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हिंदी पखवाड़े का नवाचार से शुभारंभः “काव्यगोष्ठी हुई ट्रेन में, अगली गोष्ठी होगी विमान मेें”

अखिल भारतीय साहित्य परिषद ईकाई झालावाड़ और राजकीय हरिश्चंद्र सार्वजनिक जिला पुस्तकालय झालावाड़ के तत्वावधान में हिंदी दिवस पखवाड़े का शुभारंभ करते हुए नवाचार किया गया। रविवार को झालावाड़ से जूनाखेड़ा तक ट्रेन में परिषद् के पदाधिकारी और सदस्यगण, साहित्यकारों, कवियों एवं पुस्तकालयाध्यक्ष कैलाशचन्द राव द्वारा सामूहिक रूप से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी का डिब्बे के यात्रियों ने भी पूरा लुत्फ उठाया।

काव्य गोष्ठी का आरंभ नरेंद्र कुमार दुबे द्वारा सरस्वती वंदना ‘‘प्यार दे मां शारदे, मेरे मन के अंदर कूप में ज्ञान का विस्तार दे’’ के काव्यपाठ से हुआ। चेतन शर्मा ‘चेतन’ ने श्रृंगार गीत ‘मूंक संवेदन तुम्हारा’ सुनाया। राजेंद्र शांतेय द्वारा ‘जागो हे मेरे देश के युवकों’ जागरण गीत सुना कर तालियां बटोरी।

राकेश नैयर द्वारा ‘काव्यगोष्ठी आज हुई ट्रेन में, अगली गोष्ठी होगी एरोप्लेन मेें सुनाई और सबको गदगद कर दिया। शिवचरण सेन शिवा ने ग्रामीण जनजीवन पर ‘घणी कचकच्यां खारया छ ये लोग दणीं। मनख पणां न छोड़ र काणां खटी जारया छ ये लोग दणी’ सुनाई।

इस दौरान रामहेतार मेघवाल ने ‘जवानी इतनी मत इतरारी, जी न भी करयो विश्वास ऊं पछतायो री’ सुना कर वाही – वाही लूटी। प्रकाश सोनी यौवन ने ‘मन की गीता हाथां धर के अब तो सांची बोलां री’ पर खूब दाद पाई। सुरेश निगम ने आज की काव्य यात्रा पर ‘रेल पथ पर चली है काव्य यात्रा मेरी, संग मित्रों के भली है काव्य यात्रा मेरी’ सुना कर समां बांध दिया।

युवा कवि भवानी शंकर वर्मा ने भीषण वर्षा पर घरों में घुसा पानी की तबाही पर ‘पळो देखो र भायांओ पळो आग्यो’ पानी के सैलाब और नुकसान का मंजर सुनाया। कवियत्री प्रीतिमा पुलक ने ‘सावन में साजन रुठ गये’ श्रृंगार रस परोसा। वहीं अरुणिमा रेखा सक्सेना ने ‘मन मंदिर में तुझे बिठा कर मैं तो नाचूं सांवरिया’ सुनाया। जगदीश झालावाड़ी ने देशभक्ति जोशीला गीत ‘मत माटी की कीमत बेचो, भारत मां की सांसों को, खूनी कलम से लिखना छोड़ो तुम खूनी इतिहासो को’ सुनाया। मोहनलाल वर्मा ने वर्तमान ज़माने की प्रासंगिकता पर ‘दुनिया में लोग बदलने लगे हैं, बच्चे भी माता-पिता से बदलने लगे हैं, कौन किसके सगे हैं’ सुनाया।

वरिष्ठ साहित्यकार कवि परमानन्द भारती ने जोशीला और जाग्रति गीत ‘आज मेरे देश को फिर ज्ञान चाहिए, महावीर गौतम बुद्ध से भगवान चाहिए’ सुना कर जोश भर दिया। अंत में पुस्तकालयाध्यक्ष कैलाश चन्द राव ने सबका आभार व्यक्त किया।

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