश के कोने-कोने से आए 500 नर्तकों द्वारा कर्तव्य पथ पर सांस्कृतिक उत्सव प्रदर्शित किया जाएगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री को इसकी झलक इंडिया गेट के समीप एम्फीथिएटर पर लगभग 30 कलाकारों द्वारा दिखाई जाएगी। ये कलाकार नासिक ढोल पथिक ताशा द्वारा ड्रमों के संगीत की धुनों पर संबलपुरी, पंथी, कालबेलिया, कारगाम और कच्छी घोड़ी जैसे आदिवासी लोक कला रूपों का प्रदर्शन करेंगे।

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