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ऐसा रहा 10 दिनों का 46वाँ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह

गोवा में 20 से 30 नवंबर तक आय़ोजित 46वें भारत अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 2015 के समापन अवसर पर संगीत के माध्यम से सिनेमा की भावना व्यक्त किया गया और अर्जेन्टिना की फिल्म ‘द क्लैन‘ गई। 10 दिन तक चले समारोह के प्रमुख आकर्षण इस प्रकार थे-

भारत अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पहली बार यूनेस्को फेलिनी पदक।

भारत अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह 2015 में स्पेन फोकस देश रहा।

पंजीकृत प्रतिनिधियों की कुल संख्या- 7000

अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक मंडल में अध्यक्ष शेखर कपूर के साथ ब्रिटेन स्थित निर्देशक माइकल रैडफोर्ड, फलिस्तीन स्थित निर्देशक सुश्री सुहा अराफ , जर्मन अभिनेत्री जुलिया जेन्स तथा दक्षिण कोरिया के जियों क्यू ह्वान थे।

13 सदस्यीय फीचर निर्णायक मंडल के अध्यक्ष अरिबम श्यामशर्मा रहे जबकि 7 सदस्यीय गैर-फीचर निर्णायक मंडल के प्रमुख राजेंद्र जांगले रहे।

महोत्सव में प्रीमियर की कुल संख्या( विश्व ,अंतर्राष्ट्रीय ,एशिया और भारत)- 120

इस वर्ष के महोत्सव में 820 से अधिक फिल्म प्रतिनिधियों की मेजबानी की गई। इनमें 540 राष्ट्रीय , 280 अंतर्राष्ट्रीय निर्देशक, अभिनेता , प्रोड्यूसर और टेकनीशियन रहे। इनमें आस्कर अकादमी के सदस्य तथा हालीवुड के विशेषज्ञ शामिल हैं।

प्रविष्टि के लिए 790 फिल्में मिलीं।

फिल्मों का अंतिम चयन- 182(विदेशी सिनेमा)

भाग लेने वाले देशों की संख्या- 90

फिल्म- द मैन हू न्यू इनफिनिटी, मिड फेस्ट फिल्म – मीडिया और दर्शकों ने डेनमार्क की बालिका की सराहना की

क्लोजिंग फिल्म- एल क्लैन का चयन 72वें वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में दिखाने के लिए चुनी गई थी, जहां निर्देशक पैबलो ट्रापेरो ने सिल्वर लायन जीता। यह फिल्म 88वें अकादमी पुरस्कार के लिए श्रेष्ठविदेशी भाषा फिल्म वर्गमें अर्जेन्टिना के प्रवेश के लिए चुनी गई थी।

केन्स, बर्लिन , टोरंटो तथा लोकार्नो फिल्म समारोह की अनेक बड़ी फिल्मों सहित 26 अधिकारिक आस्कर प्रविष्टियां ।

भारतीय पैनोरामा में 47 फिल्में(फीचर और गैर-फीचर)।

पूर्वोत्तर से नया क्षितिज- जाने-माने फिल्मकार अरिबम श्याम शर्मा पर विशेष रेट्रोस्पेक्टिव तथा पूर्वोत्तर के पीढ़ी के फिल्मकारों पर विशेष वर्ग।

स्पर्धाओं में 15 फिल्मों में से देशों से 5 फिल्में आस्कर प्रविष्टि रहीं। इस सूची में कोलंबिया की सिरो गुएरा निर्देशित एल एब्रेजो डी ला सरपिन्टे(इमब्रैस आप द सर्पेंट) , फ्रांस की डेनिज गेमजे इरगुवेन निर्देशित मुस्तंग , जर्मनी की रिसियारेली निर्देशित आस्कर प्रविष्टि लैबरिन्थ डेस श्वीजेन्स(लैबरिन्थ आफ लाइज) , आइसलैंड की हकोनारसन निर्देशित आस्कर प्रविष्टि रैम्स तथा सर्बिया की गोरान रादोवानोविक निर्देशित इनक्लेव शामिल हैं।

46वें भारत अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विश्व सिनेमा में योगदान के लिए रूस के फिल्मकार , अभिनेता और सिनेमाटोग्राफर यूनियन के नीकीता मिखालकोव को लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार। समारोह में बर्नट् बाय सन , बार्बर आफ साइबेरिया ओबलोम्बो जैसी उनकी चुनिंदा फिल्मों को सम्मान दिया गया ।

महोत्सव में जाने-माने संगीतकार इलयाराजा को शताब्दी व्यक्तित्व पुरस्कार दिया गया ।
फिल्म और सांस्कृतिक विविधता पर आसीएफटी -यूनेस्को का आयोजन। इसमें श्री फिलिप क्यी(फ्रांस) , श्री चार्ल्स वैलेरैन्ड (कनाडा) तथा सुश्री शारदा रामनाथन(भारत) ने भाग लिया।

फिक्की के सहयोग से अमेरिका में शूटिंग पर उद्योग के पेशेवर लोगों के साथ संवाद।
डीएवीपी तथा एनएफएआई द्वारा मल्टी मीडिया प्रदर्शनी का आयोजन।

शशि कपूर पर विशेष रेट्रोस्पेक्टिव में प्रख्यात अभिनेता शशि कपूर की 8 फिल्मों की झलकियां दिखाई गईं। उनमें जुनून(1978),न्यू डेल्ही टाइम्स(1986),उत्सव(1984) , इन कस्डी (मुहाफिज)(1993), कलयुग(1981), दीवार(1975), शेक्सपीयरवाला(1965) तथा हाउस होल्डर(1963) शामिल हैं।

आस्कर अकादमी का तीन सदस्यों का दल पहली बार मास्टर क्लासेज के लिए भारत आया । प्रतिनिधिमंडल में शामिल मार्क मैन‍गिनी, मिल्‍ट शेफ्टर हमफेरी डिक्सन तथा नैन्‍सी बिशप ने साउंड डिजायनिंग , फिल्‍म आर्काइव, संपादन तथा कास्टिंग पर व्याख्यान दिए।

अनिल कपूर, इल्या राजा , सोनाक्षी सिन्हा , कबीर खान , देव पटेल , मार्क मैनगिनी , आयुष्मान खुराना , अदिति राव हैदरी , जैकी श्राफ , नाना पाटेकर , सचिन पिलगांवकर , सुभाष घई , शेखर कपूर , कौशिक गांगुली , एडवर्ड प्रेसमैन , नीकीता मिखालकोव , माइकेल रैडफोर्ड , जुलिया जेन्स , सुहा अराफ , राज कुमार हीरानी , प्रियदर्शन, वेत्रीमारन, मधुर भंडारकर, आन्‍नद एल राय, श्‍याम बेनेगल, के.के. सेनथिल कुमार तथा शेखर महादेवन शामिल हुए।

राष्‍ट्रीय फिल्‍म विरासत मिशन के आर्कषण को दिखाने के लिए रिस्टोर्ड क्लासिक वर्ग । यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की परिकल्पना से बना और इसका उद्देश्य भविष्य के लिए सिनेमा की समृद्ध और विविध विरासत को संजो कर रखना है।

विश्व सिनेमा में उभरती मेधा लिए विशेष रूप से बनाए वर्ग फर्स्ट कट में नए विदेशी फिल्मकारों की कृतियों को दिखाया गया। इन फिल्मकारों में ब्रियन पर्किन्स (गोल्डल किंगडम-अमेरिका) , माइकेल क्लेटे (सोलनेस- जर्मनी) तथा पियोट्र चेरजन( साइ लव- पोलैंड) तथा अन्य रहे।

वुमनक्लेचर आफ सिनेमा का विशेष वर्ग बना जिसमें भारतीय महिला फिल्मकारों की कृतियां दिखाई गईं। इनमें अंजलि मेनन( मजादिकुरु) अपर्णा सेन ( 36 चौरंगी लेन), जोया अख्तर (जिंदगी ना मिलेगी दोबारा) शामिल हैं।

संवाददाता सम्‍मेलनों का सूत्रबद्ध रूप में आयोजन, फेस्‍टीवल मोबाइल ऐप त‍था फौरी सूचना, कंटेंट और मेहमानों तथा प्रतिनिधियों के लिए अन्‍य पहल।

अनेक फिल्‍मों को दिखाने के बावजूद सिनेमा हॉल रोजाना हाउसफुल रहे।

कार्यक्रम ‘इन कनवरसेसन’ में राजकुमार हीरानी, मधुर भंडारकर, श्‍याम बेनेगल, वेत्रीमारन, कौशिक गांगुली, राकेश ओम प्रकाश मेहरा, प्रियदर्शन, आनंद एल राय विशेष श्रृंखलाओं में शामिल हुए। इन श्रृंखलाओं के माध्‍यम से दर्शकों को फिल्‍मकारों तथा फिल्‍म विशेषज्ञों से संवाद करने का अनूठा अवसर मिला।

महोत्‍सव में समकालीन अर्जीटिनियाई सिनेमा का पैकेज प्रस्‍तुत किया गया। इसमें दिखाई गई फिल्‍मों में अर्जेंटिना जोन्‍डा, एल सिनको, इंटिमेट विटनेस, मेक्सिकन ओपरेशन, रैपचर, वाइल्‍ड टेल्‍स शामिल हैं।

बड़ी संख्‍या में दर्शक और मीडिया कर्मी ओपन फोरम तथा दैनिक संवादाता सम्‍मेलनों में शामिल हुए।

समापन समारोह में अर्जेंटिना, नाइजीरिया तथा कंसुलेट जनरल ऑफ तुर्की के प्रतिनिधि मेहमान । ओपनिंग समारोह में स्‍पेन तथा इसरायल के प्रतिनिधि शामिल हुए।

राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों के सा‍थ लाईव सोशल मीडिया संवाद।

विभिन्‍न वर्गों में फिल्‍मों के चयन से विदेशी और भारतीय प्रतिनिधि प्रसन्‍न हुए।
भारतीय दर्शकों को विश्‍व सिनेमा का श्रेष्‍ठ दिखाया गया और श्रेष्‍ठ भारतीय सिनेमा की अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिनिधियों ने तारीफ की।

शाम के मुख्‍य अतिथि ए आर रहमान थे। महोत्‍सव में पेबलो सीजर, जॉन डी बेल्‍स, गु‍नीत मोंगा, माइकल वार्ड, निशीथ ताकिया, लोन्‍ना स्टेस, यंग वू किम शामिल हुए।

पुरस्‍कार प्राप्‍त फिल्‍मकार भागीरथी, तपन विश्‍वास, श्रीजीत मुखर्जी, कौशिक गांगुली त‍था सिनेमा की अनेक हस्तियों ने अपने प्रशंसकों और मीडिया से मुलाकात और बातचीत की।

महोत्सव में विश्‍व‍सिनेमा की असाधारण फिल्‍मों को दिखाने का मानक तय हुआ और आधिकारिक ऑस्कर प्र‍‍विष्टियों वाली 26 देशों की फिल्‍में दिखाई गईं। यह फिल्‍में केंस, वेनिस, बर्लिन तथा बुसान फिल्‍म उत्‍सवों का हिस्‍सा रही हैं।

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